शकील बदायूँनी की पुण्यतिथि पर शकील बदायूँनी स्मृति क्लब ने शकील बदायूँनी पार्क पर शकील बदायूँनी की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर पुण्यतिथि मनाई। बदायूँ गौरव क्लब शकील बदायूँनी स्मृति क्लब एवं बदायूँ गौरव महोत्सव समिति संस्था के संयुक्त तत्वाधान में हिंदुस्तान के प्रख्यात गीतकार शकील बदायूँनी की पुण्यतिथि शांतिपूर्ण तरीके से मनाई गई। बदायूँ गौरव क्लब एवं शकील बदायूँनी स्मृति क्लब के मुख्य सचिव अमन मयंक शर्मा ने बताया कि संस्था द्वारा सर्वप्रथम अधिशासी अधिकारी नगरपालिका बदायूँ को सूचना देकर घण्टाघर स्थित शकील बदायूँनी पार्क से अतिक्रमण हटवाया गया।उसके पश्चात संस्था के पदाधिकारियों ने शकील बदायूँनी पार्क की साफ सफाई की।संस्था के पदाधिकारियों ने शकील बदायूँनी की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर एवं पुष्प अर्पित कर शकील बदायूँनी को याद किया।

बदायूँ गौरव क्लब के मुख्य सचिव एवं बदायूँ गौरव महोत्सव के मुख्य संयोजक अमन मयंक शर्मा ने कहा कि शकील बदायूँनी ने पूरी दुनिया मे बदायूँ जनपद का नाम रोशन किया है।शकील बदायूँनी ने अपने गीतों से फिल्मी दुनिया में एक विशेष पहचान बनाई एवं पूरे विश्व में अपने गीतों से संगीत प्रेमियों के दिलों पर राज किया है।बदायूँ गौरव क्लब के संरक्षक दिनेश शर्मा ने कहा कि शकील बदायूँनी अपने गीतों से हमेशा अमर रहेंगे।जब तक दुनिया है तक तब शकील बदायूँनी के लिखे हुए गीत गाये जाएंगे।बदायूँ गौरव क्लब के संरक्षक अशोक सक्सेना ने कहा कि शकील बदायूँनी जैसी शख्सियत सदियों में एक बार ही जन्म लेती हैं।शकील बदायूँनी ने लगातार 3 वर्ष बॉलीवुड का सबसे बड़ा अवार्ड फ़िल्मफ़ेअर अवार्ड जीता था।

बदायूँ गौरव क्लब के सहसचिव हिलाल बदायूनी ने कहा कि बदायूँ गौरव क्लब एवं शकील बदायूँनी स्मृति क्लब के द्वारा विगत कई वर्षों से लगातार शकील बदायूँनी की स्मृति में कार्यक्रम आयोजित कर उनको श्रदांजलि दी जा रही है।
अन्त् में बदायूं गौरव क्लब के मुख्य सचिव एवं बदायूं गौरव महोत्सव के मुख्य संयोजक अमन मयंक शर्मा ने बताया कि इस वर्ष भी शकील बदायूँनी की याद में शकील बदायूँनी स्मृति महोत्सव का आयोजन प्रस्तावित है।
इस अवसर पर अच्छन खां,कुनाल सक्सेना, कौशल राठौड़,मनीष ठाकुर, गौरव पाठक, रितेश उपाध्याय,नवीन सक्सेना,विभांशु दत्त ,रमेश गुप्ता आदि मौजूद रहे।

