नहीं चले फव्वारे, बैरीकेटिंग भी नदारद मायूस लौटे श्रद्धालु, मानसी गंगा पर आचमन को भी तरसे लोग
गोवर्धन (मथुरा)। आस्था के पावन पर्व गंगा दशहरा पर गोवर्धन में नगर पंचायत की घोर लापरवाही सामने आई है। इस बड़े त्योहार पर दूर-दराज से आए श्रद्धालु मानसी गंगा के घाटों पर स्नान तक नहीं कर पाये । हाल ही में हुयी कई घटनाओं के बाद जहां सुरक्षा के मद्देनजर पुलिस ने श्रद्धालुओं को घाटों पर जाने से रोक दिया, वहीं दूसरी तरफ नगर पंचायत द्वारा फव्वारे न चलाए जाने के कारण श्रद्धालु गंगा दशहरा पर स्नान तो दूर मानसी गंगा का आचमन तक नहीं ले सके। नगर पंचायत की इस बेरुखी से कस्बे की जनताऔर परिक्रमार्थियों में भारी रोष व्याप्त है। गंगा दशहरा के महत्व को देखते हुए गोवर्धन परिक्रमा मार्ग के अलावा आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु मानसी गंगा में स्नान और आचमन के लिए पहुंचे थे। डुबकी लगाने की आस लेकर आए भक्तों को तब मायूसी हाथ लगी जब ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों ने सुरक्षा का हवाला देते हुए उन्हें घाटों से वापस लौटा दिया । पुलिसकर्मियों का कहना था कि अधिक मास के दौरान हुई दुखद घटनाओं को देखते हुए इस बार सुरक्षा की दृष्टि से उन्हें यहां लगाया गया है ताकि कोई अप्रिय घटना न हो ।पुलिस की पाबंदी के बीच श्रद्धालुओं को उम्मीद थी कि वे घाटों पर लगे फव्वारों के जरिए स्नान और आचमन कर सकेंगे, लेकिन नगर पंचायत गोवर्धन ने श्रद्धालुओं को यह सुविधा मुहैया नहीं कराई। स्थानीय लोगों ने बताया कि अधिक मास के दौरान फव्वारे चलाने के लिए जो जनरेटर और मशीनें मंगवाई गई थीं, वे सब वहीं मौजूद रखी थीं। इसके बावजूद नगर पंचायत प्रशासन ने उन्हें शुरू करवाने की जहमतनहीं उठाई। खुद ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों ने भी माना कि सुरक्षा के लिहाज से नगर पंचायत को फव्वारे अवश्य चलाने चाहिए थे ताकि भक्तों की आस्था को ठेस न पहुंचती । स्थानीय लोगों और बुद्धिजीवियों का कहना है कि अगर नगर पंचायत प्रशासन ने थोड़ी सी भी संवेदनशीलता दिखाई होती, तो श्रद्धालुओं को निराश नहीं होना पड़ता । यदि नगर पंचायत घाटों पर फव्वारे चालू करवा देता या फिर सुरक्षा के लिहाज से घाटों के किनारे बैरिकेडिंग लगवा देता, तो स्थानीय लोगों और बाहर से आए श्रद्धालुओं को बेहद सुरक्षित तरीके से स्नान और आचमन कराया जा सकता था लेकिन इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाया गया । इतने बड़े धार्मिक पर्व पर मूलभूत सुविधाएं न मिलने से आक्रोशित कस्बे की जनता और बाहरी श्रद्धालु पूरे दिन नगर पंचायत के ईओ और चेयरमैन को कोसते नजर आए। श्रद्धालुओं का कहना था कि गंगा-यमुना स्नान के इस पावन दिन पर उन्हें गोवर्धन आकर भी बिना आचमन के खाली हाथ लौटना पड़ रहा है जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।



