महाराजगंज। उत्तर प्रदेश के जनपद महाराजगंज के कोठीभार थाना क्षेत्र से पुलिसिया कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाने वाला एक मामला सामने आया है। ग्राम-विशुनपुरा (पोस्ट-भेडिया) की रहने वाली एक महिला सविता देवी पत्नी योगेन्द्र गुप्ता ने पुलिस अधीक्षक (SP) को प्रार्थना पत्र देकर स्थानीय पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़िता का कहना है कि जमीनी विवाद में दबंगों द्वारा उनके परिवार पर लोहे की रॉड से जानलेवा हमला किया गया, लेकिन कोठीभार पुलिस ने पीड़ितों की सुनने के बजाय उल्टा उन्हीं के खिलाफ एकतरफा फर्जी मुकदमा दर्ज कर दिया।

लोहे की रॉड से हमला, युवक अस्पताल में भर्ती

​प्रार्थना पत्र के अनुसार, मामला 11 जुलाई 2026 की शाम करीब 04:00 बजे का है। जमीनी विवाद को लेकर गांव के ही सुरेश (पुत्र स्व० रामनयन गुप्ता), पुनीता (पत्नी सुरेश), आशीष (पुत्र सुरेश), रामधनी (पुत्र हरिवंश) व ऋषिकेश (पुत्र रामधनी) ने लामबंद होकर प्रार्थिनी पर हमला बोल दिया।

​जब प्रार्थिनी का पुत्र नीतीश बीच-बचाव करने आया, तो आरोपी सुरेश ने जान से मारने की नीयत से उसके सिर पर लोहे की रॉड से जोरदार वार कर दिया। इस हमले में नीतीश का सिर फट गया और अत्यधिक खून बहने के कारण उसकी हालत अत्यंत चिंताजनक हो गई। घायल युवक का इलाज इस समय जिला अस्पताल महाराजगंज में चल रहा है।

कोठीभार पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल

​पीड़िता का आरोप है कि इस खूनी संघर्ष के बाद जब वे न्याय के लिए स्थानीय थाना कोठीभार पहुंचीं, तो पुलिस ने उनकी तहरीर पर कार्रवाई करने के बजाय उल्टा पीड़ित पक्ष को ही शांतिभंग में पाबंद कर दिया। आरोप है कि पुलिस ने विपक्षियों से मिलीभगत कर घायल नीतीश और बीच-बचाव करने वाले एक ग्रामीण रामबचन पर ही धारा 115(2), 352, 351(3) B.N.S. के तहत मुकदमा (अ०सं०-206/2026) दर्ज कर दिया।

पीड़िता का बयान: “हमलावरों ने हमारे बेटे का सिर फाड़ दिया, वह अस्पताल में जिंदगी और मौत से लड़ रहा है। दबंग खुलेआम घूम रहे हैं और हमें व हमारे परिवार को जान से मारने की धमकी दे रहे हैं, जिससे पूरा परिवार खौफ में है। पुलिस ने हमारी मदद करने के बजाय हम पर ही झूठा मुकदमा ठोक दिया।”

SP से लगाई न्याय की गुहार

​स्थानीय पुलिस के इस रवैये से परेशान होकर पीड़िता सविता देवी ने 15 जुलाई 2026 को पुलिस अधीक्षक महाराजगंज को शिकायती पत्र सौंपकर न्याय की मांग की है। प्रार्थना पत्र के माध्यम से मांग की गई है कि:

  • ​घायल नीतीश का अविलंब उचित डॉक्टरी परीक्षण (मेडिकल) कराया जाए।
  • ​पीड़ित पक्ष पर दर्ज किए गए फर्जी मुकदमे की किसी निष्पक्ष अधिकारी से जांच कराई जाए।
  • ​जांच रिपोर्ट के आधार पर इस झूठे मुकदमे को निरस्त कर दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।

​अब देखना यह है कि इस मामले में पुलिस अधीक्षक शक्ति मोहन के हस्तक्षेप के बाद पीड़ित परिवार को न्याय मिलता है या स्थानीय पुलिस की यह एकतरफा कार्रवाई कायम रहती है।

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