बाराबंकी : आसमान में बदली धुंध और तेज हवाओं के चलते सरसों जैसी तिलहनी फसल तैयार होने के कगार पर है।वही किसानों को चिंता है कि अगर बारिश हुई तो सरसों की फसल तो नष्ट होगी ही इसका दुष्परिणाम गेहूं की तैयार होनी वाली फसलों पर भी पड़ेगा एक तरफ अन्नदाता कहा जाने वाला किसान कड़ी मेहनत और गाढी कमाई से दिन रात मेहनत करके फसलों को पैदा करता है वहीं दूसरी तरफ प्राकृतिक आपदाओं से होने वाली फसलों की तबाही की भी चिंता सताती है संवाददाता द्वारा किसान राम तीरथ से इस संबंध में पूछा गया तो उन्होंने बताया कि हम लोगों ने जमा पूंजी लगाकर फसलों को तैयार किया है जिससे भविष्य में हमारे परिवार को उत्पादन से मिलने वाले पैसों से परिवार की जीविका चल सके लेकिन यह ईश्वर के भरोसे है वास्तव में अगर देखा जाए तो दैवीय आपदाओं से जूझते हुए अन्नदाता कहा जाने वाला किसान सभी प्रकार की मुसीबत का सामना करके अपने परिवार और देश के लिए अन्न पैदा करता है। और साथ ही साथ प्राकृतिक एवं दैवीय आपदाओं का सामना करता रहता है। इस महंगाई में किसान आपदाओ का सामना करके दुखों को झेलकर देश के लिए अनाज उगाता है।

तेज बहादुर शर्मा (मंडल ब्यूरो चीफ अयोध्या)।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *