महराजगंज।उत्तर प्रदेश के महराजगंज जिले के विकास खण्ड सिसवां से विकास कार्यों में बड़े फर्जीवाड़े और वित्तीय अनियमितता का सनसनीखेज मामला सामने आया है। सिसवा विकास खंड की ग्राम पंचायत सेमरी में सरकारी धन के बंदरबांट की पोल खुली है, जहां एक ही काम के लिए दो बार भुगतान करा लिया गया। शिकायत सही पाए जाने पर जिला पंचायत राज अधिकारी (DPRO) श्रेया मिश्रा ने कड़ा रुख अपनाते हुए ग्राम प्रधान और तत्कालीन सचिव के खिलाफ भारी-भरकम रिकवरी (वसूली) का आदेश जारी कर दिया है।

​जांच रिपोर्ट में कुल 4 लाख 54 हजार 220 रुपये का घपला उजागर हुआ है। डीपीआरओ के निर्देशानुसार, अब इस गबन की गई आधी-आधी धनराशि दोनों जिम्मेदारों की जेब से वसूली जाएगी।

इस तरह खुली भ्रष्टाचार की पोल

​यह पूरा मामला सिसवा ब्लॉक के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत सेमरी का है। गांव के ही सतर्क नागरिक ने एएनएम सेंटर के कायाकल्प और सीसी रोड निर्माण कार्य में हो रही धांधली के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए शिकायत दर्ज कराई थी।
​शिकायत को गंभीरता से लेते हुए जब उच्चाधिकारियों ने संबंधित अभिलेखों और भुगतान वाउचरों की गहनता से स्क्रूटनी की, तो जांच टीम के होश उड़ गए। जांच में साफ पाया गया कि चालाकी से वर्ष 2022-23 और फिर वर्ष 2023-24 में एक ही कार्य का दो बार भुगतान कराकर सरकारी खजाने को चूना लगाया गया।

​किन-किन कार्यों में हुआ फर्जीवाड़ा? (आंकड़ों की जुबानी)

​जांच रिपोर्ट के अनुसार, घपलेबाजी को दो मुख्य विकास कार्यों के जरिए अंजाम दिया गया था:

  1. ​एएनएम सेंटर कायाकल्प कार्य: इस कार्य में 2 लाख 80 हजार रुपये की वित्तीय अनियमितता पकड़ी गई।
  2. ​सीसी रोड एवं नाली निर्माण: रमेशर के खेत से सलामत के घर तक कराए गए सीसी रोड और नाली निर्माण कार्य में 1 लाख 74 हजार 220 रुपये का फर्जी भुगतान कराया गया।
    ​कुल घोटाला: 2,80,000 + 1,74,220={4,54,220 रुपये}

जिम्मेदारों पर तगड़ा एक्शन:आधी-आधी वसूली का फरमान

​घोटाले की पुष्टि होने के बाद प्रशासन ने दोनों दोषियों पर शिकंजा कस दिया है।

ग्राम प्रधान अमीन अली पर कार्रवाई: डीपीआरओ ने ग्राम प्रधान अमीन अली को कड़ी फटकार लगाते हुए उनके हिस्से के 2 लाख 27 हजार 110 रुपये की धनराशि को तुरंत ‘ग्राम निधि प्रथम’ खाते में जमा कराने का कड़ा निर्देश जारी किया है।

तत्कालीन सचिव विवेकानंद राय पर शिकंजा: गबन के समय तैनात रहे तत्कालीन ग्राम पंचायत सचिव विवेकानंद राय का स्थानांतरण (Transfer) फिलहाल गोरखपुर जिले में हो चुका है। लेकिन वे इस कार्रवाई से बच नहीं पाएंगे। उनकी रिकवरी सुनिश्चित कराने के लिए महराजगंज डीपीआरओ द्वारा गोरखपुर के जिला पंचायत राज अधिकारी को एक आधिकारिक पत्र भेज दिया गया है, ताकि वहां से उनके वेतन या सेवा स्रोतों से इस राशि को वसूला जा सके।

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