रामपुर रज़ा पुस्तकालय में एक महत्वपूर्ण एवं ऐतिहासिक समझौता ज्ञापन (MoU) हस्ताक्षर समारोह सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ। यह समझौता रामपुर रज़ा पुस्तकालय, वृंदावन शोध संस्थान, वृंदावन, मथुरा तथा ख़्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय, लखनऊ तथा के मध्य संपन्न हुआ।इस अवसर पर तीनों संस्थानों के बीच अनुसंधान, अनुवाद, प्रदर्शनी, सेमिनार, संगोष्ठी एवं अन्य शैक्षणिक व सांस्कृतिक गतिविधियों के क्षेत्र में सहयोग को सुदृढ़ करने हेतु सहमति व्यक्त की गई। यह समझौता ज्ञापन भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण, संवर्धन एवं वैश्विक प्रसार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध होगा।

समारोह में वृंदावन शोध संस्थान, वृंदावन, मथुरा से निदेशक डॉ. राजीव द्विवेदी एवं प्रशासनिक अधिकारी श्री रजत शुक्ला ने कार्यक्रम में सहभागिता की।

इसी क्रम में ख़्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय, लखनऊ से कुलपति डॉ. अजय तनेजा, डॉ. अब्दुल हफीज (समन्वयक, MoU), डॉ. मोहम्मद अकमल, डॉ. आरिफ अब्बास एवं श्री यूसुफ अयाज़ उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का सफल आयोजन रामपुर रज़ा पुस्तकालय के निदेशक डॉ. पुष्कर मिश्र जी के कुशल एवं दूरदर्शी नेतृत्व में सम्पन्न हुआ। उनके मार्गदर्शन में पुस्तकालय ने शोध, अनुवाद एवं सांस्कृतिक गतिविधियों के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है, और यह समझौता उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर सिद्ध होगा।

इस अवसर पर रामपुर रज़ा पुस्तकालय के निदेशक डॉ. पुष्कर मिश्र जी ने अपने वक्तव्य में कहा कि आज का दिन पुस्तकालय के लिए अत्यंत गौरवपूर्ण है और यह उसके दीर्घकालिक स्वप्न की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने बताया कि 7 अक्टूबर 1774 में स्थापित यह संस्थान आज अपने 252वें वर्ष में है और दो शताब्दियों से अधिक के अपने इतिहास में इसने साहित्य, संस्कृति और ज्ञान के क्षेत्र में अद्वितीय योगदान दिया है। उन्होंने कहा कि पुस्तकालय में उपलब्ध दुर्लभ पांडुलिपियाँ विश्वभर के विद्वानों को आकर्षित करती हैं और यहाँ जापान, कोरिया, यूरोप, अमेरिका और ईरान सहित अनेक देशों से शोधार्थी अध्ययन हेतु आते हैं। नवाबों के सतत संरक्षण से समृद्ध यह धरोहर आज बहुभाषिक, बहुविषयक और बहुसांस्कृतिक स्वरूप में विकसित हो चुकी है, जिसमें 21 से अधिक भाषाओं और विभिन्न विषयों—जैसे आयुर्वेद, यूनानी, राजनीति एवं समाजशास्त्र—से संबंधित महत्वपूर्ण सामग्री उपलब्ध है। कहा कि रामपुर रज़ा पुस्तकालय की मूल दृष्टि समन्वय और सह-अस्तित्व पर आधारित है। यह संस्थान विभिन्न संस्कृतियों, भाषाओं और परंपराओं के बीच संवाद स्थापित करने का माध्यम है। उन्होंने वर्तमान वैश्विक परिप्रेक्ष्य में बढ़ती असहिष्णुता और संघर्षों की ओर संकेत करते हुए कहा कि जब तक समाज में परस्पर सम्मान, समन्वय और सांस्कृतिक समझ विकसित नहीं होगी, तब तक स्थायी शांति संभव नहीं है। अंत में उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस प्रकार की साझेदारियाँ ज्ञान, संस्कृति और मानवता के मूल्यों को सुदृढ़ करते हुए समाज को अधिक समरस और शांतिपूर्ण दिशा प्रदान करेंगी।

