

मथुरा। रो-रोकर फरियाद करती दो साल ढाई साल की नन्ही सी इशिका की मासूम आँखें अब भी अपनी माँ की गोद में सहारा ढूंढ रही हैं। लेकिन अस्पताल की लापरवाही ने उसकी नन्ही सी जिंदगी को मौत के मुहाने पर ला खड़ा किया है। मथुरा के डैंपियर नगर निवासी राजीव अग्रवाल अपनी बेटी का इलाज कराने के लिए मथुरा के अमर हेल्थ केयर हॉस्पिटल ले गए, लेकिन वहाँ हुई घोर लापरवाही ने पूरे परिवार की दुनिया उजाड़ दी।
राजीव अग्रवाल ने बताया, “मेरी बेटी इशिका को खून की कमी थी। उसका ब्लड ग्रुप A Positive था। डॉक्टरों ने A Negative ब्लड चढ़ा दिया। बस फिर क्या था… बच्ची की हालत बिगड़ने लगी। उसकी माँ रो-रोकर चीख-चीखकर गुहार लगाती रही कि कुछ तो गड़बड़ है, लेकिन अस्पताल वाले बस टालते रहे। कहते रहे – सब ठीक हो जाएगा।”
नन्ही इशिका की माँ की आँखों में अब आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे। वह बार-बार कहती हैं, “मेरी बच्ची तो बस खेलना चाहती थी… हँसना चाहती थी। मैंने उसे अस्पताल वालों के भरोसे छोड़ा था। अब मेरी गोद सूनी हो गई है। मेरी बच्ची कहाँ है? उसे वापस ला दो परिजनों का आरोप है कि अस्पताल की लापरवाही साफ दिख रही थी, लेकिन कोई सुनने को तैयार नहीं था। जब हालत बिगड़ गई तो परिवार ने हंगामा किया। पुलिस मौके पर पहुंची और बच्ची को तुरंत हरियाणा के फरीदाबाद स्थित एक निजी अस्पताल में रेफर कर दिया गया। वहाँ डॉक्टरों ने बताया कि स्थिति बेहद नाजुक है। इशिका जिंदगी और मौत के बीच झूल रही है।
डॉक्टरों का कहना है कि गलत ब्लड ग्रुप चढ़ने से बच्चे में गंभीर रिएक्शन हुआ है। अब उसके छोटे-छोटे अंगों पर असर पड़ रहा है। परिवार वाले रोते हुए कह रहे हैं अगर समय पर सही इलाज मिलता तो आज हमारी इशिका हमारे साथ खेल रही होती।”
अमर हेल्थ केयर हॉस्पिटल की ओर से अभी कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। परिजन लगातार पुलिस से गुहार लगा रहे हैं कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो। वे चाहते हैं कि इस लापरवाही की जाँच हो और किसी और मासूम की जिंदगी इस तरह नष्ट न हो।
इशिका की कहानी सिर्फ एक परिवार की नहीं
यह कहानी उन हजारों मासूम बच्चों की है, जिन्हें हम अस्पतालों में भगवान मानकर छोड़ देते हैं। इशिका आज भी लड़ रही है। उसकी छोटी-छोटी साँसें परिवार की उम्मीदों के साथ लड़ रही हैं। क्या प्रशासन और पुलिस इस मामले में सख्ती दिखाएगी? क्या मासूम इशिका अपनी माँ की गोद में वापस लौट पाएगी परिवार अब सिर्फ इंसाफ की गुहार लगा रहा है।
इशिका जिंदगी की जंग लड़ रही है।
आपकी दुआएं उस नन्ही सी जान के काम आ सकती हैं।
बाइट मासूम की माँ
बाइट मासूम के पिता
