शतचंडी महायज्ञ व शिव महापुराण कथा षष्टम दिवस संपन्न

रोहित सेठ

वाराणसी/ आज(मंगलवार) के दिन षष्टम दिवस के कार्यक्रम में रस घोर कलिकाल में समस्त प्राणियों के पाप संताप एवं कष्ट व रोग की निवृति के लिए पवित्र माघ के महीने में माँ अष्टभुजी के प्रांगण में नव दिवसीय होमात्मक शतचण्डी महायज्ञ का दिव्य आयोजन चल रहा है| इस गुप्त नवरात्रि में शतचण्डी यज्ञ का बड़ा ही महत्व बताया गया है शात्रों के अनुसार इस शतचंडी महायज्ञ करने से सभी प्राणियों के दुखों की निवृति तथा सुख शान्ति, धन-धान्य के साथ ज्ञान व लक्ष्मी रथ की कृपा प्राप्ति के लिए किया जाता हैं| शतचंडी महायज्ञ सविधि शास्त्रोक्तानुसार विधिवत पूर्क चल रहा है| होमात्मक शतचण्डी महायज्ञ के कार्यक्रमानुसार आज प्रातः काल मंडपपूजन तथा षोडशोपचार भगवती दुर्गा का पूजन एवं महाभिषेक व चंडी पाठ से हवन एवं सायं काल में अन्य आरती एव प्रसाद वितरण से आज का कार्य सकुशल संपन्न हुआ| काशी के तपो भूमि से पधारे यज्ञाचाप एवं कर्मकाण्ड विशेषज्ञ आचार्य पंडित ज्योतिप हरिकेश पाण्डेय जी के नेतृत्व में वैदिक विद्वानों के द्वारा चल रहा है|

शिव महापुराण की कथा में आज(मंगलवार) षष्टम दिवस में कथावाचक बालव्यास आयुष कृष्ण नयन जी महाराज ने आज की कथा में मां सती के जीवन का वर्णन किया| किस प्रकार से भगवती सती अपने पति के अपमान को सुनकर यज्ञ कुंड में विराजी और उन्होंने अपने शरीर का त्याग किया| पूज्य महाराज जी ने जनमानस को संबोधित करते हुए कहा कि एक बेटी का जीवन कैसा होता है, वह दोनों घरों का कल्याण चाहती है चाहे वह पिता का हो अथवा पति का दोनों ही घरों को अपना मानती है| किंतु दोनों ही घरों में उसे पराया समझा जाता है, पिता के घर ऐसा समझा जाता है कि इसे तो दूसरे घर जाना है और पति के घर में लोग समझते हैं कि यह तो दूसरे के घर से आई है| इसलिए आप अपने घरों में नारी का सम्मान करें क्योंकि नारी साक्षात जगदंबिका की ही है यत्र नार्यस्तु पूज्यंते रमंते तत्र देवता इसके अतिरिक्त महाराज जी ने शिव विवाह की मंगलमय कथा का वर्णन किया| जिसमें भगवान शिव और मां पार्वती की अत्यंत सुंदर झांकी का सब श्रोताओं ने दर्शन की दिव्या भव्य रूप से भगवान शिव की बारात निकाली गई और सब भक्तों ने मिलकर भगवान का विवाह बड़ी उत्सव व धूमधाम के साथ मनाया गया| इस महोत्सव में रामलीला मैदान शिवपुर में चल रहे शिव महापुराण कथा में हजारों की जनसंख्या शिव भक्त मौजूद रहकर, शिव के महात्म के बारे में बाल व्यास आयुष कृष्ण नयन महराज जी के वचनों को सुनकर मनमुध सुना और शिव जी के इस महात्म की कथा से पूरा शिवपुर क्षेत्र शिव भक्तिमय हो गया|

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You missed