बिना ऑपरेशन किए आयुष्मान कार्ड से ₹34,200 खर्च होने का दावा, मरीज के परिजनों से भी हजारों रुपये लेने का आरोप


लखीमपुर-खीरी। महेवागंज स्थित नियो हॉस्पिटल को लेकर एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने स्वास्थ्य व्यवस्था और आयुष्मान योजना की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। फूलबेहड़ थाना क्षेत्र के ग्राम बसहा निवासी आबान पुत्र तजम्मुल ने जिलाधिकारी को शिकायती पत्र देकर अस्पताल पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
शिकायतकर्ता के मुताबिक उसकी 65 वर्षीय मां जहरुनिशां रीढ़ की हड्डी के दर्द से परेशान थीं। इलाज के लिए उन्हें 29 अगस्त 2026 को नियो हॉस्पिटल, महेवागंज में भर्ती कराया गया। आरोप है कि अस्पताल की ओर से ऑपरेशन की बात कही गई और इलाज के दौरान कई जांच, एक्स-रे व अल्ट्रासाउंड कराए गए, जिनके लिए परिजन से अलग से रुपये लिए गए।
सबसे बड़ा सवाल—जब ऑपरेशन नहीं हुआ तो आयुष्मान कार्ड से रकम कैसे खर्च हुई?
शिकायतकर्ता का दावा है कि अस्पताल में करीब सात दिन तक इलाज चला, लेकिन उनकी मां का ऑपरेशन नहीं किया गया। इसके बावजूद आयुष्मान कार्ड के जरिए ₹34,200 खर्च होने का रिकॉर्ड सामने आया है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि आयुष्मान कार्ड के अलावा उससे नगद रकम भी ली गई।
मामले में सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि यदि ऑपरेशन नहीं हुआ, तो आयुष्मान योजना के तहत कौन-कौन सी चिकित्सा सेवाएं दर्ज कराकर रकम खर्च दिखाई गई? हालांकि इसका वास्तविक जवाब जांच के बाद ही सामने आएगा।
सात दिन बाद छुट्टी, मरीज की हालत गंभीर होने का आरोप
आबान का आरोप है कि सात दिन बाद उनकी मां को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई, जबकि उनकी हालत गंभीर बनी हुई थी। शिकायतकर्ता का कहना है कि समय पर समुचित इलाज और ऑपरेशन न होने के कारण उनकी मां की परेशानी बढ़ गई।
डीएम से लगाई न्याय की गुहार
मामले को लेकर पीड़ित ने खीरी जिलाधिकारी को शिकायती पत्र देकर पूरे प्रकरण की जांच कराने, कथित रूप से लिए गए पैसे वापस दिलाने और मरीज का उचित इलाज कराने की मांग की है।
अब निगाहें प्रशासनिक जांच पर टिकी हैं। क्या आयुष्मान कार्ड से वास्तव में नियमों के विपरीत भुगतान लिया गया? क्या परिजन से अलग से रकम वसूली गई? और मरीज का ऑपरेशन क्यों नहीं हुआ? इन सवालों का जवाब जांच के बाद ही साफ हो सकेगा।
अंशू तिवारी
