*भूखा व्यक्ति ही जानता कि एक-एक निवाला कितना अमूल्य.सक्षम देश मानवता का ढिंढोरा पीटते हुए भोजन की बर्बादी में अव्वल..!

*रिपोर्ट राहुल राव

✍️उस गरीब से पूछो या उस इंसान से जो दिन रात एक करके निवाले को कमाता हैं जिससे वह अपने परिवार को खिला सकें लेकिन विडंबना है कि एक तरफ अरबों टन खाना बर्बाद हो रहा है वहीं दूसरी तरफ करोड़ लोग भूखे सोते हैं!ताज्जुब तो तब होता है जब भोजन बर्बादी में केवल अमीर देश ही नहीं है बल्कि गरीब देश भी शामिल पाए जाते हैं! इससे भी ज्यादा चौंकाने वाली बात यह है कि भोजन की बर्बादी के मामले में गांव-देहात अभी पीछे नही हैं शहरी इलाके भी बहुत ज्यादा आगे हैं! एक तरफ कई देश भुखमरी और कुपोषण की पीड़ा झेल रहे हैं! वहीं सक्षम देश मानवता का ढिंढोरा पीटते हुए भोजन की बर्बादी में अव्वल पाए जा रहे हैं!हर हाल में भोजन की बर्बादी रोकना चाहिए क्योंकि भूखा व्यक्ति ही जानता कि एक-एक निवाला कितना अमूल्य होता है!अगर भोजन बर्बाद करने वाले भूख की त्रासदी को समझ जाएं तो कई लोगों को भूखे पेट सोने पर मजबूर होने से बचाया जा सकता है।

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