इस अवसर पर वृंदावन शोध संस्थान, वृंदावन, मथुरा के निदेशक डॉ. राजीव द्विवेदी जी ने कहा कि डॉ. पुष्कर मिश्र जी से हुई मुलाक़ात के दौरान ही इस MoU की आधारशिला रखी गई थी और दोनों संस्थानों ने मिलकर कार्य करने का निर्णय लिया था। उन्होंने कहा कि एक पुरातत्वविद् और म्यूज़ियोलॉजिस्ट के रूप में वे वस्तुओं को एक अलग दृष्टि से देखते हैं—जो सामान्य लोगों के लिए साधारण प्रतीत होता है, वही उनके लिए ज्ञान और सृजन का आधार बन जाता है। उन्होंने बताया कि उन्होंने चार संग्रहालयों के निर्माण में योगदान दिया है और बचपन से ही कला के विविध रूपों—संगीत, चित्रकला, मूर्तिकला, लेखन और कैलिग्राफी—में उनकी गहरी रुचि रही है। डॉ. द्विवेदी ने कहा कि कला मनुष्य के भीतर की कठोरता को दूर कर उसे संवेदनशील बनाती है। रामपुर रज़ा पुस्तकालय के समृद्ध संग्रह को देखकर वे अत्यंत प्रभावित हुए और इसे ज्ञान का अनमोल भंडार बताया। उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त की कि अब यह सहयोग द्विपक्षीय से आगे बढ़कर त्रिपक्षीय रूप ले चुका है। उन्होंने बताया कि वृंदावन शोध संस्थान वर्ष 1968 से कार्यरत है और वर्तमान में वहाँ 30,000 से अधिक पांडुलिपियों का संग्रह है, जो विभिन्न विषयों एवं भाषाओं में उपलब्ध हैं। इनका डिजिटलीकरण किया जा रहा है तथा शोधार्थियों के लिए समृद्ध संदर्भ पुस्तकालय भी उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि अब तक दोनों संस्थान अलग-अलग कार्य कर रहे थे, लेकिन इस MoU के माध्यम से संयुक्त प्रयासों से अधिक उत्कृष्ट परिणाम सामने आएंगे—“हम उँगलियों से मुट्ठी बनेंगे।” अंत में उन्होंने युवाओं से संरक्षण के क्षेत्र में आगे आने का आह्वान किया और बताया कि पांडुलिपियों के संरक्षण, अनुवाद एवं लिप्यंतरण में व्यापक रोजगार की संभावनाएँ हैं।

इस अवसर पर ख़्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय, लखनऊ के कुलपति डॉ. अजय तनेजा जी ने अपने वक्तव्य में कहा कि यह समझौता इतिहास में एक नए अध्याय की शुरुआत है। उन्होंने कहा कि रामपुर रज़ा पुस्तकालय जैसा समृद्ध ज्ञान-संग्रह शोध, अध्ययन और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के लिए एक अमूल्य धरोहर है, जिसे प्रसारित करने और उस पर संयुक्त रूप से कार्य करने के लिए यह MoU अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने विश्वविद्यालय की जानकारी देते हुए बताया कि यह एक बहुविषयी (मल्टीडिसिप्लिनरी) संस्थान है, जिसकी स्थापना 2014-15 में हुई और वर्तमान में यहाँ सात संकायों के अंतर्गत लगभग 34 विभागों में पाँच हजार से अधिक विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। भाषाओं के साथ-साथ विधि, अभियांत्रिकी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, साइबर सुरक्षा, सामाजिक विज्ञान, शारीरिक शिक्षा एवं शिक्षा जैसे विषयों में भी अध्ययन की सुविधा उपलब्ध है। डॉ. तनेजा ने कहा कि इस MoU के माध्यम से विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों और शिक्षकों को पुस्तकालय के समृद्ध साहित्य एवं सांस्कृतिक विरासत तक पहुँच प्राप्त होगी, जिससे शोध एवं नवाचार को नई दिशा मिलेगी। उन्होंने यह भी बताया कि यह सहयोग केवल सांस्कृतिक आदान-प्रदान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि शोध, अकादमिक गतिविधियों तथा परस्पर भ्रमण (एक्सचेंज) कार्यक्रमों को भी प्रोत्साहित करेगा। अंत में उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस संयुक्त प्रयास से ज्ञान, संस्कृति और अनुसंधान के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति होगी तथा दोनों संस्थान मिलकर देश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएँगे।

कार्यक्रम का सफल संचालन आस्था भारती झा द्वारा किया गया। समारोह के अंत में सभी अतिथियों के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया गया तथा भविष्य में संयुक्त रूप से विविध शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों के सफल आयोजन का विश्वास प्रकट किया गया। इस अवसर पर अनेक गणमान्य व्यक्तियों की गरिमामयी उपस्थिति रही।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *