Month: August 2024

बांग्लादेश में हिंदुओं के साथ हिंसा और अत्याचार वाराणसी में निकली जन आक्रोश यात्रा

वाराणसी के विभिन्न क्षेत्रों से व्यापारी व आम जन इकट्ठे होकर जुलूस के रूप में सिगरा स्थित शहीद उद्यान पर इकट्ठे हुए। देखते ही देखते यह भीड़ जन आक्रोश रैली…

लखीमपुर खीरी जिले में शुरू हुआ घर-घर मतदाताओं का सत्यापन, 18 अक्टूबर तक चलेगा अभियान

रिपोर्ट प्रदीप मिश्रा डीएम ने घर-घर मतदाताओं का सत्यापन में लगाए 2890 बीएलओ वोटरलिस्ट का 29 अक्टूबर को आलेख्य प्रकाशन, 06 जनवरी 2025 को होगा अंतिम प्रकाशन लखीमपुर खीरी 22…

पुलिस का एक रूप ऐसा भी है जिससे पुलिस मित्रता की मिशाल बन गए

रिपोर्ट – हरेन्द्र सिंह जनपद लखीमपुर के विकास खण्ड बिजुआ के भानपुर में सड़क दुर्घटना में मर्तका के परिजन को गले लगा कर सुअंतना देते सिपाही प्रदीप चीमा पुलिस मित्रता…

अध्यक्ष अब्बास नकवी,महामंत्री आकाश सैनी और कोषाध्यक्ष देवरंजन मिश्रा हुए निर्वाचित

संवाददाता मोहम्मदी खीरी मोहम्मद आमिर 22 अगस्त रिपोर्टर मोहम्मद् आमिर मोहम्मदी प्रेस क्लब मोहम्मदी की बैठक एम.बी.ए.मेमोरियल स्कूल में हुई,जिसमे नयी 2024-25 की कार्य काणी धोषित की गई, जिसमें मुख्य…

गांव में बिजली न आने से ग्रामीण में आक्रोश

जनपद – सिद्धार्थनगररिपोर्ट – सूरज गुप्ता सिद्धार्थनगर के इटवा तहसील क्षेत्र के गदाखौवा में आज कई दिनों से विद्युत आपूर्ति बाधित होने से ग्रामीणो को काफी दिक्कत हो रही है।आपको…

बिजली के तार की चपेट में आने से युवक की मौत, पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा

जनपद – सिद्धार्थनगर रिपोर्ट – सूरज गुप्ता : बिजली के तार के चपेट में आने से युवक की मौत का मामला सामने आया है आजकल बिजली विभाग इतना लापरवाह हो…

जिले में शुरू हुआ घर-घर मतदाताओं का सत्यापन, 18 अक्टूबर तक चलेगा अभियान*

डीएम ने घर-घर मतदाताओं का सत्यापन में लगाए 2890 बीएलओ वोटरलिस्ट का 29 अक्टूबर को आलेख्य प्रकाशन, 06 जनवरी 2025 को होगा अंतिम प्रकाशन रिपोर्टर अनुज कुमार शुक्ला लखीमपुर खीरी…

जालौन जिले के कस्बा कोंच नगर में कजरी मेला महोत्सव का हुआ आयोजन

जिला ब्यूरो मुनव्वर अली जनपद जालौन जालौन जिले के कस्बा कोंच नगर में कजरी मेला महोत्सव के दौरान प्राचीन धनुतालब पर दंगल का आयोजन किया गया जिसमे प्रदेश व तमाम…

भारी मात्रा में रहस्यमई तरीके से हुई गौवंशों की मौत उच्च अधिकारियों ने बिठाई जांच

रिपोर्ट – आकर्ष मिश्र पसगवां ब्लॉक के अब्बासपुर ग्राम पंचायत के मजरे निजामपुर में संचालित गो आश्रय स्थल में गोवंशों की मृत्यु की प्रसारित सूचना का संज्ञान लेकर डीएम दुर्गा…

मीट के रेट को लेकर दो दुकानदारों के बीच मारपीट,चले लाठी डंडे। (बिजनौर)

रिपोर्ट _मोहम्मद ज़ीशान तहसील प्रभारी धामपुर धामपुर। जानकारी के अनुसार, चिकन मीट बेचने वाले दो दुकानदारों के बीच झड़प हो गई. पुलिस का कहना है कि मोहम्मद अनस की दुकान…

