
MD न्यूज़ (मोहम्मद अशफाक)
गोला गोकर्णनाथ खीरी। जनपद के अजान क्षेत्र में कथित तौर पर झोलाछाप डॉक्टरों का जाल तेजी से फैलता जा रहा है। गांव-कस्बों में खुलेआम ऐसे क्लिनिक संचालित होने के आरोप हैं, जहां न मान्यता है, न पंजीकरण और न ही प्रशिक्षित डॉक्टर—फिर भी मरीजों का इलाज धड़ल्ले से किया जा रहा है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर स्वास्थ्य विभाग सब कुछ जानते हुए भी खामोश क्यों है?
“चंद्रा डेंटल क्लिनिक” पर गंभीर आरोप
अजान क्षेत्र में संचालित चंद्रा डेंटल क्लिनिक इस समय लोगों के निशाने पर है। ग्रामीणों का आरोप है कि क्लिनिक संचालक डॉ.अर्पित वर्मा के पास डेंटल चिकित्सा की कोई मान्यता प्राप्त डिग्री नहीं है, इसके बावजूद क्लिनिक के बोर्ड पर बड़े-बड़े अक्षरों में “DDH” लिखकर मरीजों का इलाज किया जा रहा है।
ग्रामीणों का दावा—इंटर तक पढ़ाई, लेकिन बना ‘डेंटल एक्सपर्ट’!
स्थानीय लोगों का कहना है कि संचालक ने केवल इंटरमीडिएट तक शिक्षा प्राप्त की है, फिर भी खुद को दांतों का विशेषज्ञ बताकर मरीजों का उपचार कर रहे हैं। जब उनसे डिग्री और प्रमाणपत्र दिखाने की बात कही गई तो कथित तौर पर वह कोई दस्तावेज मौके पर प्रस्तुत नहीं कर सके और जवाब दिया कि “डिग्रियां घर पर रखी हैं।”
अब उठ रहे बड़े सवाल…
अगर डिग्री है तो दिखाई क्यों नहीं गई?
अगर डिग्री नहीं है तो आखिर मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ किसके संरक्षण में हो रहा है?
खाता न बही,जो झोलाछाप कहे वही सही!”
ग्रामीणों का आरोप है कि अजान क्षेत्र में कई ऐसे क्लिनिक चल रहे हैं जहां बिना पंजीकरण और बिना विशेषज्ञता के इलाज किया जा रहा है। मामूली दांत दर्द से लेकर गंभीर समस्याओं तक का उपचार कथित फर्जी डॉक्टरों द्वारा किया जा रहा है, जिससे कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।
स्वास्थ्य विभाग पर भी उठी उंगलियां लोगों का कहना है कि विभागीय मिलीभगत के बिना इतने बड़े स्तर पर अवैध क्लिनिकों का संचालन संभव नहीं है। सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या जिम्मेदार अधिकारी जानबूझकर आंखें मूंदे बैठे हैं?
ग्रामीणों की चेतावनी
क्षेत्रीय लोगों ने मांग की है कि अजान क्षेत्र में संचालित सभी निजी क्लिनिकों की तत्काल जांच कराई जाए, फर्जी डॉक्टरों पर मुकदमा दर्ज हो और बिना मान्यता चल रहे क्लिनिकों को सील किया जाए। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो मामला उच्च अधिकारियों और शासन तक पहुंचाया जाएगा।
सबसे बड़ा सवाल आखिर बिना डिग्री और बिना वैध अनुमति के क्लिनिक कैसे चल रहे हैं?
क्या स्वास्थ्य विभाग की चुप्पी किसी बड़े खेल का संकेत है?
मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ करने वालों पर कब गिरेगी कार्रवाई की गाज।
