रिपोर्टर नौशाद मलिक

धामपुर। जैतरा रेलवे फाटक के आसपास अतिक्रमण अब बेकाबू होता जा रहा है। क्षेत्र में रोजाना लगने वाले हाथ ठेले और खासतौर से फल विक्रेताओं द्वारा कब्जा जमाए जाने से आम जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। आने जाने वालों को जहां हर समय जाम की समस्या से जूझना पड़ता है वहीं दुर्घटनाओं की आशंका भी लगातार बनी रहती है। रेलवे फाटक के इर्द गिर्द दर्जनों हाथ ठेले दिनभर खड़े रहते हैं जो न केवल मुख्य मार्ग को बाधित करते हैं बल्कि कभी कभी तो एंबुलेंस और जरूरी वाहनों के निकलने में भी परेशानी खड़ी कर देते हैं। ये ठेले दुकानदार हर दिन सड़क पर अपना ठेला खड़ा कर देते हैं जिससे पैदल चलने वालों तक के लिए जगह नहीं बचती। ग्राम पंचायत जैतरा की ओर जाने वाले इस रास्ते पर ही पुलिस चौकी भी स्थित है लेकिन पुलिस की उपस्थिति के बावजूद अतिक्रमणकारी बेखौफ नजर आते हैं।

पुलिस कर्मी भी इन फेरी वालों के सामने बेबस दिखाई देते हैं या यूं कहें कि उनकी मिलीभगत की चर्चा भी आम है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि रेलवे प्रशासन को इस अवैध अतिक्रमण की जानकारी भली-भांति है लेकिन फिर भी आँखें मूंदे हुए हैं। बार-बार शिकायतों के बावजूद आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। ऐसा प्रतीत होता है जैसे प्रशासन और पुलिस ने इन अतिक्रमण कारियों के आगे हथियार डाल दिए हों।फल विक्रेताओं के ठेले जहां तहां खड़े होते हैं जिससे फाटक पर अचानक भीड़ बढ़ जाती है और कई बार तो छोटे वाहन आपस में टकरा जाते हैं। यह स्थिति न केवल असुविधा जनक है बल्कि दुर्घटनाओं को भी न्योता दे रही है।जनता की मांग है कि तुरंत इन ठेले वालों को हटाया जाए और इस इलाके को अतिक्रमण मुक्त बनाया जाए जिससे रास्ता साफ हो और आमजन को राहत मिले। प्रशासन को चाहिए कि वो मौके पर जाकर स्थाई समाधान के लिए कदम उठाए और रेलवे फाटक के आसपास यातायात को सुचारू रखने के लिए ठोस कार्ययोजना बनाए। यदिप्रशासन ने जल्द इस ओर ध्यान नहीं दिया तो कोई बड़ा हादसा कभी भी हो सकता है, जिसकी जिम्मेदारी फिर तय करना कठिन हो जाएगा।

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