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सदा -ए -मोबीन ❤️✍️ दहेजऔरउसका_निवारण (रोकना)…दुनिया के सभी मुल्कों की तरक्की उसमें रहने बसने वाले इंसानों की तरक्की पर निर्भर करती है हर मुल्क में भिन्न-भिन्न जाति समूह के लोग पाए जाते हैं और सभी जातियों की अपनी अपनी संस्कृति और परंपरा होती है, आज के दौर में दहेज लगभग सभी जातियों में विद्यमान एक परंपरा है, आधुनिक दौर में उन सभी स्थापित परंपराओं को खत्म करना अति आवश्यक है जो एक प्रजातंत्रात्मक देश में समानता के सिद्धांत को प्रभावित करती हैं तथा समाज व देश की तरक्की में बाधक बनती हैं!दहेज प्रथा इसमें एक प्रमुख बाधा है इसे रोकने के लिए संसद ने 1961 में दहेज प्रतिषेध अधिनियम बनाया, अफसोस कि वह किताबों से निकलकर धरातल पर पूरी तरह से लागू नहीं हो पाया यानी नागरिकों ने उस पर पूरी तरह से अमल नहीं किया!दहेज का मतलब किसी मूल्यवान प्रतिभूति से है यह हमारे समाज की एक अहम कुरीति के रूप में उभरती चली आ रही है, इस पे जिन पढ़े-लिखे, संपन्न और प्रतिष्ठित लोगों को रोक लगाना चाहिए वही इसका प्रदर्शन कर बढ़ावा दे रहे हैं, जिसका बुरा असर गरीबों पर पड़ता है उन्हें इससे मानसिक, भावनात्मक और असमानता जैसी प्रवृति का शिकार होना पड़ता है और अपनी लड़कियों को बोझ समझने लगते हैं!इसके कारण देश में औसतन हर एक घंटे में एक महिला दहेज संबंधी कारणों से मौत का शिकार होती है, दहेज के कारण ही घरेलू हिंसा, महिला उत्पीड़न, आईपीसी 498 A, मारपीट, सीआरपीसी 125, तीन तलाक, आदि अपराध होते हैं, लोग अदालतों के चक्कर लगाकर हजारों रुपए व कीमती समय बर्बाद करते हैं और सरकारी मशीनरी के प्रयोग से देश पर आर्थिक बोझ पड़ता है!अगर सभी जातियों के पढ़े-लिखे, समाज व देश हित में सोचने वाले लोग इस प्रथा को खत्म करने के लिए अपने समाज से इस्लाही तहरीक (सुधार आंदोलन) शुरू कर दें तो यह पूरी तरह खत्म हो जाएगी!हमने अपने साथियों के साथ अपनी गद्दी (गाज़ी) बिरादरी से इस कुरीति को खत्म करने की तहरीक शुरू कर दी है!भारत के विभिन्न राज्यों में गद्दी बिरादरी के लोग रहते हैं हर क्षेत्र में किसी न किसी रूप में दहेज का चलन है हमारे समाज में अधिक दहेज की मांग करना, भारी-भरकम बारात ले जाना, तरह तरह का खाना बनवाना, बड़े-बड़े भौकाली लोगों को दावत देने को लोग अपनी प्रतिष्ठा समझते हैं! हम किसी से कम नहीं की भावना में जीने वाले हमारे गद्दी भाइयों यह सोच हमारी बिरादरी, समाज और देश की तरक्की में बाधक है!और तो और बहुत से पढ़े-लिखे हमारे नौजवान साथी यह सोच बना लेते हैं कि पढ़ लिख कर जब हमें नौकरी मिल जाएगी तो किसी पैसे वाले परिवार से हमारा रिश्ता होगा खूब दहेज मिलेगा और बहुत हसीन बीवी, यानी पढ़े-लिखे और नौकरी पेशा लड़कों में दहेज की इच्छा चार गुना बढ़ जाती है, और लड़की वाले भी यह सोच बना लेते हैं कि लड़का नौकरी वाला या पैसे वाला ही हो दहेज चाहे जितना देना पड़ जाए, मेरे गद्दी भाइयों यह सोच गलत है क्योंकि लालच में किया गया निकाह गलत है!मेरे गद्दी भाइयों हमारा दीन इस्लाम है और हमारे आदर्श हजरत मोहम्मद स. हैं, हमें अपने दीन और अपने आदर्श के बताए हुए रास्ते पर चलना है!हुजूर से शादी हजरत बीबी खदीजा रजि. ने इसलिए नहीं किया था कि वह कोई सरकारी हाकिम है या बहुत बड़े व्यापारी या जमींदार या किसी सियासी ओहदे पर हैं, बल्कि इसलिए किया था कि उनके अख्लाक, आदत, किरदार, व्यवहार, ईमानदारी, सादगी और सच्चाई की कोई मिसाल नहीं!मेरे नौजवान साथियों धन, दौलत, पद, प्रतिष्ठा हासिल करो मगर इसकी वजह से निकाह में विलंब ना करो और यह मिल जाने पर दहेज का लालच ना करो, तुम्हारा पद, दौलत तो लोगों को ही पसंद आएगी, लेकिन उसके साथ सादगी पसंद नेक इंसान बनो जो खुदा को पसंद आएगा!हम अपने ऑल इंडिया गद्दी समाज फेडरेशन के सभी अविवाहित नौजवान साथियों से गुजारिश करते हैं कि संकल्प लो कि हम अपनी शादी में बिल्कुल दहेज नहीं लेंगे दोस्तों अगर तुम्हीं इस पर अमल नहीं करोगे तो बिरादरी इस पर अमल कैसे करेगी, हुजूर साहब हर बात पर पहले खुद प्रैक्टिकल करते थे तब समाज के लोग मानते थे लिहाजा आप लोग इस पर अमल करने की मेहरबानी करें, दोस्तों त्याग अल्लाह को बहुत पसंद है, दहेज का त्याग करो!बिहार,उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश आदि के संगठन से जुड़े हमारे नौजवान साथी भी इस पर अमल करें और संकल्प लें!हुजूर ने अपनी बेटी की शादी में गृहस्ती की 9 चीजे दी थी और चंद खास लोगों को दावत दी थी,वो भी मेहर के पैस से!.. इस्लाम में बारात का भी कोई जिक्र नहीं है बारात को भी बाईकाट करें.. हम तो इसे लुटेरों का गैंग कहते हैं!हम लोग हुजूर की सुन्नत पर अमल करें निकाह में अपने चंद खास रिश्तेदारों व दोस्तों को ही ले जाएं ताकि लड़की वाले पर खाना देने का दबाव खत्म हो जाए!इस्लाम के मुताबिक निकाह में लड़की पक्ष का खर्च न के बराबर है वलीमा आदि लड़के वाले को करना चाहिए!मेरे गद्दी समाज के लोगों हमें अपने दीन पर मजबूती से अमल करना चाहिए, सुन्नत व हदीस के मुताबिक ही शादी करना चाहिए!