धर्मेन्द्र कसौधन/ब्यूरो
लखनऊ: प्रदेश के विश्वविद्यालय और डिग्री कॉलेजों में पढ़ने वाली छात्राओं के लिए एक बड़ी और राहत भरी खबर है। राज्य सरकार अब मेधावी छात्राओं के साथ-साथ आर्थिक रूप से कमजोर और जरूरतमंद छात्राओं को भी स्कूटी का लाभ देने की तैयारी में है। इसके लिए उच्च शिक्षा विभाग की ओर से पहले तैयार किए गए प्रस्ताव में बड़े बदलाव (संशोधन) किए जा रहे हैं।
राज्यपाल की नाराजगी के बाद नियमों में बदलाव
दरअसल, उच्च शिक्षा विभाग ने पहले जो प्रस्ताव तैयार किया था, उसमें स्कूटी पाने के लिए 80 से 90 प्रतिशत अंक हासिल करने की शर्त रखी गई थी। बीते दिनों अलीगढ़ में आयोजित एक दीक्षांत समारोह के दौरान राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने इस प्रस्ताव पर कड़ी नाराजगी जताई थी। राज्यपाल का स्पष्ट कहना था कि नियम इस तरह बनाए जाने चाहिए जिससे गांवों और कस्बों की उन जरूरतमंद छात्राओं को स्कूटी मिल सके, जो वास्तव में इसके योग्य हैं।
अंकों का प्रतिशत घटेगा, आय सीमा भी होगी कम
राज्यपाल के निर्देशों के बाद अब उच्च शिक्षा विभाग नियमों को नए सिरे से तय कर रहा है। नए संशोधनों के तहत अंकों की अनिवार्यता को 80 प्रतिशत से घटाकर 75 प्रतिशत तक किया जा सकता है। इसके साथ ही, योजना का लाभ केवल अमीर या संपन्न परिवारों तक सीमित न रहे, इसलिए परिवार की वार्षिक आय (annual income) की सीमा को भी कम किया जाएगा।
इस कदम से प्रदेश के ग्रामीण और पिछड़े इलाकों की उन होनहार बेटियों को सीधा फायदा होगा, जो संसाधनों की कमी के बावजूद पढ़ाई में अच्छा प्रदर्शन कर रही हैं। विभाग जल्द ही इस संशोधित प्रस्ताव को अंतिम रूप देकर मंजूरी के लिए भेजेगा।
