संवाददाता-ओम प्रकाश साहू। लखनऊ।

मोहनलालगंज। मोहनलालगंज तहसील की रजिस्ट्री प्रक्रिया में किए गए बदलाव से अधिवक्ता समुदाय में आक्रोश फैल गया है। सरकार ने आदेश दिया है कि अब मोहनलालगंज तहसील की रजिस्ट्री सदर तहसील और मोहनलालगंज तहसील दोनों जगहों पर होगी। साथ ही जिला निबंधक की शक्तियां अब उप-निबंधक मोहनलालगंज को भी दी गई हैं।

इस फैसले के विरोध में?

मोहनलालगंज बार एसोसिएशन ने बुधवार को सम्पूर्ण कार्य का बहिष्कार कर दिया। बहिष्कार के चलते तहसील में रजिस्ट्री, बैनामा और अन्य दस्तावेजों का काम पूरी तरह ठप रहा।

क्या है नया आदेश?

नए आदेश के अनुसार अब मोहनलालगंज क्षेत्र की जमीनों की रजिस्ट्री के लिए जांच दोनों तहसीलों – सदर और मोहनलालगंज – में होगी। जांच पूरी होने के बाद ही रजिस्ट्री की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। सरकार का तर्क है कि इससे फर्जी रजिस्ट्रियों पर रोक लगेगी और पारदर्शिता आएगी।

वकीलों का विरोध क्यों?

बार एसोसिएशन का कहना है कि इस फैसले से आम जनता और अधिवक्ताओं को भारी दिक्कत होगी।

  1. आवागमन की समस्या: एक ही रजिस्ट्री के लिए लोगों को सदर और मोहनलालगंज दोनों जगह चक्कर लगाने पड़ेंगे।
  2. समय की बर्बादी: जांच के नाम पर प्रक्रिया लंबी हो जाएगी।
  3. आर्थिक नुकसान: बार-बार आने-जाने से गरीब और किसान वर्ग पर अतिरिक्त खर्च का बोझ पड़ेगा।

बार के पदाधिकारियों ने कहा कि बिना अधिवक्ताओं और स्थानीय लोगों से राय लिए यह फैसला थोपा गया है। जब तक आदेश वापस नहीं लिया जाता, बहिष्कार जारी रहेगा।

सरकार का पक्ष

प्रशासन का कहना है कि मोहनलालगंज में पिछले कुछ समय से फर्जी रजिस्ट्री और धोखाधड़ी के मामले बढ़े थे। इसी को रोकने के लिए डबल जांच सिस्टम लागू किया गया है। जिला निबंधक की शक्तियां उप-निबंधक को देने से काम में तेजी आएगी।

फिलहाल तहसील परिसर में सन्नाटा है और सैकड़ों फरियादी मायूस होकर वापस लौट रहे हैं।

अब देखना होगा कि सरकार और बार एसोसिएशन के बीच बातचीत से कोई हल निकलता है या बहिष्कार और लंबा चलता है।

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