उत्तर प्रदेश लखनऊ इस अवसर पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने ‘गो प्रतिष्ठा जनजागरण अभियान’ की शुरुआत करते हुए चतुरंगिणी सेना बनाने का भी एलान किया। उन्होंने अनुयायियों के साथ ऋग्वेद के मंत्रों का सामूहिक जाप कराया और भगवान कृष्ण की चक्र मुद्रा का अभ्यास भी कराया। शंकराचार्य ने कहा कि यह अभियान गाय की रक्षा और उसके सम्मान को स्थापित करने के लिए चलाया जा रहा है।

राजनीति से दूरी, मुद्दों पर समर्थन

मीडिया से बातचीत में शंकराचार्य ने स्पष्ट किया कि, सपा, कांग्रेस या कोई भी राजनीतिक दल इतना चतुर नहीं है कि वो चुनाव में इस्तेमाल कर सके। हम किसी पार्टी के लिए नहीं, बल्कि गंगा और गोरक्षा जैसे मुद्दों के लिए काम कर रहे हैं, जो पहले से भाजपा के भी प्रमुख मुद्दा रहा हैं। चाहे तो भाजपा भी मेरे समर्थन में आ सकती है। सी भी राजनीतिक दल के लिए उनका इस्तेमाल करना संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि वे किसी पार्टी के लिए नहीं बल्कि गंगा संरक्षण और गोरक्षा जैसे विषयों के लिए काम कर रहेचतुरंगिणी सेना’ की अवधारणा

शंकराचार्य ने चतुरंगिणी सेना का अर्थ समझाते हुए बताया कि यह चार प्रमुख शक्तियों पर आधारित होगी, बल, बाहुबल, धनबल और समर्पित सहयोगियों का बल। इसके साथ ही चारों वेदों की प्रेरणा, चार प्रमुख संप्रदायों का सहयोग और चार पीठों का समर्थन भी इसकी ताकत बनेगा। उन्होंने कहा कि इस अभियान में साधु-संतों के साथ आम लोग भी शामिल होंगे। गाय को कष्ट देने वालों को उन्होंने ‘वृत्रासुर’ की संज्ञा देते हुए कहा कि कसाईखाने चलाने वाले, गायों को वहां ले जाने वाले और यह सब देखकर चुप रहने वाले लोग भी इसी श्रेणी में आते हैं।

अखिलेश यादव ने लिया आशीर्वाद

इसी दौरान समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने लखनऊ में शंकराचार्य से मुलाकात कर उनका आशीर्वाद लिया। करीब एक घंटे चली चर्चा में अखिलेश जमीन पर बैठकर उनसे संवाद करते दिखाई दिए। बाद में उन्होंने कहा कि किसी भी नए कार्य की शुरुआत से पहले संत-महात्माओं का आशीर्वाद लेना परंपरा रही है और शंकराचार्य के आशीर्वाद से नकली संतों का पर्दाफाश होगा। उन्होंने गौ संरक्षण के लिए अपनी सरकार के समय किए गए कार्यों का भी जिक्र किया और केंद्र सरकार की नीतियों को रसोई गैस संकट के लिए जिम्मेदार ठहराया।

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