रिपोर्ट:राहुल राव

लखनऊ।कभी चंबल के बीहड़ों में बंदूकों की गोलियों की तड़तड़ाहट से 25 साल तक आतंक मचाने वालीं दस्यु सुंदरी डकैत कुसुमा नाइन ने शनिवार को दुनिया को अलविदा कह दिया।खौफ का पर्याय रही कुसुमा नाइन को टीबी हो गयी थी, जिससे उसकी जान चली गई।दस्यु सुंदरी फूलन देवी से कुसुमा नाइन की खुली अदावत थी।फूलन से बदला लेने के लिए कुसुमा ने औरैया जिले के अस्ता गांव में लालाराम और श्रीराम के साथ मिलकर 15 मल्लाहों को लाइन में खड़ा कर गोलियों से भून डाला था।

कहा जाता है कि लालाराम के साथ कुसुमा नाइन के प्रेम संबंध भी थे।लालाराम से बदला लेने के लिए फूलन देवी ने कानपुर देहात के बेहमई गांव में 22 लोगों को लाइन में खड़ा कर मार डाला था। इसी का बदला लेते हुए लालाराम के साथ मिलकर कुसुमा नाइन ने 15 मल्लाहों का कत्ल कर दिया था।


यह क्रूरता यहीं खत्म नहीं हुई थी बल्कि कुसुमा ने गांव में ही आग लगा दी थी। इसमें एक महिला और उसके 5 साल के बच्चे की जलकर मौत हो गई थी। यह घटना 1984 की है, जिसे 1981 में अंजाम दिए गए बेहमई कांड के बदले के तौर पर किया गया था।

इससे पहले एक घटना में उसने दो लोगों की जिंदा ही आंखें निकलवा ली थीं। यही घटना थी जिससे कुसुमा नाइन चंबल क्षेत्र में खौफ का पर्याय बन गई थी। कहा जाता है कि कुसुमा नाइन डकैत रामआसरे उर्फ फक्कड़ बाबा के संपर्क में आकर दस्यु सुंदरी बनी थी। फूलन देवी मल्लाह समाज की थी, जबकि लालाराम और श्रीराम राजपूत थे। यही वजह थी कि बेहमई कांड और फिर अस्ता कांड ने यूपी समेत पूरे देश में जातीय तनाव भी बढ़ा दिया था। इन दोनों कांडों की दशकों तक चर्चाएं रही थीं।

कुसुमा नाइन कितनी कुख्यात थी इसका अंदाजा इस बात से ही लगाया जा सकता है कि उसके नाम पर हत्या, फिरौती, लूट, अपहरण समेत 200 मामले यूपी में दर्ज थे। इसके अलावा 35 मामलों में कुसुमा नाइन मध्य प्रदेश में वांछित थी। यूपी पुलिस ने कुसुमा नाइन पर 20 हजार और मध्य प्रदेश पुलिस ने 15 हजार का इनाम घोषित किया था।

1964 में जालौन जिले के सिरसाकलार थाना क्षेत्र के टिकरी गांव में कुसुमा नाइन का जन्म हुआ था। कुसुमा नाइन डरू नाई की बेटी थी।डरू नाई गांव के ग्राम प्रधान थे।चाचा गांव में सरकारी राशन के कोटे की दुकान चलाते थे।कुसुमा नाइन का लगभग दो दशकों तक आतंक रहा,लेकिन 2004 में कुसुमा नाइन ने आत्मसमर्पण कर दिया था।कुसुमा के साथ फक्कड़ बाबा ने भी आत्मसमर्पण कर दिया था।इनके अलावा गैंग के कई प्रमुख सदस्य छतरपुर के रहने वाले राम चंद बाजपेयी, इटावा के संतोष दुबे, कमलेश बाजपेयी, मनोज मिश्रा और घूरे सिंह यादव ने भी आत्मसमर्पण कर दिया था।

यह गैंग कितना बड़ा था इसका अंदाजा इससे ही लगता है कि आज से 21 साल पहले इन लोगों ने आत्मसमर्पण के दौरान पुलिस को जो हथियार सौंपे थे,उनमें कई अमेरिकी राइफलें भी थीं।एक अधिकारी की हत्या और अपहरण के मामले में 2017 में दस्यु सुंदरी कुसुमा नाइन और फक्कड़ बाबा को उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। इटावा जिला जेल में सजा काटने के दौरान टीबी की बीमारी से कुसुमा नाइन पीड़ित हो गई। गंभीर रूप से बीमार होने पर कुसुमा नाइन को सैफई मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया था।इसके बाद भी तबीयत में सुधार नहीं हुआ तो फिर लखनऊ के केजीएमयू अस्पताल लाया गया, जहां कुसुमा नाइन की मौत हो गई।

कुसुमा नाइन का सोमवार सुबह उनके ससुराल जालौन में थाना कुठौंद के गांव कुरौली में अंतिम संस्कार कर दिया गया। उनके पति केदार उर्फ रूठे याज्ञिक ने उन्हें मुखाग्नि दी।रविवार रात को कुसुमा का पार्थिव शरीर उनके ससुराल लाया गया था।एहतियात के तौर पर गांव में रात से पुलिस फोर्स तैनात थी। कुसुमा के अंतिम दर्शन के लिए गांव में काफी लोग मौजूद रहे।

0 views

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *