
प्रशासनिक दावों और पशु क्रूरता निवारण के तमाम वादों के बीच आज फिर एक बेजुबान जानवर सिस्टम की सुस्ती के कारण जिंदगी की जंग हार गया। स्थानीय क्षेत्र में सुबह से पेट की गंभीर बीमारी और दर्द से तड़प रहे एक बैल की दोपहर बाद मौत हो गई। सजग ग्रामीणों द्वारा समय पर सूचना देने और पुलिस के हस्तक्षेप के बाद भी सही समय पर पुख्ता चिकित्सा सुविधा न मिलने के कारण बैल की जान नहीं बचाई जा सकी।
प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय निवासियों के अनुसार, सुबह से ही बैल के पेट में भारी दिक्कत दिखाई दे रही थी और वह दर्द से बेहाल था। जानवर की हालत बिगड़ती देख जागरूक नागरिकों ने सुबह तुरंत आपातकालीन सेवा 112 पर कॉल करके इसकी सूचना प्रशासन को दी। इसके साथ ही पशुपालन विभाग के सरकारी वेटरनरी डॉक्टर से भी संपर्क साधने की कोशिश की गई, लेकिन हैरान करने वाली बात यह रही कि डॉक्टर का फोन ही नहीं लगा। इसके बाद गौ रक्षक दल से भी संपर्क कर मदद की गुहार लगाई गई।
112 पर सूचना मिलने के बाद मौके पर पहुंची पुलिस टीम ने संवेदनशीलता दिखाते हुए अपने स्तर पर प्रयास शुरू किए। सरकारी डॉक्टरों से संपर्क न हो पाने की स्थिति में पुलिस ने एक सेवानिवृत्त (रिटायर्ड) सरकारी वेटरनरी डॉक्टर से संपर्क साधा। डॉक्टर के परामर्श पर आनन-फानन में कुछ दवाइयां लाकर बैल को दी गईं, जिससे कुछ समय के लिए उसे थोड़ी राहत तो मिली, लेकिन बीमारी की गंभीरता को देखते हुए वह नाकाफी साबित हुई।
दोपहर 3 बजे थम गईं सांसें
समय पर उचित और त्वरित इलाज न मिल पाने के कारण बैल की स्थिति लगातार बिगड़ती चली गई। आखिरकार, दोपहर लगभग 3 बजे तड़पते हुए बेजुबान ने दम तोड़ दिया। बैल की मौत के बाद स्थानीय लोगों में पशु चिकित्सा विभाग के ढुलमुल रवैए को लेकर भारी रोष है। लोगों का कहना है कि अगर समय रहते सरकारी वेटरनरी डॉक्टर मौके पर पहुंच जाते या फोन पर उपलब्ध हो जाते, तो शायद इस बेजुबान की जान बचाई जा सकती थी।
