
राष्ट्रीय बालिका दिवस पर हुई पतंग प्रतियोगिता।
वाराणसी, 24 जनवरी | सामाजिक रुढियों को तोड़ने और लैंगिक समानता के लिए राष्ट्रीय बालिका दिवस के अवसर पर डॉ. शम्भुनाथ सिंह रिसर्च फाउंडेशन द्वारा अपनी परियोजना बस्तियों क्रमशः संदहा एवं सलारपुर में बालिका पतंग प्रतियोगिता का आयोजन किया गया | कार्यक्रम की थीम “हर बेटी को आसमान चाहिए, डर नहीं पहचान चाहिए” थी, जिसके अंतर्गत 10-10 बालिकाओं के समूह में उन्हें उक्त सन्देश लिखी हुई पतंगे दे कर उन्हें पतंगों की ऊची उडान भरने और पेंच लडाने हेतु प्रोत्साहित किया गया | शुरुआती झिझक के बाद सभी लड़कियों ने पुरे उत्साह और उमंग के साथ पतंगे उड़ानी शुरू की और पूरा मैदान भाक्काटे के नारों से गूंज उठा | बालिकाओं के अभिभावकों एवं दर्शकों के लिए यह आश्चर्य मिश्रित कौतुहल का विषय था |
पतंग प्रतियोगिता के समापन के अवसर पर पुरस्कार वितरण के पूर्व उपस्थित जन समूह को सम्बोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि आज के दौर में यदि लड़कियों को बाल श्रम, बाल यौन शोषण, बाल विवाह, कैशोर्य रूमानियत,अर्ली प्रेगनेंसी तथा लैंगिक भेदभाव जैसी सामाजिक बुराइयों से बचा कर उन्हें पोषण, स्वास्थ्य, शिक्षा, सुरक्षा और कौशल विकास का समान अवसर दिया जाए तो वे भी अन्तरिक्ष की ऊंचाईयां छू सकती है, जिसका प्रत्यक्ष उदाहरण कल्पना चावला व सुनीता विलियम्स जैसी लड़कियां जिन्होंने क्रमशः हरियाणा, गुजरात जैसे राज्यों से निकल कर अन्तरिक्ष की ऊँचाइयों को छुआ | आज तीनो सेनाओं के रेजिमेंट्स में लड़कियां अग्रिम मोर्चे पर अपना पराक्रम दिखा रही है | ये सब अवसर उन्हें लैंगिक समानता के अधिकार के कारण ही प्राप्त हुए है | कार्यक्रम समापन के अवसर पर उपस्थित अभिभावकों ने यह शपथ ली की वे अपनी बेटियों को उपरोक्त सामाजिक बुराइयों से बचा कर शिक्षा और विकास के समान अवसर प्रदान करेंगे ताकि वे अपने सपनों के आसमान को छू सके |
इस अवसर पर ख़ुशी, तनु, शिवानी, शीतल को उत्कृष्ठ पतंगबाज का पुरस्कार तथा शेष प्रतिभागियों को प्रतिभागिता प्रमाण पत्र देकर संस्था की कार्यक्रम निदेशक डॉ.रोली सिंह एवं कार्यक्रम प्रबंधक राजश्री शुक्ला ने सम्मानित किया | कार्यक्रम का संयोजन रश्मि, आकांक्षा और मयंक ने किया | पुजा, निशा, अनिकेत, आंचल, सुरेश आदि ने सहयोग प्रदान किया |
