देवा चिनहट रोड का चौड़ीकरण, काटे जा रहे हजारों दरखत, पर्यावरण का भारी नुकसान

संवाददाता तेज बहादुर शर्मा।

देवा, बाराबंकी। देवा-चिनहट मार्ग के फोरलेन चौड़ीकरण के चलते सड़क किनारे लगे दशकों पुराने वृक्षों को काटकर हटाया जा रहा है। विकास से आवागमन तो सुगम होगा, लेकिन साथ ही पर्यावरण को होने वाले नुकसान को लेकर चिंता भी बढ़ रही है। देवा से सीधे राजधानी जाने वाली सड़क पर लगे पेड़ो की वजह से रास्ता इतना सुगम लगता था कि भीषण गर्मी में भी सूरज की किरणें आवागमन में भी बाधक नहीं बन पाती थी।इस सड़क को लोग हरियाली वाली सड़क के नाम से जानते थे।लेकिन जल्द ही यह सड़क एकदम सुनसान दिखाई देने लगेगी।जहां सड़क के चौड़ी से लोगों में खुशी है वहीं दशकों से मिल रही हरियाली के जाने से लोगों में अफसोस भी है।
यह कोई पहला मामला नहीं स्थानीय समाजसेवी धर्म कुमार यादव ने कहा, “सड़कों के विकास के नाम पर पहले भी प्रदेश में लाखों पेड़ काटे जा चुके हैं। उनमें सैकड़ों वर्ष पुराने आम, नीम, महुआ, गूलर, पीपल, बरगद जैसी जीवनदायी प्रजातियां भी शामिल थीं। एक पेड़ को बड़ा होने में 20-25 साल लगते हैं, लेकिन कटने में 20 मिनट।
उन्होंने सवाल उठाया कि सरकार ‘एक पेड़ माँ के नाम’ और ‘एक पेड़ दस पुत्र समान’ जैसे अभियान चला रही है। लेकिन क्या सड़क निर्माण से पहले पर्यावरण संरक्षण की कोई ठोस योजना बनाई गई? क्या भविष्य में भी विकास के नाम पर ऐसे ही हरियाली का नुकसान होता रहेगा?”
धर्म कुमार यादव ने प्रशासन से आग्रह किया है कि हमारा तरफ से कोई विरोध नहीं है बल्कि संतुलन की नीति अपनाई जाए।किसी भी सड़क के चौड़ीकरण से पहले सड़क की सीमा चिन्हित कर किनारे बड़े पैमाने पर पौधरोपण किया जाए। पौधे बड़े होने पर ही सड़क निर्माण शुरू हो। दूसरी तरह श्री यादव ने यह भी कहा कि गांवों को जोड़ने वाली सभी सड़कों और माइनरों के दोनों तरफ फलदार और छायादार वृक्ष लगाए जाएं। लगाए गए प्रत्येक पौधे की जिम्मेदारी ग्राम पंचायत, स्कूल, स्वयंसेवी संस्था या किसान को दी जाए। ताकि रोपण के साथ संरक्षण भी हो। जिन किसानों के खेतों के किनारे पौधे रोपित किए जाए वहां पर किसानों के मन मुताबिक प्रजातियों का चयन किया जाए और उन पेड़ो का मालिकाना हक शर्तों के आधार पर संबंधित किसानों को दिया जाए।जिससे किसान भी संतुष्ट रहेंगे,पेड़ भी बचेंगेऔर हमारा पर्यावरण भी बचेगा।
उन्होंने स्पष्ट शब्दों में यह भी कहा कि हम विकास के खिलाफ नहीं हैं। परंतु हम चाहते हैं कि विकास और पर्यावरण साथ-साथ चलें। यदि आज पौधे लगा दिए जाएं तो 2 साल बाद जब सड़क बनेगी तो वो ‘ग्रीन रोड’ कहलाएगी।”
ग्रामीणों का कहना है कि ये पेड़ गर्मी में छाया, शुद्ध हवा और पक्षियों का घर थे। कई बुजुर्गों ने बताया कि हम लोग चाहते हैं कि जिस क्षेत्र में पेड़ो का कटान किया जाए उस क्षेत्र में कटान के बदले 20 गुना पौधे लगाए जाएं और उनकी देखभाल तय हो।जिससे हमारे पर्यावरण संरक्षण में मदद मिल सकती है।

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