​निचलौल (महराजगंज)।उत्तर प्रदेश के महराजगंज जिले के निचलौल क्षेत्र से एक बड़ा मामला सामने आया है, जहां फर्जी दस्तावेजों के आधार पर संचालित की जा रही एक कंपोजिट शराब दुकान के लाइसेंस को आबकारी विभाग ने तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। विभाग ने यह कड़ा कदम एक स्थानीय नागरिक की शिकायत पर हुई जांच के बाद उठाया है। इसके साथ ही आरोपी अनुज्ञापी (लाइसेंस धारक) को 7 दिनों के भीतर स्पष्टीकरण देने का नोटिस भी जारी किया गया है।

​क्या है पूरा मामला?

​जानकारी के मुताबिक, निचलौल के मारवाड़ी मुहल्ला निवासी भरत कुमार अग्रवाल ने बीते 10 अप्रैल 2026 को उप जिलाधिकारी (SDM) निचलौल को एक शिकायती पत्र सौंपा था। इस शिकायत में उन्होंने आरोप लगाया था कि कंपोजिट शराब दुकान निचलौल नंबर-1 के अनुज्ञापी अविनाश जायसवाल (पुत्र रामाज्ञा जायसवाल) ने दुकान के लिए आबकारी विभाग में जो किरायानामा (रेंट एग्रीमेंट) जमा किया है, उस पर उनके फर्जी हस्ताक्षर (Forged Signatures) किए गए हैं। अपने दावों को साबित करने के लिए शिकायतकर्ता ने 30 मार्च 2026 को प्रस्तुत किए गए कथित फर्जी किरायानामे की एक फोटोकॉपी भी प्रशासन को सौंपी थी।

जांच में सही पाए गए आरोप

​प्रशासन के निर्देश पर निचलौल के आबकारी निरीक्षक वैभव कुमार यादव ने इस पूरे मामले की गहनता से जांच की। जांच में शिकायतकर्ता भरत कुमार अग्रवाल के आरोप शत-प्रतिशत सही पाए गए।

जांच रिपोर्ट के मुख्य बिंदु:
​अविनाश जायसवाल जिस भवन में कंपोजिट शराब की दुकान चला रहे थे, उसके लिए आबकारी विभाग के सामने कूटरचित (फर्जी) दस्तावेज पेश किए गए थे।
​इन्हीं फर्जी कागजात के दम पर वर्ष 2025-26 में दुकान का आवंटन कराया गया और फिर चालाकी से वर्ष 2026-27 के लिए लाइसेंस का नवीनीकरण (रिन्यूअल) भी करवा लिया गया।

नियमों का उल्लंघन और आबकारी विभाग का एक्शन

​जांच रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि लाइसेंस धारक का यह कृत्य ‘उत्तर प्रदेश आबकारी कम्पोजिट दुकान (लाइसेंस व्यवस्थापन) नियमावली 2025’ के कई नियमों का सीधा उल्लंघन है। इसमें मुख्य रूप से शामिल हैं:
​नियम-8 (ङ)(एक) और नियम-8 (ङ)(दो)
​नियम-18 (1)(घ)
​आवेदन के समय जमा किए जाने वाले शपथ-पत्र (Affidavit) की शर्तें।
​इन नियमों के उल्लंघन को देखते हुए आबकारी विभाग ने नियमावली के नियम-18 (1)(घ) के तहत कार्रवाई करते हुए शराब दुकान के लाइसेंस को तुरंत सस्पेंड कर दिया है।


जब्त हो सकती है सिक्योरिटी मनी


​विभाग ने आरोपी अनुज्ञापी को कड़ी चेतावनी दी है कि यदि 7 दिनों के भीतर उनकी तरफ से कोई संतोषजनक जवाब या स्पष्टीकरण नहीं मिलता है, तो उनका लाइसेंस हमेशा के लिए निरस्त (कैंसल) कर दिया जाएगा। इसके अलावा, दुकान आवंटन के समय जमा की गई प्रतिभूति राशि (सिक्योरिटी मनी) भी सरकारी खाते में जब्त कर ली जाएगी।
​इस बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई के बाद से ही क्षेत्र के शराब व्यवसायियों में हड़कंप मच गया है, वहीं स्थानीय स्तर पर आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर भी तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

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