✍️ ब्यूरो रिपोर्ट आलोक मालपाणी बदायूं

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सदा -ए -मोबीन ❤️✍️ दहेजऔरउसका_निवारण (रोकना)…दुनिया के सभी मुल्कों की तरक्की उसमें रहने बसने वाले इंसानों की तरक्की पर निर्भर करती है हर मुल्क में भिन्न-भिन्न जाति समूह के लोग पाए जाते हैं और सभी जातियों की अपनी अपनी संस्कृति और परंपरा होती है, आज के दौर में दहेज लगभग सभी जातियों में विद्यमान एक परंपरा है, आधुनिक दौर में उन सभी स्थापित परंपराओं को खत्म करना अति आवश्यक है जो एक प्रजातंत्रात्मक देश में समानता के सिद्धांत को प्रभावित करती हैं तथा समाज व देश की तरक्की में बाधक बनती हैं!दहेज प्रथा इसमें एक प्रमुख बाधा है इसे रोकने के लिए संसद ने 1961 में दहेज प्रतिषेध अधिनियम बनाया, अफसोस कि वह किताबों से निकलकर धरातल पर पूरी तरह से लागू नहीं हो पाया यानी नागरिकों ने उस पर पूरी तरह से अमल नहीं किया!दहेज का मतलब किसी मूल्यवान प्रतिभूति से है यह हमारे समाज की एक अहम कुरीति के रूप में उभरती चली आ रही है, इस पे जिन पढ़े-लिखे, संपन्न और प्रतिष्ठित लोगों को रोक लगाना चाहिए वही इसका प्रदर्शन कर बढ़ावा दे रहे हैं, जिसका बुरा असर गरीबों पर पड़ता है उन्हें इससे मानसिक, भावनात्मक और असमानता जैसी प्रवृति का शिकार होना पड़ता है और अपनी लड़कियों को बोझ समझने लगते हैं!इसके कारण देश में औसतन हर एक घंटे में एक महिला दहेज संबंधी कारणों से मौत का शिकार होती है, दहेज के कारण ही घरेलू हिंसा, महिला उत्पीड़न, आईपीसी 498 A, मारपीट, सीआरपीसी 125, तीन तलाक, आदि अपराध होते हैं, लोग अदालतों के चक्कर लगाकर हजारों रुपए व कीमती समय बर्बाद करते हैं और सरकारी मशीनरी के प्रयोग से देश पर आर्थिक बोझ पड़ता है!अगर सभी जातियों के पढ़े-लिखे, समाज व देश हित में सोचने वाले लोग इस प्रथा को खत्म करने के लिए अपने समाज से इस्लाही तहरीक (सुधार आंदोलन) शुरू कर दें तो यह पूरी तरह खत्म हो जाएगी!हमने अपने साथियों के साथ अपनी गद्दी (गाज़ी) बिरादरी से इस कुरीति को खत्म करने की तहरीक शुरू कर दी है!भारत के विभिन्न राज्यों में गद्दी बिरादरी के लोग रहते हैं हर क्षेत्र में किसी न किसी रूप में दहेज का चलन है हमारे समाज में अधिक दहेज की मांग करना, भारी-भरकम बारात ले जाना, तरह तरह का खाना बनवाना, बड़े-बड़े भौकाली लोगों को दावत देने को लोग अपनी प्रतिष्ठा समझते हैं! हम किसी से कम नहीं की भावना में जीने वाले हमारे गद्दी भाइयों यह सोच हमारी बिरादरी, समाज और देश की तरक्की में बाधक है!और तो और बहुत से पढ़े-लिखे हमारे नौजवान साथी यह सोच बना लेते हैं कि पढ़ लिख कर जब हमें नौकरी मिल जाएगी तो किसी पैसे वाले परिवार से हमारा रिश्ता होगा खूब दहेज मिलेगा और बहुत हसीन बीवी, यानी पढ़े-लिखे और नौकरी पेशा लड़कों में दहेज की इच्छा चार गुना बढ़ जाती है, और लड़की वाले भी यह सोच बना लेते हैं कि लड़का नौकरी वाला या पैसे वाला ही हो दहेज चाहे जितना देना पड़ जाए, मेरे गद्दी भाइयों यह सोच गलत है क्योंकि लालच में किया गया निकाह गलत है!मेरे गद्दी भाइयों हमारा दीन इस्लाम है और हमारे आदर्श हजरत मोहम्मद स. हैं, हमें अपने दीन और अपने आदर्श के बताए हुए रास्ते पर चलना है!हुजूर से शादी हजरत बीबी खदीजा रजि. ने इसलिए नहीं किया था कि वह कोई सरकारी हाकिम है या बहुत बड़े व्यापारी या जमींदार या किसी सियासी ओहदे पर हैं, बल्कि इसलिए किया था कि उनके अख्लाक, आदत, किरदार, व्यवहार, ईमानदारी, सादगी और सच्चाई की कोई मिसाल नहीं!मेरे नौजवान साथियों धन, दौलत, पद, प्रतिष्ठा हासिल करो मगर इसकी वजह से निकाह में विलंब ना करो और यह मिल जाने पर दहेज का लालच ना करो, तुम्हारा पद, दौलत तो लोगों को ही पसंद आएगी, लेकिन उसके साथ सादगी पसंद नेक इंसान बनो जो खुदा को पसंद आएगा!हम अपने ऑल इंडिया गद्दी समाज फेडरेशन के सभी अविवाहित नौजवान साथियों से गुजारिश करते हैं कि संकल्प लो कि हम अपनी शादी में बिल्कुल दहेज नहीं लेंगे दोस्तों अगर तुम्हीं इस पर अमल नहीं करोगे तो बिरादरी इस पर अमल कैसे करेगी, हुजूर साहब हर बात पर पहले खुद प्रैक्टिकल करते थे तब समाज के लोग मानते थे लिहाजा आप लोग इस पर अमल करने की मेहरबानी करें, दोस्तों त्याग अल्लाह को बहुत पसंद है, दहेज का त्याग करो!बिहार,उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश आदि के संगठन से जुड़े हमारे नौजवान साथी भी इस पर अमल करें और संकल्प लें!हुजूर ने अपनी बेटी की शादी में गृहस्ती की 9 चीजे दी थी और चंद खास लोगों को दावत दी थी,वो भी मेहर के पैस से!.. इस्लाम में बारात का भी कोई जिक्र नहीं है बारात को भी बाईकाट करें.. हम तो इसे लुटेरों का गैंग कहते हैं!हम लोग हुजूर की सुन्नत पर अमल करें निकाह में अपने चंद खास रिश्तेदारों व दोस्तों को ही ले जाएं ताकि लड़की वाले पर खाना देने का दबाव खत्म हो जाए!इस्लाम के मुताबिक निकाह में लड़की पक्ष का खर्च न के बराबर है वलीमा आदि लड़के वाले को करना चाहिए!मेरे गद्दी समाज के लोगों हमें अपने दीन पर मजबूती से अमल करना चाहिए, सुन्नत व हदीस के मुताबिक ही शादी करना चाहिए!