रिपोर्ट-अंशु तिवारी

लखीमपुर-फूलबेहड़। लखीमपुर के विकास खंड फूलबेहड़ की सहकारी समितियों और इफको संघ पूर्ति भण्डार लि. फूलबेहड़ जिसका रजिस्ट्रेशन नं.- 646 का मामला से जुड़ी खाद बिक्री व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। किसानों का आरोप है कि सरकार द्वारा तय रेट 266.50 रुपये वाली खाद खुलेआम 270 से 300 रुपये तक में बेची जा रही है। गांव-गांव में किसानों से अतिरिक्त वसूली का खेल जारी है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी आंखें मूंदे बैठे हैं।

सूत्रों के मुताबिक, कई समितियों में किसानों को खाद देने से पहले “अनिवार्य सामान” खरीदने का दबाव बनाया जाता है। कहीं नैनो यूरिया, कहीं कीटनाशक, तो कहीं अन्य उत्पाद जबरन थमाए जा रहे हैं। विरोध करने वाले किसानों को घंटों लाइन में खड़ा रखा जाता है या खाद खत्म होने का बहाना बना दिया जाता है।

किसानों का कहना है कि सरकार सब्सिडी देकर राहत देना चाहती है, लेकिन समिति और बिचौलियों का गठजोड़ किसानों की जेब काट रहा है। छोटे किसान सबसे ज्यादा परेशान हैं। खेत बोने का समय है, लेकिन खाद के लिए अपमान और लूट दोनों झेलने पड़ रहे हैं।

किसानों के आरोप

-तय कीमत से अधिक वसूली

-खाद के साथ जबरन अन्य सामान की बिक्री
रसीद में गड़बड़ी और कम मात्रा

-शिकायत करने पर धमकी और टालमटोल
कालाबाजारी में समिति कर्मचारियों की मिलीभगत

ग्रामीण इलाकों में यह भी चर्चा है कि रात के समय खाद की बोरियां निजी दुकानों तक पहुंचाई जा रही हैं, जहां वही खाद ऊंचे दामों में बेची जाती है। यदि यह सच है तो यह सीधे-सीधे सरकारी व्यवस्था और किसानों के भरोसे के साथ खिलवाड़ है।

कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय रहते जांच नहीं हुई तो आने वाले दिनों में खाद संकट और गहराएगा।जिला प्रशासन से मांग है कि समितियों का ऑडिट कराया जाए, स्टॉक रजिस्टर जांचे जाएं और दोषियों पर एफआईआर दर्ज कराएं।

सवाल जो व्यवस्था से पूछे जा रहे हैं

-आखिर तय रेट से ज्यादा वसूली कौन करा रहा है?

-खाद की कालाबाजारी पर कार्रवाई क्यों नहीं?

-किसानों की शिकायतों को दबाने वाला कौन?

-क्या समिति और निजी दुकानों के बीच सांठगांठ है?

“अन्नदाता” कहने वाली व्यवस्था में यदि किसान ही लुटेगा, तो सबसे बड़ा भ्रष्टाचार यही कहलाएगा। अब देखना यह है कि प्रशासन कार्रवाई करता है या यह खेल यूं ही चलता रहेगा।

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