पत्रकारों से वार्ता के बाद एसडीएम बृजेंद्र उपाध्याय ने फोन पर दिए स्पष्ट निर्देश,

कहा पार्क में रखी गयी चारों गुमटियां तत्काल हटाये
अब कोई निर्माण या कब्जा बर्दाश्त नहीं

बाराबंकी। तहसील रामसनेहीघाट के सामने स्थित प्रथम तहसीलदार स्वर्गीय हरिशंकर सिंह की स्मृति वाटिका पार्क में लगातार बढ़ती गुमटियों और अतिक्रमण के मामले में शुक्रवार को प्रशासन ने आखिरकार सख्त रुख अपनाया। पूर्व में तहसीलदार स्तर से गुमटियां हटाने के निर्देश दिए जाने के बावजूद कार्रवाई न होने को लेकर क्षेत्रीय पत्रकारों ने लगातार सवाल उठाए थे। इसी क्रम में आज पत्रकारों ने उपजिलाधिकारी रामसनेहीघाट बृजेंद्र उपाध्याय से मुलाकात कर पूरे मामले से अवगत कराया।
पत्रकारों की बात सुनने के बाद एसडीएम बृजेंद्र उपाध्याय ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल फोन पर संबंधित जिम्मेदार को स्पष्ट निर्देश दिए कि फोरन तहसील परिसर के पार्क में रखी गई चार गुमटियों को तत्काल हटाया जाए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि निर्देशों का पालन नहीं हुआ तो प्रशासन को मजबूर होकर कार्रवाई करनी पड़ेगी।

एसडीएम के फैसले से जनता में जगी उम्मीद

पिछले कई दिनों से स्मृति वाटिका में एक-एक कर चार गुमटियां रखे जाने से पार्क का स्वरूप प्रभावित हो रहा था। पूर्व में तहसीलदार द्वारा गुमटियां हटाने के निर्देश दिए जाने के बाद भी मौके पर कार्रवाई न होने से प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठ रहे थे। इसी मुद्दे को लेकर पत्रकारों ने एसडीएम से मुलाकात कर जनता की समस्या उनके सामने रखी।
अब एसडीएम द्वारा तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए जाने के बाद स्थानीय जनता की निगाहें प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिक गई हैं। लोगों का कहना है कि यदि आदेश के मुताबिक चारो गुमटियां हटती हैं तो स्मृति वाटिका की पुरानी सुंदरता वापस लौट सकेगी।

गुमटियों की मरम्मत और खंभे लगाने पर भी रोक

मामला केवल गुमटियां हटाने तक सीमित नहीं है। जानकारी के मुताबिक गुमटियों को डेंट-पेंट कर व्यवस्थित करने तथा सड़क की ओर खंभे गाड़कर उन्हें स्थापित करने की तैयारी भी की जा रही थी। इस पर भी एसडीएम बृजेंद्र उपाध्याय ने स्पष्ट रुख अपनाते हुए तहसील के पार्क में किसी भी तरह का नया कार्य न करने के निर्देश दिए हैं।
उन्होंने कहा कि यदि संबंधित लोग अपनी योजनाओं अथवा व्यवसायिक गतिविधियों का संचालन करना चाहते हैं तो गुमटियों को किसी अन्य उपयुक्त स्थान पर ले जाकर संचालित करें, लेकिन तहसील पार्क स्मृति वाटिका में किसी प्रकार का कब्जा या निर्माण नहीं किया जाएगा।

दिव्यांशु पटेल के कार्यकाल में हुआ था सौंदर्यीकरण

स्थानीय लोगों के अनुसार तहसील के सामने स्थित इस सार्वजनिक स्थल का सौंदर्यीकरण तत्कालीन आईएएस ज्वांइट मजिस्ट्रेट दिव्यांशु पटेल के कार्यकाल में कराया गया था। बाद में यह स्थान स्वर्गीय तहसीलदार हरिशंकर सिंह की स्मृति से भी जुड़ा और यहां उनकी प्रतिमा स्थापित है। ऐसे में पार्क में गुमटियां रखे जाने से इसके मूल स्वरूप और सौंदर्य पर सवाल उठने लगे थे।

अब सवाल—आदेश के बाद कब हटेंगी गुमटियां?

पत्रकारों की लगातार पहल और जनता की शिकायतों के बीच एसडीएम का यह फैसला निश्चित रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। लेकिन अब असली परीक्षा आदेश के धरातल पर उतरने की है।जनता का सीधा सवाल है—क्या तहसील पार्क स्मृति वाटिका से गुमटियां वास्तव में हटेंगी या फिर आदेश भी पूर्व के निर्देशों की तरह कागजों तक सीमित रह जाएगा?
फिलहाल एसडीएम बृजेंद्र उपाध्याय के तत्काल निर्णय से क्षेत्र में यह संदेश गया है कि सार्वजनिक भूमि और सरकारी संपत्ति पर अतिक्रमण को लेकर प्रशासन गंभीर है। लोगों को उम्मीद है कि तहसील स्मृति वाटिका को अतिक्रमण मुक्त कर उसकी सुंदरता और गरिमा को बरकरार रखा जाएगा।
खबर का असर: लगातार खबरों और पत्रकारों की पहल के बाद प्रशासन हरकत में आया, अब निगाहें गुमटियां हटने की कार्रवाई पर। रिपोर्टर कृष्णानंद वर्मा

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