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सहारनपुर कलेक्ट्रेट में 115 वर्ष पुरानी मस्जिद ढहाने पर भड़की ‘बहु-आयामी पार्टी’ (BAP); कानून और संविधान के उल्लंघन का लगाया आरोप
लखीमपुर खीरी/सहारनपुर, 8 सितंबर 2026: जनपद सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर स्थित ऐतिहासिक और प्राचीन मस्जिद (वर्ष 1911 से स्थापित) को प्रशासनिक अमले द्वारा जल्दबाजी में ध्वस्त किए जाने का मामला अब पूरी तरह गरमा गया है। बहु-आयामी पार्टी (BAP) ने इस कार्रवाई को विधि के शासन (Rule of Law) का खुला उल्लंघन बताते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री कार्यालय, मुख्य सचिव, सहारनपुर के जिला अधिकारी (DM) और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) को एक तीखा नागरिक ज्ञापन भेजा है।
पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के. एम. आमिश द्वारा जारी इस ज्ञापन में प्रशासन की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े किए गए हैं और इसे लोकतांत्रिक मूल्यों पर एक गहरा आघात बताया गया है।
पार्टी द्वारा उठाए गए मुख्य विधिक व संवैधानिक बिंदु:
नैसर्गिक न्याय का हनन: पार्टी का आरोप है कि जिला अदालत का आदेश 2 सितंबर को आया और प्रशासन ने मात्र 3 दिन के भीतर 5 सितंबर को बिना किसी पूर्व चेतावनी या उच्च न्यायालय (High Court) में अपील करने का समय दिए बिना बुलडोजर चला दिया। यह पीड़ित पक्ष को विधिक उपचार (Legal Remedy) से वंचित करने की दुर्भावनापूर्ण कोशिश थी।
‘प्लेस ऑफ वर्शिप एक्ट, 1991’ की अनदेखी: ज्ञापन में कहा गया है कि यह मस्जिद देश की आजादी (15 अगस्त 1947) से दशकों पहले से वहां मौजूद थी। संसद द्वारा पारित ‘धार्मिक स्थल कानून 1991’ किसी भी धार्मिक स्थल के ऐतिहासिक चरित्र को बदलने से रोकता है, जिसे प्रशासन ने पूरी तरह कुचल दिया।
सरकारी तंत्र का ‘हाँ-हजूरी’ रवैया: बहु-आयामी पार्टी ने सिविल सेवकों और पुलिस अधिकारियों की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए कहा कि अधिकारी अपनी स्वतंत्र विवेकशीलता खो चुके हैं और सत्ता पक्ष के राजनीतिक आकाओं को खुश करने के लिए ‘हाँ-हजूरी’ की भूमिका निभा रहे हैं।
समानता के अधिकार (अनुच्छेद 14) का उल्लंघन: पार्टी ने तीखा सवाल उठाया कि पूरे प्रदेश के हजारों कलेक्ट्रेट, थानों और कचहरी परिसरों के भीतर विभिन्न धर्मों के प्रार्थना स्थल बने हुए हैं। ऐसे में प्रशासन की ‘अतिक्रमण हटाओ’ नीति केवल एक ही धर्म के स्थल पर इतनी क्रूर और तीव्र क्यों हो जाती है? क्या बाकी परिसरों पर भी ऐसी त्वरित कार्रवाई की हिम्मत दिखाई जाएगी?

बहु-आयामी पार्टी (BAP) की प्रमुख मांगें

  1. न्यायिक जांच की मांग: इस पूरी विध्वंस प्रक्रिया की उच्च न्यायालय के किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश (Retired Judge) से जांच कराई जाए।
  2. समान नीति का निर्धारण: सरकारी परिसरों के भीतर मौजूद सभी धार्मिक ढांचों के लिए एक पारदर्शी, धर्मनिरपेक्ष और समान नीति स्पष्ट की जाए।
  3. दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई: जिन अधिकारियों ने स्थापित प्रक्रियाओं को दरकिनार कर कानून-व्यवस्था को खतरे में डाला, उन पर सख्त प्रशासनिक कार्रवाई हो।
    निष्कर्ष में पार्टी ने कहा:
    “इमारतें सिर्फ ईंट-गारे की नहीं बनतीं, इस देश का लोकतंत्र और जन-विश्वास भी भरोसे की ईंटों से बनता है। सहारनपुर प्रशासन ने मस्जिद नहीं, बल्कि आम जनता का न्यायपालिका और प्रशासनिक निष्पक्षता पर से भरोसा तोड़ा है।” पार्टी ने चेतावनी दी है कि वे इस दमनकारी नीति के खिलाफ शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक ढंग से अपना विरोध दर्ज कराते रहेंगे।
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