लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने श्रमिक परिवारों के बच्चों को शिक्षा से जोड़ने के लिए बड़ा कदम उठाया है। सीएम योगी ने बाल श्रमिक विद्या योजना को प्रदेश के सभी 75 जिलों में लागू करने के निर्देश दिए हैं। इस योजना के तहत 8 से 18 वर्ष तक के कामकाजी बच्चों को स्कूलों में दाखिला दिलाने के साथ आर्थिक सहायता भी प्रदान की जाएगी।

शनिवार को श्रम एवं सेवायोजन विभाग की समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि कोई भी बच्चा आर्थिक तंगी के कारण शिक्षा से वंचित नहीं रहना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को बाल श्रम प्रभावित क्षेत्रों में विशेष अभियान चलाकर बच्चों को विद्यालयों से जोड़ने के निर्देश दिए। साथ ही निजी क्षेत्र के सहयोग से बच्चों के कौशल विकास की कार्ययोजना तैयार करने पर भी जोर दिया गया।

वर्ष 2020 में शुरू हुई बाल श्रमिक विद्या योजना फिलहाल प्रदेश के सीमित जिलों में संचालित थी, लेकिन अब इसे पूरे उत्तर प्रदेश में लागू किया जाएगा। योजना के माध्यम से बच्चों को पढ़ाई के लिए प्रोत्साहित करने के साथ उनके भविष्य को बेहतर बनाने का प्रयास किया जा रहा है।

बैठक में मुख्यमंत्री ने सेवामित्र व्यवस्था को भी रोजगार और जनसुविधा का प्रभावी मॉडल बताया। अधिकारियों के अनुसार नागरिक मोबाइल ऐप, वेब पोर्टल और कॉल सेंटर के माध्यम से घरेलू सेवाएं प्राप्त कर सकते हैं। वर्तमान में इस प्लेटफॉर्म पर हजारों सेवा प्रदाता और कुशल कामगार पंजीकृत हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता उद्योगों के अनुकूल माहौल बनाने के साथ-साथ श्रमिकों के हितों की रक्षा करना भी है, ताकि श्रमिकों को सम्मानजनक जीवन और सुरक्षित कार्य वातावरण मिल सके।

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