बाराबंकी। माहे रमजान की शुरुआत के साथ जनपद में अकीदत, इबादत और रौनक का खूबसूरत माहौल देखने को मिल रहा है। बुधवार शाम चांद दिखाई देने के बाद गुरुवार को पहला रोजा रखा गया। इस खास मौके पर बुजुर्गों के साथ-साथ नन्हे-मुन्ने बच्चों ने भी पूरे उत्साह और जज़्बे के साथ अपना पहला रोजा रखा। रोजा इस्लाम में सब्र, आत्मसंयम और नेक रास्ते पर चलने की सीख देने वाला पवित्र अमल माना जाता है।

कमला नेहरू पार्क में मीडिया से बातचीत के दौरान बच्चों ने खुशी जाहिर करते हुए बताया कि रोजा रखने से अच्छे काम करने और बुराइयों से दूर रहने की प्रेरणा मिलती है। 15 वर्षीय मोहम्मद अरकान ने बताया कि यह उनका पहला रोजा है और वह इसे पूरी श्रद्धा और खुशी के साथ रख रहे हैं। वहीं मोहम्मद अयान, मोहम्मद फरहान, मोहम्मद इशराक, मोहम्मद आसिम और मोहम्मद अरशद ने कहा कि वे सभी रोजे रख रहे हैं और नमाज़-ए-तरावीह में भी हिस्सा ले रहे हैं। सबसे खास बात यह रही कि 8 वर्षीय सज्जाद ने भी अपनी इच्छा से पहला रोजा रखा और कहा कि वह इंशाल्लाह पूरे रमजान रोजे रखने की कोशिश करेंगे।
नेहरू नगर निवासी मोहम्मद फराज ने बताया कि रोजा केवल भूखा-प्यासा रहने का नाम नहीं है, बल्कि यह इंसान को सब्र, सच्चाई, इंसानियत और जरूरतमंदों की मदद करना सिखाता है। रमजान के इस पाक महीने में मस्जिदों में जाकर कुरान शरीफ की तिलावत करना और इबादत करना सबसे बड़ा सवाब माना जाता है।
मगरिब की नमाज़ के बाद बेगमगंज स्थित कर्बला वाली मस्जिद, शाही मस्जिद घोसियाना, कंपनी बाग मस्जिद, लक्खेड़ा बाग मस्जिद, एक मिनारा मस्जिद, अमीना मस्जिद समेत जनपद की तमाम मस्जिदों में नमाज़-ए-तरावीह अदा की गई, जहां बड़ी संख्या में लोगों के साथ बच्चों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। चांद दिखने के बाद से मस्जिदों और बाजारों में खास रौनक देखने को मिली, वहीं जगह-जगह होटल और खाने-पीने की दुकानों पर भी लोगों की भीड़ नजर आई।
रमजान के पहले रोजे ने पूरे जनपद में भाईचारे, इबादत और खुशी का एक खूबसूरत संदेश दिया, जिसमें बच्चों का उत्साह सभी के लिए प्रेरणा का केंद्र बना रहा।
रिपोर्टर धीरेन्द्र वर्मा
