
रिश्ते ही पूंजी हैं’ एपिसोड-3 ‘PUSHPAK’ का वाराणसी में भव्य प्रीमियर
संस्कारों और रिश्तों को मजबूत करने का संदेश लेकर आया प्रेरणादायक एपिसोड
वाराणसी, 25 अगस्त। लोकप्रिय मोटिवेशनल सीरीज़ ‘रिश्ते ही पूंजी हैं’ के एपिसोड-3 ‘PUSHPAK ✈️ – संस्कार से सफर तक’ का भव्य प्रीमियर मंगलवार को अशोका इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड मैनेजमेंट, पहाड़िया, सारनाथ में आयोजित किया गया। कार्यक्रम में करीब 200 छात्र-छात्राओं के साथ शहर के गणमान्य लोगों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।
महज 14 मिनट 45 सेकेंड के इस प्रेरणादायक एपिसोड में Gen Z और युवाओं को केंद्र में रखते हुए रिश्तों, संस्कारों और करियर के बीच संतुलन का संदेश दिया गया है। एपिसोड का उद्देश्य आधुनिक एवं व्यस्त जीवनशैली के बीच कमजोर पड़ते पारिवारिक और सामाजिक रिश्तों को संस्कार, सम्मान और आपसी जुड़ाव के माध्यम से मजबूत करना है।
कार्यक्रम में जय श्री कृष्णा फाउंडेशन के संस्थापक एवं प्रख्यात मोटिवेशनल स्पीकर संजीव अग्रवाल ने कहा कि हमारे संस्कार ही हमारे पंख हैं। जब रिश्तों में समर्पण और सम्मान की उड़ान होती है, तभी जीवन का ‘PUSHPAK’ उड़ान भरता है। उन्होंने कहा कि डिजिटल दुनिया के साथ-साथ दिल के रिश्तों को मजबूत बनाए रखना भी बेहद जरूरी है।
कार्यक्रम में जेएसके के सह-संस्थापक अरविंद जैन ने अतिथियों का स्वागत किया। धन्यवाद ज्ञापन दिव्या अग्रवाल ने किया, जबकि संचालन अंकित लिल्हा ने किया।
प्रीमियर शो ‘रिश्तों के देवदूत’ मनीष गर्ग, ऋषि जयसवाल, विकास शुक्ला, शुभो घोष, प्रकाश भागचंदनी, धर्मेंद्र दुबे, प्रमोद गुप्ता, अंकित लिल्हा एवं साक्षी अपूर्व अग्रवाल के नेतृत्व में सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ।
इस अवसर पर ब्रजेश लोड, प्रदीप मल्होत्रा, डॉ. वीरेंद्र केसरी, सीए रश्मि केशेरवानी, सौम्या अग्रवाल, ऐश्वर्य अग्रवाल, नीरज पारीख, डॉ. शालिनी राणा, सुषमा अग्रवाल, संजीता अग्रवाल सहित अशोका इंस्टीट्यूट के करीब 200 छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि अशोका इंस्टीट्यूट के वाइस चेयरमैन डॉ. अमित मौर्य, डायरेक्टर डॉ. सारिका श्रीवास्तव तथा जयपुर से पधारे विशेष अतिथि अशोक गर्ग ने पूरी टीम को शुभकामनाएं दीं।
‘रिश्ते ही पूंजी हैं’ सीरीज़ का एपिसोड-3 ‘PUSHPAK’ YouTube, Facebook और Instagram सहित प्रमुख डिजिटल प्लेटफॉर्म पर निःशुल्क उपलब्ध है। आयोजकों ने लोगों से अपील की कि वे इस प्रेरणादायक एपिसोड को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाएं, ताकि रिश्तों, संस्कारों और सम्मान का संदेश समाज के हर वर्ग तक पहुंच सके।
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