महाराजगंज। “आखिर व्यापारी समाज कब तक दुधारू गाय बना रहेगा?” यह तीखा और बड़ा सवाल उत्तर प्रदेश के महाराजगंज जनपद से अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल के जिला प्रभारी और प्रदेश मंत्री अजय राज कसौधन ने उठाया है। उन्होंने प्रदेश में व्यापारियों की अनदेखी, उनके दोहन और राजनीतिक प्रतिनिधित्व की कमी पर गहरी चिंता जताते हुए सरकार और राजनीतिक दलों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

​7 लाख शिक्षकों को MLC, तो 22 लाख व्यापारियों की अनदेखी क्यों?

​व्यापारी नेता अजय राज कसौधन ने एक बेहद मजबूत तुलनात्मक आंकड़ा सामने रखते हुए व्यवस्था पर सवाल दागे हैं। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में लगभग 7 लाख शिक्षकों की समस्याओं के समाधान और उनके प्रतिनिधित्व के लिए विधान परिषद (MLC) में विशेष स्थान दिया जाता है। शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से उनके प्रतिनिधि चुनकर सदन में जाते हैं।

​लेकिन दूसरी तरफ, उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले 22 लाख से अधिक जीएसटी (GST) पंजीकृत व्यापारी हैं। इतनी बड़ी संख्या और अर्थव्यवस्था में सबसे बड़ा योगदान होने के बावजूद, विधान परिषद में व्यापारियों का सीधे तौर पर प्रतिनिधित्व करने के लिए कोई पुख्ता व्यवस्था या व्यापारी MLC का प्रावधान नहीं है।

​सबसे ज्यादा राजस्व और रोजगार, फिर भी सिर्फ दोहन और उत्पीड़न

​लेख में इस बात पर विशेष जोर दिया गया है कि व्यापारी समाज देश और प्रदेश की सरकार को सबसे ज्यादा राजस्व (टैक्स) देता है और युवाओं को सबसे ज्यादा रोजगार भी मुहैया कराता है। इसके बावजूद जमीनी हकीकत यह है कि व्यापारियों को ही सबसे ज्यादा उत्पीड़न और सरकारी तंत्र के दोहन का सामना करना पड़ता है।

“जो समाज सरकार का खजाना भरता है और लाखों परिवारों को आजीविका देता है, आज वही अपनी आवाज उठाने के लिए सदन में एक प्रतिनिधि को तरस रहा है।”अजय राज कसौधन

​राजनीतिक गलियारों में हलचल

​अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल के इस कड़े रुख के बाद अब यह बहस तेज हो गई है कि क्या वाकई राजनीतिक दलों ने व्यापारियों को सिर्फ एक ‘वोट बैंक’ और ‘चंदे का जरिया’ मान लिया है? अजय राज कसौधन के इस बयान ने महाराजगंज सहित पूरे प्रदेश के व्यापारी समाज को लामबंद करना शुरू कर दिया है। व्यापारियों का साफ कहना है कि यदि उनकी समस्याओं का समाधान करना है और उनके उत्पीड़न को रोकना है, तो सदन में व्यापारियों का प्रतिनिधित्व होना अनिवार्य है।

​अब देखना यह होगा कि आने वाले समय में सरकार और प्रमुख राजनीतिक दल 22 लाख से अधिक व्यापारियों की इस हुंकार और उनके जायज हक (MLC प्रतिनिधित्व) पर क्या रुख अपनाते हैं।

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