मंडलायुक्त व पुलिस कमिश्नर की अध्यक्षता में श्रावण मास की तैयारियों के संबंध में बैठक॥

रोहित सेठ

दर्शनार्थियों की सुविधा हेतु सुरक्षा, पीने के पानी तथा शौचालय की उचित व्यवस्था हो: मंडलायुक्त॥

संपूर्ण धाम को सीसीटीवी से लैस करते हुए कंट्रोल रूप स्थापित किया गया है।

नेमी दर्शनार्थियों में कुछ लोगों द्वारा लगातार धक्का-मुक्की की जा रही जिनको अनुशासित होकर दर्शन करने हेतु कहा गया अन्यथा उनको चिन्हित करते हुए नोटिस जारी किया जायेगा।

बैठक में काशीवासीयों की सुविधा हेतु एक नवीन मार्ग काशी द्वार नंदुफारिया मार्ग से प्रातः एवं सायं 4 से 5 बजे तक खोलने के प्रस्ताव पर चर्चा हुई॥

सावन में सभी सोमवार को सुगम दर्शन की व्यवस्था को निरस्त रखा जायेगा॥

वाराणसी। मंडलायुक्त कौशल राज शर्मा तथा पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल की अध्यक्षता में काशी विश्वनाथ मंदिर में श्रावण मास की तैयारियों के संबंध में बैठक आहूत की गयी जिसमें मंदिर प्रशासन द्वारा की गयी तैयारियों को पीपीटी के माध्यम से अधिकारियों के समक्ष रखा गया। गौरतलब है की इस बार श्रावण मास 22 जुलाई से होकर 19 अगस्त तक होगा जिसमें पांच सोमवार पड़ रहे हैं जिससे दर्शनार्थियों की बड़ी संख्या में आने की उम्मीद है। मंदिर प्रशासन द्वारा दर्शनार्थियों की सुविधा हेतु कई जगहों पर लाइव दर्शन, खोया पाया केंद्र जिसमें बहुभाषी कर्मियों की भी व्यवस्था होगी तथा मौदगिन से गोदौलिया के बीच पूरे सावन माह नो व्हीकल जोन बनाते हुए वृद्ध, अशक्त, दिव्यांग तथा अति विशिष्ट लोगों के लिए मुफ्त ई-रिक्शा का संचालन किया जायेगा। संपूर्ण धाम क्षेत्र को सीसीटीवी कैमरे से लैस करते हुए कंट्रोल रूम को स्थापित किया गया है ताकि श्रद्धालुओं को कोई असुविधा न हो तथा सभी व्यवस्थाओं पर बारीकी से नजर रखी जा सके।

पुलिस कमिश्नर द्वारा सुरक्षा के सभी प्रबंध करने तथा गर्भ-गृह के पास पुराने पुलिस कर्मियों की ड्यूटी लगाने हेतु निर्देशित किया गया।

मंडलायुक्त द्वारा पूरे क्षेत्र में सुरक्षा के दृष्टिगत सभी लगे सीसीटीवी को चेक करते हुए बचे जगहों पर भी कैमरे लगाने को निर्देशित किया गया। उन्होंने सड़क पर भीड़ को कम करते हुए अंदर बैरिकेड्स को जिग-जैग करने तथा शेड लगाने को भी निर्देशित किया। घाट पर लगी फ्लड लाइट को और बढ़ाने हेतु निर्देशित किया ताकि कोई भी क्षेत्र अंधेरे में नहीं रहने पाये। मंडलायुक्त ने पब्लिक एड्रेस सिस्टम तथा गलियों में भी सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम, नगर निगम को सीवरेज चेकिंग तथा सफाई के उचित प्रबंध करने हेतु निर्देशित किया उन्होंने परिक्षेत्र के दुकानदारों के साथ भी बैठक करने हेतु निर्देशित किया गया ताकि उचित व्यवस्था बनाने में उनकी मदद ली जा सके। स्वास्थ्य विभाग को भी पूरे परिक्षेत्र में डॉक्टरों की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चत करने हेतु निर्देशित किया गया ताकि दर्शनार्थियों को जरूरत पड़ने पर ससमय उचित चिकित्सा मुहैया की जा सके। मंदिर प्रशासन को ड्यूटी में लगे सभी स्टाफ के खाने-पीने तथा जलपान के उचित प्रबंध करने हेतु भी कहा गया। मंडलायुक्त द्वारा दर्शनार्थियों हेतु शौचालय, पीने के पानी की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने हेतु निर्देशित किया गया। उन्होंने घाटों पर लगे सभी जेटी को ठीक करने हेतु भी निर्देशित किया।

दैनिक दर्शनार्थियों में कुछ दर्शनार्थियों द्वारा अक्सर शिकायत की जा रही है की कतिपय स्थानीय नेमी
द्वारा दर्शन के दौरान धक्का-मुक्की / अव्यवस्था की जाती है जिससे नेमी दर्शनार्थियों को परेशानी का सामना करना पड़ता है इसको ध्यान में रखते हुए धाम में अनुशासन बनाये जाने हेतु सभी से लाइन में लगकर अनुशासित होकर दर्शन करने की अपेक्षा की गयी अन्यथा ऐसे लोगों को चिन्हित करते हुए नोटिस जारी किया जाएगा तथा पुनः अव्यवस्था फैलाने पर उनको आम दर्शनार्थियों के मार्फत दर्शन करना पड़ेगा।

काशीवासीयों हेतु एक नवीन मार्ग काशी द्वार नंदुफारिया मार्ग से प्रातः एवं सायं 4 से 5 बजे तक खोलने के प्रस्ताव पर चर्चा हुई जिसको शुरूआत में नेमी दर्शनार्थियों हेतु खोला जायेगा तत्पश्चात व्यवस्था सुदृढ़ होने के बाद आम काशीवासीयों हेतु खोला जायेगा।

बैठक में जिलाधिकारी एस राजलिंगम, अपर पुलिस आयुक्त वाराणसी कमिश्नरेट एस चिनप्पा, मुख्य कार्यपालक अधिकारी विश्व भूषण मिश्रा, सीएमओ, अपर नगर आयुक्त, मंदिर प्रशासन तथा पुलिस विभाग से संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।

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सदा -ए -मोबीन ❤️✍️ दहेजऔरउसका_निवारण (रोकना)…दुनिया के सभी मुल्कों की तरक्की उसमें रहने बसने वाले इंसानों की तरक्की पर निर्भर करती है हर मुल्क में भिन्न-भिन्न जाति समूह के लोग पाए जाते हैं और सभी जातियों की अपनी अपनी संस्कृति और परंपरा होती है, आज के दौर में दहेज लगभग सभी जातियों में विद्यमान एक परंपरा है, आधुनिक दौर में उन सभी स्थापित परंपराओं को खत्म करना अति आवश्यक है जो एक प्रजातंत्रात्मक देश में समानता के सिद्धांत को प्रभावित करती हैं तथा समाज व देश की तरक्की में बाधक बनती हैं!दहेज प्रथा इसमें एक प्रमुख बाधा है इसे रोकने के लिए संसद ने 1961 में दहेज प्रतिषेध अधिनियम बनाया, अफसोस कि वह किताबों से निकलकर धरातल पर पूरी तरह से लागू नहीं हो पाया यानी नागरिकों ने उस पर पूरी तरह से अमल नहीं किया!दहेज का मतलब किसी मूल्यवान प्रतिभूति से है यह हमारे समाज की एक अहम कुरीति के रूप में उभरती चली आ रही है, इस पे जिन पढ़े-लिखे, संपन्न और प्रतिष्ठित लोगों को रोक लगाना चाहिए वही इसका प्रदर्शन कर बढ़ावा दे रहे हैं, जिसका बुरा असर गरीबों पर पड़ता है उन्हें इससे मानसिक, भावनात्मक और असमानता जैसी प्रवृति का शिकार होना पड़ता है और अपनी लड़कियों को बोझ समझने लगते हैं!इसके कारण देश में औसतन हर एक घंटे में एक महिला दहेज संबंधी कारणों से मौत का शिकार होती है, दहेज के कारण ही घरेलू हिंसा, महिला उत्पीड़न, आईपीसी 498 A, मारपीट, सीआरपीसी 125, तीन तलाक, आदि अपराध होते हैं, लोग अदालतों के चक्कर लगाकर हजारों रुपए व कीमती समय बर्बाद करते हैं और सरकारी मशीनरी के प्रयोग से देश पर आर्थिक बोझ पड़ता है!अगर सभी जातियों के पढ़े-लिखे, समाज व देश हित में सोचने वाले लोग इस प्रथा को खत्म करने के लिए अपने समाज से इस्लाही तहरीक (सुधार आंदोलन) शुरू कर दें तो यह पूरी तरह खत्म हो जाएगी!हमने अपने साथियों के साथ अपनी गद्दी (गाज़ी) बिरादरी से इस कुरीति को खत्म करने की तहरीक शुरू कर दी है!भारत के विभिन्न राज्यों में गद्दी बिरादरी के लोग रहते हैं हर क्षेत्र में किसी न किसी रूप में दहेज का चलन है हमारे समाज में अधिक दहेज की मांग करना, भारी-भरकम बारात ले जाना, तरह तरह का खाना बनवाना, बड़े-बड़े भौकाली लोगों को दावत देने को लोग अपनी प्रतिष्ठा समझते हैं! हम किसी से कम नहीं की भावना में जीने वाले हमारे गद्दी भाइयों यह सोच हमारी बिरादरी, समाज और देश की तरक्की में बाधक है!और तो और बहुत से पढ़े-लिखे हमारे नौजवान साथी यह सोच बना लेते हैं कि पढ़ लिख कर जब हमें नौकरी मिल जाएगी तो किसी पैसे वाले परिवार से हमारा रिश्ता होगा खूब दहेज मिलेगा और बहुत हसीन बीवी, यानी पढ़े-लिखे और नौकरी पेशा लड़कों में दहेज की इच्छा चार गुना बढ़ जाती है, और लड़की वाले भी यह सोच बना लेते हैं कि लड़का नौकरी वाला या पैसे वाला ही हो दहेज चाहे जितना देना पड़ जाए, मेरे गद्दी भाइयों यह सोच गलत है क्योंकि लालच में किया गया निकाह गलत है!मेरे गद्दी भाइयों हमारा दीन इस्लाम है और हमारे आदर्श हजरत मोहम्मद स. हैं, हमें अपने दीन और अपने आदर्श के बताए हुए रास्ते पर चलना है!हुजूर से शादी हजरत बीबी खदीजा रजि. ने इसलिए नहीं किया था कि वह कोई सरकारी हाकिम है या बहुत बड़े व्यापारी या जमींदार या किसी सियासी ओहदे पर हैं, बल्कि इसलिए किया था कि उनके अख्लाक, आदत, किरदार, व्यवहार, ईमानदारी, सादगी और सच्चाई की कोई मिसाल नहीं!मेरे नौजवान साथियों धन, दौलत, पद, प्रतिष्ठा हासिल करो मगर इसकी वजह से निकाह में विलंब ना करो और यह मिल जाने पर दहेज का लालच ना करो, तुम्हारा पद, दौलत तो लोगों को ही पसंद आएगी, लेकिन उसके साथ सादगी पसंद नेक इंसान बनो जो खुदा को पसंद आएगा!हम अपने ऑल इंडिया गद्दी समाज फेडरेशन के सभी अविवाहित नौजवान साथियों से गुजारिश करते हैं कि संकल्प लो कि हम अपनी शादी में बिल्कुल दहेज नहीं लेंगे दोस्तों अगर तुम्हीं इस पर अमल नहीं करोगे तो बिरादरी इस पर अमल कैसे करेगी, हुजूर साहब हर बात पर पहले खुद प्रैक्टिकल करते थे तब समाज के लोग मानते थे लिहाजा आप लोग इस पर अमल करने की मेहरबानी करें, दोस्तों त्याग अल्लाह को बहुत पसंद है, दहेज का त्याग करो!बिहार,उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश आदि के संगठन से जुड़े हमारे नौजवान साथी भी इस पर अमल करें और संकल्प लें!हुजूर ने अपनी बेटी की शादी में गृहस्ती की 9 चीजे दी थी और चंद खास लोगों को दावत दी थी,वो भी मेहर के पैस से!.. इस्लाम में बारात का भी कोई जिक्र नहीं है बारात को भी बाईकाट करें.. हम तो इसे लुटेरों का गैंग कहते हैं!हम लोग हुजूर की सुन्नत पर अमल करें निकाह में अपने चंद खास रिश्तेदारों व दोस्तों को ही ले जाएं ताकि लड़की वाले पर खाना देने का दबाव खत्म हो जाए!इस्लाम के मुताबिक निकाह में लड़की पक्ष का खर्च न के बराबर है वलीमा आदि लड़के वाले को करना चाहिए!मेरे गद्दी समाज के लोगों हमें अपने दीन पर मजबूती से अमल करना चाहिए, सुन्नत व हदीस के मुताबिक ही शादी करना चाहिए!