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सोमवती अमावस्या पर बड़ वृक्ष का विशेष महत्व, पूजा-अर्चना, दान-पुण्य एवं वृक्षारोपण का संदेश,

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रोहित जैन दभेड़ी वाले, जिला सहायक ब्यूरो प्रमुख, मुजफ्फरनगर

बुढ़ाना, मुजफ्फरनगर

15 जून 2026 को पड़ने वाली सोमवती अमावस्या धार्मिक आस्था, श्रद्धा, दान-पुण्य एवं प्रकृति संरक्षण का महापर्व मानी जाती है। हिंदू धर्म में इस दिन का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि जब अमावस्या सोमवार के दिन आती है तो उसका पुण्यफल कई गुना बढ़ जाता है। इस अवसर पर श्रद्धालु पवित्र नदियों में स्नान कर मंदिरों में पूजा-अर्चना करते हैं तथा अपने परिवार, समाज और राष्ट्र की सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बड़ (बरगद) का वृक्ष देववृक्ष माना जाता है। इस वृक्ष में देवी-देवताओं का निवास माना गया है तथा इसे दीर्घायु, स्थिरता, समृद्धि और अखंड सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। सोमवती अमावस्या एवं बड़ अमावस्या के अवसर पर महिलाएं बड़ वृक्ष की विधि-विधान से पूजा कर उसकी परिक्रमा करती हैं और अपने पति की दीर्घायु, परिवार की खुशहाली तथा सुख-समृद्धि की कामना करती हैं।

इस दिन दान-पुण्य, पितरों का स्मरण और धार्मिक अनुष्ठानों का भी विशेष महत्व है। श्रद्धालु अपने पूर्वजों एवं दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए अन्न, वस्त्र, जल, फल तथा अन्य आवश्यक वस्तुओं का दान करते हैं। मान्यता है कि इस दिन किया गया दान पितरों को तृप्त करता है और परिवार पर उनका आशीर्वाद बना रहता है।

मंदिरों में विशेष पूजा, हवन, भजन-कीर्तन एवं धार्मिक आयोजनों का आयोजन किया जाता है। श्रद्धालु भगवान की आराधना कर जीवन में सुख, शांति, समृद्धि एवं आरोग्य की कामना करते हैं। कई स्थानों पर बड़ के पौधों का रोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया जा रहा है।

बरगद का वृक्ष पर्यावरण के लिए अत्यंत लाभकारी माना जाता है। यह विशाल वृक्ष लोगों को शीतल छाया प्रदान करता है, वातावरण को शुद्ध रखने में सहायक होता है तथा पक्षियों एवं अन्य जीव-जंतुओं को आश्रय देता है। धार्मिक महत्व के साथ-साथ इसका पर्यावरणीय महत्व भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।

धर्माचार्यों का कहना है कि मंदिर परिसर, सार्वजनिक स्थलों एवं अन्य उपयुक्त स्थानों पर बड़ का पौधा लगाना आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रकृति की अमूल्य धरोहर छोड़ने के समान है। सोमवती अमावस्या के अवसर पर बड़ वृक्ष का पूजन एवं वृक्षारोपण दोनों ही पुण्यदायक और कल्याणकारी माने गए हैं।

इस पावन अवसर पर श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक वृक्ष लगाने, जल संरक्षण करने, जीव-जंतुओं की सेवा करने तथा मानवता के कल्याण के लिए कार्य करने का आह्वान किया गया। धर्म, पर्यावरण और जनकल्याण का यह संदेश समाज को सकारात्मक दिशा देने का कार्य कर रहा है।

“एक बड़ का पौधा लगाएं, धर्म और प्रकृति दोनों की सेवा का पुण्य प्राप्त करें।”

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