
*गर्भवती की मौत के बाद जागा प्रशासन, तहसीलदार राकेश कुमार ने अवैध सेवा अस्पताल पर जड़ा ताला
रिपोर्टर प्रदीप पांडेय बदायूं
बदायूं ,सहसवान आखिरकार कुंभकर्णी नींद सो रहे स्वास्थ्य विभाग और तहसील प्रशासन की आंख खुली। नगर में मौतों का अस्पताल बन चुके अवैध सेवा अस्पताल को आज तहसीलदार राकेश कुमार व चिकित्सा प्रभारी ने अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचकर सील कर दिया। कार्रवाई के दौरान अस्पताल में अफरा-तफरी मच गई और स्टाफ मौके से फरार हो गया प्राप्त जानकारी के अनुसार कोतवाली क्षेत्र के गांव गढ़ौलिया पट्टी तासौल निवासी सलमान की पत्नी रिहाना (35) को प्रसव पीड़ा होने पर परिजन मंगलवार देर रात हरदत्तपुर मार्ग स्थित सेवा अस्पताल लेकर आए थे। बताया जाता है कि रिहाना के पहले से 5 बेटियां हैं, जिनमें एक की मौत हो चुकी है। पुत्र प्राप्ति की चाह में वह पांचवीं बार गर्भवती हुई थी। आरोप है कि अस्पताल में न तो कोई विशेषज्ञ डॉक्टर था और न ही कोई सुविधा। मंगलवार शाम प्रसव के दौरान ही रिहाना ने दम तोड़ दिया। मौत के बाद अस्पताल प्रबंधन ने आनन-फानन में शव को गांव भिजवा कर पूरे मामले को दबाने की कोशिश की। लेकिन मायके पक्ष के लोगों ने अस्पताल में जमकर हंगामा कर दिया।यह पहला मौका नहीं है जब सेवा अस्पताल की करतूत सामने आई हो। इससे पहले 27 मई को बिना पंजीयन के अवैध रूप से संचालित होने पर तत्कालीन एसडीएम के आदेश पर नायब तहसीलदार और एमओआईसी डॉ. प्रशांत त्यागी ने इसे सील किया था। लेकिन स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों की मानें तो तत्कालीन एसडीएम ने अपने निजी स्वार्थ के चलते बिना सीलिंग टीम के हस्ताक्षर के ही इस मौत वाले अस्पताल को फिर से खुलवा दिया। जिसके बाद से यह अस्पताल बिना रोक-टोक के मौत का खेल रहा था।जब इस पूरे मामले की खबर प्रमुखता से प्रकाशित हुई तो जिले के अधिकारियों में हड़कंप मच गया। मामले को गंभीरता से लेते हुए आज तहसीलदार राकेश कुमार, चिकित्सा प्रभारी, नायब तहसीलदार व कोतवाली पुलिस की संयुक्त टीम हरदत्तपुर मार्ग स्थित अस्पताल पर पहुंची। जांच में अस्पताल के पास कोई भी वैध कागजात व पंजीकरण नहीं मिला, जिस पर टीम ने तत्काल प्रभाव से अस्पताल को सील कर दियातहसीलदार राकेश कुमार ने बताया कि अस्पताल अवैध रूप से संचालित हो रहा था, जिसे सील कर दिया गया है। रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेजी जा रही है और संचालक के खिलाफ सख्त वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
