रिपोर्ट-जितेंद्र कुमार
मथुरा। मांट ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय पानीगांव द्वितीय में पिछले करीब 15 वर्षों से जलभराव की समस्या बनी हुई है। बरसात के दिनों में हालात इतने खराब हो जाते हैं कि विद्यालय परिसर और मुख्य प्रवेश मार्ग पर डेढ़ से दो फीट तक पानी भर जाता है। इससे छात्र-छात्राओं की पढ़ाई प्रभावित होने के साथ-साथ उनके स्वास्थ्य पर भी खतरा मंडराने लगता है।
लगातार हो रही बारिश के बाद विद्यालय परिसर पूरी तरह जलमग्न हो गया है। बच्चों और शिक्षकों को गंदे पानी से होकर विद्यालय पहुंचना पड़ रहा है। कई अभिभावक संक्रमण और दुर्घटना की आशंका के चलते अपने बच्चों को विद्यालय भेजने से बच रहे हैं, जिससे विद्यार्थियों की उपस्थिति लगातार घट रही है।

विद्यालय के प्रधानाध्यापक सतीश चंद्र ने बताया कि इस समस्या को लेकर कई बार संबंधित विभागों, ग्राम पंचायत और प्रशासनिक अधिकारियों को लिखित एवं मौखिक रूप से अवगत कराया जा चुका है, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं किया गया। उनका कहना है कि विद्यालय के बाहर बने खड़ंजे का स्तर नीचे होने और पास में स्थित तालाब के कारण बारिश का पानी विद्यालय परिसर में भर जाता है, जिससे पूरे परिसर में जलभराव हो जाता है।
विद्यालय की एक अध्यापिका ने बताया कि करीब 15 वर्षों से यही स्थिति बनी हुई है। हर बरसात में बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है, लेकिन समस्या के समाधान के लिए आज तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। गंदे पानी के कारण विद्यालय परिसर में मच्छरों और कीटों का प्रकोप बढ़ जाता है, जिससे डेंगू, मलेरिया और अन्य संक्रामक बीमारियों का खतरा बना रहता है।

विद्यालय प्रबंधन ने जिलाधिकारी और जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी से तत्काल हस्तक्षेप कर विद्यालय परिसर से जल निकासी कराने, मुख्य द्वार एवं परिसर का स्तर ऊंचा कराने तथा स्थायी समाधान सुनिश्चित करने की मांग की है। उनका कहना है कि बच्चों को सुरक्षित और स्वच्छ वातावरण में शिक्षा उपलब्ध कराना प्रशासन की जिम्मेदारी है। यदि शीघ्र समाधान नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में बच्चों की पढ़ाई और स्वास्थ्य दोनों पर गंभीर असर पड़ सकता है।
