रिपोर्ट-जयप्रकाश सिंह
बहुआयामी समाचार
एम डी न्यूज़ अलीगढ
हमारे देश में सबसे संगठित लूट आज ब्लड टेस्ट, X-Ray और Ultrasound के नाम पर चल रही है।
डॉक्टर मनमर्जी से जांच लिख देता है , गरीब-मध्यम वर्ग डर के मारे जांच करा लेता है।
हर टेस्ट ₹1,000 से ₹7,000 और कई बार एक ही बीमारी में 10–15 गैरज़रूरी जांचें।
अब सीधे सवाल सिस्टम और अधिकारियों से
इन प्राइवेट लैब्स की रेट लिस्ट कौन तय करता है?
क्या हर जांच से पहले मेडिकल जस्टिफिकेशन अनिवार्य है या बस कमीशन??
डॉक्टर और लैब के बीच कट-प्रैक्टिस पर कार्रवाई कब होगी?
National Accreditation Board for Testing and Calibration Laboratories की मान्यता होने के बाद भी ओवरचार्जिंग कैसे चल रही है?
Indian Medical Association इस लूट पर चुप क्यों है?
गरीब मरीज को यह बताने वाला कौन है कि कौन-सी जांच ज़रूरी है और कौन-सी नहीं?
हकीकत
जांच लिखो → डर पैदा करो → महंगी लैब भेजो → कमीशन खाओ।
इलाज सस्ता नहीं , जांच सबसे महंगी।
बीमा/योजना के बाहर का मरीज कर्ज में डूबता है।
मांग साफ है
रेट-कैपिंग , ऑनलाइन पब्लिक रेट बोर्ड, डिजिटल जस्टिफिकेशन नोट अनिवार्य।
अनावश्यक जांच पर डॉक्टर-लैब दोनों पर कड़ी सज़ा।
ऑडिट ट्रेल और व्हिसलब्लोअर सुरक्षा।
बीमारी से लड़ना मुश्किल है , लूट से लड़ना उससे भी ज़्यादा।
गरीब की जेब नहीं इस सिंडिकेट पर हाथ डालिए?
