नई दिल्ली। राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ के सम्मान और गरिमा को लेकर केंद्र सरकार ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026 को मंजूरी दे दी है। राष्ट्रपति की स्वीकृति के बाद यह विधेयक अब कानून बन गया है।नए कानून के तहत ‘वंदे मातरम’ के गायन में जानबूझकर बाधा डालना या उसे रोकने का प्रयास करना दंडनीय अपराध होगा। ऐसे मामले में तीन वर्ष तक की कैद, जुर्माना या दोनों का प्रावधान किया गया है।

सरकार के अनुसार, यह विधेयक लोकसभा में 30 जुलाई 2026 को पारित हुआ था, जबकि राज्यसभा ने इसे इससे एक दिन पहले मंजूरी दी थी।इस बीच गृह मंत्रालय ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले की प्राचीर से पहली बार ‘वंदे मातरम’ के गायन की घोषणा की है। इससे राष्ट्रीय गीत को लेकर होने वाले समारोहों में इसकी भूमिका और महत्वपूर्ण हो गई है।

‘वंदे मातरम’ का ऐतिहासिक महत्व

‘वंदे मातरम’ की रचना प्रसिद्ध साहित्यकार बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने 1870 के दशक में की थी। बाद में इसे उनके प्रसिद्ध उपन्यास ‘आनंदमठ’ में वर्ष 1882 में प्रकाशित किया गया।वर्ष 1896 में कोलकाता में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अधिवेशन में ‘वंदे मातरम’ का सार्वजनिक रूप से गायन हुआ था। इस अवसर पर रवींद्रनाथ टैगोर ने इसे स्वर दिया था।नए कानूनी प्रावधान के बाद राष्ट्रीय गीत के सार्वजनिक गायन के दौरान उसकी गरिमा बनाए रखने की जिम्मेदारी भी पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।

Loading

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *