
पिछड़ों और वंचितों के मसीहा थे, जननायक कर्पूरी ठाकुर: अशोक विश्वकर्मा।
वाराणसी। उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी पिछड़ा वर्ग विभाग के प्रदेश उपाध्यक्ष एवं एडवाइजरी काउंसिल के सदस्य अशोक कुमार विश्वकर्मा ने जननायक कर्पूरी ठाकुर के जन्मदिवस पर उन्हें नमन करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि जननायक कर्पूरी ठाकुर समाज के वंचित शोषित दलित और पिछड़े वर्गों के सामाजिक उत्थान और विकास के मसीहा थे। उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन सामाजिक न्याय समानता और पिछड़ों के मान-सम्मान एवं स्वाभिमान के लिए समर्पित कर दिया। वह सादगी और ईमानदारी के मिशाल सच्चे समाजवादी राजनेता थे। मुख्यमंत्री रहने के बावजूद उनके पास ना अपना घर था न मोटर कार, 1977 में लोकनायक जयप्रकाश नारायण के एक कार्यक्रम वह फटे कुर्ते और टूटी चप्पल में पहुंचे थे। उन्होंने मंडल कमीशन का आरक्षण लागू होने से पहले ही मुंगेरीलाल आयोग की सिफारिशों को लागू करते हुए 1978 में ही आरक्षण का फार्मूला लागू कर दिया था। उन्होंने आरक्षण का मुंगेरीलाल फार्मूला लागू कर पिछड़ों और अति पिछड़ों को सशक्त बनाने की नींव रख दी थी। वह अपनी ईमानदारी, सादगी और पिछड़ों/गरीबों के उत्थान के लिए प्रसिद्ध थे। उन्होंने शिक्षा और भाषा के साथ ही प्रशासनिक और अन्य सामाजिक सुधार की दिशा में ऐतिहासिक कार्य किया जो वंचितों के आर्थिक सुधार की दिशा में एक बड़ा कदम था। उन्होंने भूमिहीन दलित और गरीबों को जमीन दिलाने के लिए प्रयास किया। बेरोजगार इंजीनियरों के लिए सरकारी ठेकों में प्राथमिकता की नीति अपनाई। कर्पूरी ठाकुर ने पिछड़े गरीबों शोषितों और वंचितों को अधिकार दिलाने के लिए निस्वार्थ कार्य किया जिसके लिए उन्हें सदैव याद किया जाएगा। उन्हें मरणोपरांत 2024 में भारत सरकार के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया। पिछड़ों और वंचितों के मसीहा होने के कारण उन्हें “जननायक” के रूप में जाना जाता है।
