शर्मसार : बाराबंकी जनपद के त्रिवेदीगंज ब्लॉक के अंतर्गत मकनपुर में प्रशासन को शर्मसार करने वाली खबर सामने आई है। मिली जानकारी के अनुसार यहां साफ-सफाई की व्यवस्था बुरी तरह से चरमरा गई। गांव में बने प्राथमिक विद्यालय के सामने गंदगी का अंबार लगा हुआ है। जहां से रोजाना विधालय के छोटे-छोटे छात्र गंदगी के सामने से गुजरने को मजबूर हैं। लेकिन किसी भी जिम्मेदार व्यक्ति की नजर इसपे नहीं पड़ रही है और न ही गंदगी के खिलाफ कोई ठोस कदम उठाया जा रहा है। जिससे बच्चे गंदगी भरे रास्ते से गुजरने पर मजबूर हैं। बच्चों का कहना है की इस रास्ते से जाने पर बदबू आती हैं। लेकिन फिर भी हमें मजबूरी में विद्यालय जाना पड़ता हैं। गेट के सामने बहुत गंदगी पड़ी है, जिससे हमें अजीब लगता है। हम चाहते हैं की इसे हटाया जाए ताकि हम साफ-सुथरी सड़क से जा सके। ये कहना है गंदगी भरे मार्ग से जाने वाले बच्चों। उनको पीड़ा है की हमें प्रशासन द्वारा मजबूर किया जा रहा है की हम ऐसे रास्ते से गुजरे। जो बच्चें आगे चलकर देश का भविष्य बनेंगे उनके रास्ते में हम पहले ही गंदगी भर दी है। कहीं न कहीं ये खबर प्रशासन की मंशा पर गंभीर सवाल खड़ी करती है। आखिर उन बच्चों की पीड़ा को तों मत दबाइए।

दरअसल, मामला ये है कि प्राथमिक विद्यालय जैसे सार्वजनिक स्थानों पर मवेशियों का बांधना सख्त मना है। इसके बावजूद विधालय परिसर के मार्ग पर, धड़ल्ले से जानवरों को बांधा जा रहा है।जिनकी गंदगी को विधालय जाने वाले मार्ग के पास डाला जा रहा है। मार्ग पर एक से डेढ़ फीट लंबी घास खड़ी हैं।जिससे बच्चों के स्वास्थ्य कों लेकर भी सवाल खड़े हों रहें हैं। अगर बारिश के पानी में बहकर ये गंदगी विधालय के अंदर प्रवेश कर गयी तो इससे बच्चों के ऊपर जल जनित (डेंगू, मलेरिया) जैसी घाटक बीमारियों का प्रकोप बढ़ जायेगा। अगर कोई बच्चा इसका शिकार हुआ तों कौन जिम्मेदार होगा। व्यवस्था का ये आलम है कि स्थानीय लोगों में भी आक्रोश है। लोगों ने कहा की हमारे गांव का हाल ऐसा ही है। केवल विधालय ही नहीं, बल्कि पूरे गांव में असंतोषजनक स्थिति बनी हुई हैं। कोई सुनने वाला नहीं है, अब किसी से क्या उम्मीद लगाएं। सड़कों, से लेकर नाली तक कहीं सफाई नहीं होती है। काम के नाम पर केवल आश्वासन दिया जाता है। ग्राम सचिव से लेकर ग्राम प्रधान सभी मिलकर गांव की समस्याओं को नजरंदाज कर रहे हैं। जिससे हमें आय दिन कठिनाइयों से जुझना पड़ता है। लेकिन देखना अब ये है की समस्या को लेकर प्रशासन कितनी तीव्रता से समस्या का निंदान करता है, या पहले कि तरह ही इस बार भी इसे ठंडे बस्ते में डाल दिया जायेगा।

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