मनीष कुमार की खास रिपोर्ट
एमडी न्यूज़ सूरजगंज बाराबंकी

सूरतगंज बाराबंकी। हेतमापुर में जिस घर की एक-एक ईंट जोड़ने में जिंदगी बीत गई, अब उसी आशियाने को ग्रामीण अपने हाथों से तोड़ने को मजबूर हैं। सरयू-घाघरा नदी का पानी भले घट गया हो, लेकिन में कटान का खतरा कम नहीं हुआ है। अब बाढ़ के पानी से ज्यादा ग्रामीणों को खिसकती जमीन और नदी में समाते घरों की चिंता सता रही है। करीब दस दिनों में सैकड़ों बीघा जमीन और कई मकान नदी में समा चुके हैं। कई परिवारों को डर है कि अगली कटान उनके घर तक पहुंच सकती है।
सुंदरनगर, कोड़री, सकतापुर, बलईपुर, कोयलीपुरवा और केदारीपुर में जलस्तर घटने से लोगों को राहत मिली है। वहीं हेतमापुर में नदी की धार लगातार किनारों को काट रही है।
घर टूटने से पहले ईंट-दरवाजे निकाल रहे ग्रामीण
कटान की जहद में पहुंचे परिवार घर नदी में गिरने का इंतजार नहीं कर रहे हैं। कोई दीवार की ईंट उखाड़ रहा है तो कोई दरवाजे, छत और सरिया निकालकर बचाने में जुटा है। ग्रामीणों का कहना है कि जमीन कब धंस जाए और मकान कब नदी में समा जाए, इसका भरोसा नहीं है। इसलिए जरूरी सामान पहले ही सुरक्षित जगह पहुंचाया जा रहा है।
दिलीप कुमार, कल्लू, कलावती, शकील, मैकूलाल, लोटन, पलटू, राजू, द्वारिका, कल्लू और मोहम्मद शरीफ समेत ग्रामीणों का कहना है कि कुछ लोग गृहस्थी का सामान रिश्तेदारों के यहां भेज रहे हैं, जबकि कुछ सड़क किनारे सुरक्षित जगह तलाश रहे हैं। सबसे बड़ी चिंता यह है कि घर बचा नहीं तो परिवार कहां रहेगा।

पुलिस प्रशासन ने लोगों को कटान वाले स्थानों पर जाने और वहां भीड़ लगाने से मना किया है। लोगों को चेतावनी दी जा रही है कि जमीन अचानक धंस सकती है। हालांकि जिन परिवारों के घर कटान की जद में हैं, उनके लिए सुरक्षित दूरी बनाना भी आसान नहीं है। सामान बचाने जाएं तो जान का खतरा है और पीछे हटें तो गृहस्थी का सामान छूटने की चिंता है।

3 views

By MD News

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *