मुजफ्फरनगर:खाकी पर आस्था का चोला या दबंगई?बुढ़ाना में ‘बोल बम’ की ड्रेस पहन सिपाहियों ने मचाया उत्पाद, पत्रकार से भी अभद्रता

मुजफ्फरनगर। जब पुलिस अपनी खाकी वर्दी में सड़कों पर उतरती है, तो अपराधियों के हौसले पस्त होते हैं और आम जनता खुद को सुरक्षित महसूस करती है। लेकिन जब कानून के रखवाले ही आस्था के आवरण का सहारा लेकर कानून की धज्जियां उड़ाने लगें, तो सवाल सिर्फ सुरक्षा पर ही नहीं, बल्कि जन-आस्था पर भी खड़े होते हैं।

ऐसा ही एक बेहद शर्मनाक और संगीन मामला जनपद मुजफ्फरनगर के बुढ़ाना क्षेत्र से सामने आया है, जहाँ कांवड़ियों के भेष में घूम रहे पुलिसकर्मियों की गुंडागर्दी और मनमानी का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है।

आस्था के आड़ में ‘खाकी’ की दबंगई सावन के इस पवित्र महीने में जहाँ पूरा माहौल शिवभक्ति में लीन है, वहीं बुढ़ाना पुलिस के कुछ सिपाही ‘बोल बम’ (कांवड़ियों) का परिधान पहनकर सड़कों पर दबंगई दिखाते नजर आ रहे हैं। वायरल वीडियो में स्पष्ट तौर पर देखा जा सकता है कि कांवड़ियों की पोशाक में कुछ लोग खुद को पुलिसकर्मी बताकर एक युवक के साथ जमकर धक्का-मुक्की और अभद्रता कर रहे हैं। इसके बाद वे उस युवक को जबरन पकड़कर ले गए।

आस्था की पोशाक में पुलिसकर्मियों के इस गैर-जिम्मेदाराना और हिंसक रवैये से स्थानीय लोगों में दहशत का माहौल है। आम नागरिकों का कहना है कि पुलिस के इस रूप से शिवभक्तों की छवि भी धूमिल हो रही है और लोगों के मन में पवित्र कांवड़ ड्रेस को लेकर डर बैठ गया है।

सवाल पूछने पर पत्रकार से भिड़े, रिकॉर्डिंग पर दी धमकी पुलिसिया रवैये का पर्दाफाश तब और गहरा गया जब ‘एमडी न्यूज’ के पत्रकार ने मौके पर पहुँचकर स्थिति का जायजा लिया। कांवड़ियों के लिबास में बदसलूकी कर रहे इन कथित सिपाहियों से जब पत्रकार ने उनकी पहचान और इस तरह के व्यवहार का कारण पूछा, तो वे भड़क गए।

खुद को पुलिसकर्मी बताने वाले इन जवानों ने अपनी कार्यशैली पर जवाब देने के बजाय पत्रकार के साथ भी तीखी बहस और अभद्रता शुरू कर दी। हालांकि, पत्रकार ने मुस्तैदी दिखाते हुए इस पूरी घटना और सिपाहियों की अभद्रता का वीडियो अपने कैमरे में कैद कर लिया।

बड़े सवाल जो खाकी को कटघरे में खड़ा करते हैं:

  • बिना वर्दी के कार्रवाई क्यों? क्या कानून पुलिस को अनुमति देता है कि वे धार्मिक पोशाक की आड़ लेकर आम जनता पर रोब झाड़ें?
  • आस्था के साथ खिलवाड़: क्या पवित्र ‘बोल बम’ के पहनावे को पुलिसिया मनमानी और गुंडागर्दी का जरिया बनाना धार्मिक आस्था का अपमान नहीं है?
  • चौथे स्तंभ पर हमला: सवाल पूछने पर पत्रकार के साथ बदसलूकी करना क्या अपनी नाकामी और मनमानी को छिपाने की कोशिश है?

स्थानीय जनता और बुद्धिजीवियों में इस घटना को लेकर भारी आक्रोश है। लोगों की मांग है कि आस्था के नाम पर खाकी को दागदार करने वाले और पत्रकार से अभद्रता करने वाले इन सिपाहियों पर उच्चाधिकारी तुरंत संज्ञान लें और सख्त से सख्त कानूनी व प्रशासनिक कार्रवाई करें, ताकि खाकी का इकबाल और आस्था की गरिमा दोनों कायम रह सके।

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