रिपोर्ट-रामानंद सागर

उत्तर प्रदेश में सार्वजनिक पुस्तकालय अधिनियम 2006 दिनांक 4 दिसम्बर 2006 की वर्तमान स्थिती की ओर आकृष्ट कराना है कि, यह अधिनियम प्रदेश के प्रत्येक नागरिक, विशेषकर ग्रामीण और वंचित क्षेत्रों के युवाओं को निःशुल्क ज्ञान के स्रोत को उपलब्ध कराने के उद्देश्य से बनाया गया था।

परन्तु पारित होने के वर्षो बाद भी इसका क्रियान्वयन जमीनी स्तर पर नही हो सका। अधिकांश पुस्तकालय या तो बन्द पड़े हैं या तो संसाधनों के आभाव में बन्द होने की कगार पर है।


अधिनियम के लक्ष्यों को प्राप्त करने हेतु आपसे निम्नलिखित मुख्य बिन्दु पर नीतिगत हस्ताक्षेप का आग्रह है-

  1. जिला पुस्तकालय प्राधिकरण का गठन (धारा 8)- अधिनियम की धारा 8 के तहत प्रत्येक जनपद में ‘जिला पुस्तकालय प्राधिकरण’ का अनिवार्य गठन किया जाए, ताकि पुस्तकालयों का प्रशासनिक ढांचा सुदृढ़ हो सके।
  2. सार्वजनिक पुस्तकालय निधि का सृजन (धारा 12)- धारा 12 के अनुसार ‘पुस्तकालय उपकर’ लागू कर एक समर्पित निधि बनाई जाए, जिससे पुस्तकालय आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सके।
  3. डिजिटल संसाधनों का एकीकरण (धारा 2)- आधुनिक समय की मांग को देखते हुये पुस्तकालय सामग्री में डिजिटल संसाधनों को शामिल कर एक एकीकृत राजय व्यापी डिजिटल नेटवर्क तैयार किया जाए।
  4. प्रशिक्षित मानव संसाधन की नियुक्ति (धारा 9)- पुस्तकालयों के बेहतर संचालन हेतु केवल ‘पुस्तकालय विज्ञान’ में डिग्री/डिप्लोमा धारक योग्य व्यक्तियों की ही नियुक्ति सुनिश्चित की ज

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