सेवा में,
महामहिम राज्यपाल महोदय
जिला अधिकारी महोदय
ज़िला पुलिस अधीक्षक लखनऊ
लखनऊ, उत्तर प्रदेश।
माध्यम: लखनऊ जिला प्रशासन
विषय: लखनऊ में पुलिस प्रशासन द्वारा रेहड़ी-पटरी दुकानदारों (स्ट्रीट वेंडर्स) के उत्पीड़न, जबरन दुकानें हटाने और बिना अग्रिम सूचना गैर-योजनाबद्ध रोड डायवर्जन से जनता को हो रही भारी असुविधा के संबंध में।
महोदय/महोदया
हम आपका ध्यान लखनऊ शहर की वर्तमान दमनकारी और अव्यवस्थित प्रशासनिक व्यवस्था की ओर आकर्षित करना चाहते हैं। बहुआयामी राजनीतिक दल (पार्टी) सदैव आम जनता, युवाओं और समाज के सबसे निचले पायदान पर खड़े छोटे व्यापारियों के हकों की आवाज़ उठा रहीई है।
अत्यंत खेद का विषय है कि वर्तमान में लखनऊ पुलिस और जिला प्रशासन विकास तथा सुरक्षा के नाम पर तानाशाही रवैया अपनाए हुए है।
इस संबंध में पार्टी आपके समक्ष मुख्य रूप से निम्नलिखित समस्याओं को रेखांकित करते हुए त्वरित न्याय की मांग करती है:
1.रेहड़ी-पटरी दुकानदारों का दमन और जबरन बेदखली
घंटाघर और ग्रीन कॉरिडोर पर उत्पीड़न: लखनऊ के ऐतिहासिक घंटाघर (हुसैनाबाद) और नवनिर्मित ग्रीन कॉरिडोर के आस-पास सालों से अपनी रोजी-रोटी कमा रहे छोटे गरीब रेहड़ी-पटरी दुकानदारों को पुलिस प्रशासन द्वारा बिना किसी पूर्व नोटिस या वैकल्पिक पुनर्वास के जबरन उजाड़ा जा रहा है।
आजीविका पर संकट: ‘रोजी-रोटी बचाओ’ की गुहार लगा रहे इन छोटे व्यापारियों के ठेलों को ज़ब्त किया जा रहा है और उनके साथ अभद्र व्यवहार किया जा रहा है, जिससे सैकड़ों गरीब परिवार भुखमरी की कगार पर पहुंच गए हैं।
जहां रेहड़ी-पटरी दुकानदारों को हटाया गया है या उनके काम पर असर पड़ा है:
- घंटाघर और हुसैनाबाद (पुराना लखनऊ)
- ग्रीन कॉरिडोर और मन्कामेश्वर मंदिर मार्ग
- लखनऊ विश्वविद्यालय मार्ग और हनुमान सेतु
- चारबाग रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड क्षेत्र
- हजरतगंज और गोमती नगर (वीआईपी इलाके)
- बिना अग्रिम सूचना तुगलकी ‘रोड डायवर्जन’ और सड़कें बंद करना
विश्वविद्यालय मार्ग और हनुमान मंदिर के सामने बैरिकेडिंग: लखनऊ यूनिवर्सिटी मार्ग, ग्रीन कॉरिडोर स्थित हनुमान मंदिर के सामने और विभिन्न प्रमुख धार्मिक स्थलों के आगे बिना किसी पूर्व चेतावनी या सार्वजनिक सूचना के अचानक मुख्य सड़कों को बंद कर दिया जाता है।
जनता और एम्बुलेंस बंधक: अचानक किए जाने वाले इन डायवर्जन्स के कारण रोज़ाना दफ्तर जाने वाले नागरिकों, स्कूली बच्चों और आपातकालीन वाहनों (एम्बुलेंस) को घंटों भीषण जाम में फंसना पड़ता है। ट्रैफिक पुलिस सोशल मीडिया या मुख्य चौराहों पर रूट मैप पहले जारी नहीं करती, जिससे पूरा शहर अस्त-व्यस्त हो जाता है।
जहां लखनऊ में यातायात पुलिस और जिला प्रशासन द्वारा बिना किसी पूर्व सार्वजनिक सूचना एडवाइजरी जारी किए अचानक रास्ते बंद किए गए - हनुमान सेतु और नवनिर्मित ग्रीन कॉरिडोर मार्ग
- लखनऊ विश्वविद्यालय (LU) मार्ग
- हजरतगंज से विधान भवन और रॉयल होटल चौराहा
- चारबाग रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड क्षेत्र
- वीआईपी मूवमेंट (शहीद पथ और सुल्तानपुर रोड कनेक्टर्स)
बहुआयामी राजनीतिक दल (पार्टी) की मुख्य मांगें:
- तत्काल वेंडिंग जोन का आवंटन: घंटाघर, ग्रीन कॉरिडोर और अन्य इलाकों से हटाए गए सभी रेहड़ी-पटरी दुकानदारों को कानून के तहत पहले ‘स्मार्ट वेंडिंग जोन’ में व्यवस्थित जगह दी जाए। जब तक पुनर्वास न हो, तब तक उनकी दुकानें हटाना तुरंत बंद किया जाए।
- 24 घंटे पहले रूट डायवर्जन की सूचना: विश्वविद्यालय मार्ग या किसी भी वीआईपी रूट को बंद करने से कम से कम 24 घंटे पहले समाचार पत्रों और डिजिटल मीडिया पर वैकल्पिक मार्ग (Route Map) सार्वजनिक करना अनिवार्य किया जाए।
- प्रशासनिक जवाबदेही और मुआवजा: जिन गरीब दुकानदारों का सामान पुलिसिया कार्रवाई में नष्ट हुआ है, उन्हें उचित आर्थिक मुआवजा मिले और अभद्रता करने वाले दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई हो।

