
संवाददाता. जे पी सिंह एम डी न्यूज़ अलीगढ
अलीगढ़ में बिजली विभाग की कथित लापरवाही और मनमानी अब अदालत के निशाने पर आ गई है। बिना पूर्व सूचना बिजली काटना और बिल जमा होने के बावजूद सप्लाई बहाल न करना विभाग को भारी पड़ गया। सीजेएम न्यायालय ने कड़ा रुख अपनाते हुए बिजली विभाग के 9 जिम्मेदार अधिकारियों को तलब कर नोटिस जारी किए हैं। मामले की अगली सुनवाई 27 अप्रैल को होगी।
क्वार्सी निवासी अधिवक्ता अनूप कौशिक की याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने चेयरमैन, प्रबंध निदेशक, तत्कालीन मुख्य अभियंता, अधीक्षण अभियंता, अधिशासी अभियंता (वाणिज्यिक), उपखंड अधिकारी (शहरी) और दो अवर अभियंताओं को कटघरे में खड़ा किया है। आरोप बेहद गंभीर हैं—बिना अनुमति मीटर को प्रीपेड में बदल दिया गया और 17 मार्च को अचानक बिजली काट दी गई, जिससे उपभोक्ता को भारी परेशानी उठानी पड़ी।
उधर, स्मार्ट मीटर को लेकर शहर में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। अलीगढ़ के जमालपुर गोल मार्केट के एक दुकानदार को महज 20 दिन में 7 हजार रुपये का बिजली बिल थमा दिया गया, जबकि उसकी दुकान में सिर्फ दो बल्ब और एक पंखा ही चलता है। पहले जहां बिल 800-900 रुपये आता था, वहीं अब कई गुना बढ़ोतरी ने उपभोक्ताओं की कमर तोड़ दी है।
लगातार सामने आ रही तकनीकी खामियां, मनमाने बिल और बिना सूचना सप्लाई काटने की घटनाओं ने साफ कर दिया है कि स्मार्ट मीटर योजना आम जनता के लिए राहत नहीं बल्कि नई मुसीबत बनती जा रही है। अब देखना होगा कि अदालत की सख्ती के बाद विभाग अपनी कार्यप्रणाली में सुधार करता है या नहीं।
