आज रामपुर रज़ा पुस्तकालय में 80वें स्वतंत्रता दिवस के उपलक्ष्य में “भारतगाथा- संघर्ष से स्वाधीनता, स्वाधीनता से स्वाभिमान, स्वाभिमान से विकसित भारत” विषय पर आधारित विशेष प्रदर्शनी का उद्घाटन पुस्तकालय के निदेशक डॉ. पुष्कर मिश्र जी के करकमलों द्वारा संपन्न हुआ।
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लोकेशन रामपुर
जिला रिपोर्टर यूसुफ की रिपोर्ट
इस अवसर पर पुस्तकालय के निदेशक डॉ. पुष्कर मिश्र जी ने अपने संबोधन में कहा कि इस प्रदर्शनी के माध्यम से हम स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान किए गए संघर्ष और बलिदानों को बहुत ही कम समय में जान और समझ सकते हैं। स्वतंत्रता हमें यूँ ही थाली में सजाकर नहीं मिली थी। इसके लिए न जाने कितने लोगों ने अपने प्राणों की आहुति दी, कितने लोगों ने अपना पूरा जीवन देश की स्वतंत्रता के लिए समर्पित कर दिया और कितने ही वीरों ने राष्ट्र की स्वतंत्रता के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनी का शीर्षक “संघर्ष से स्वाधीनता, स्वाधीनता से स्वाभिमान, स्वाभिमान से विकसित भारत” और इसकी विषय-वस्तु “भारतगाथा” हमारे संघर्ष, त्याग और राष्ट्र निर्माण की यात्रा को प्रभावी रूप से दर्शाती है। इस प्रदर्शनी की विशेषता यह है कि भारत के स्वतंत्रता संग्राम में महिलाओं के योगदान को भी यथोचित स्थान दिया गया है। उनके त्याग, संघर्ष और बलिदान की भूमिका किसी भी दृष्टि से अन्य स्वतंत्रता सेनानियों से कम नहीं रही है। कहा कि इस बार का स्वतंत्रता दिवस कई कारणों से अपने आप में विशेष है। आज के वैश्विक और राष्ट्रीय परिदृश्य में आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को लेकर अनेक प्रश्न हमारे सामने हैं। ऐसे समय में हमें स्वाभिमान से विकसित भारत की यात्रा की दिशा में आगे बढ़ना है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने वर्ष 2047 तक विकसित भारत के स्वप्न को साकार करने का संकल्प देश के सामने रखा है। इसमें रामपुर रज़ा पुस्तकालय अपनी क्या भूमिका निभा सकता है, इस दिशा में पुस्तकालय ने अपना दृष्टिकोण तैयार किया है। पिछले वर्ष प्रस्तुत किए गए हमारे विज़न डॉक्यूमेंट का प्रमुख विषय भी “रामपुर रज़ा पुस्तकालय : विकसित भारत @2047” था। इसमें यह स्पष्ट करने का प्रयास किया गया है कि विकसित भारत के निर्माण में रामपुर रज़ा पुस्तकालय की क्या भूमिका होगी और एक संस्थान के रूप में पुस्तकालय को किस प्रकार विकसित किया जाएगा। इस दिशा में काफी कार्य आगे बढ़ चुका है। वर्ष 2026 में प्रस्तुत किए जाने वाले विज़न डॉक्यूमेंट में इन विषयों के साथ-साथ कई अन्य महत्वपूर्ण पहलुओं को भी शामिल किया जाएगा तथा अब तक उठाए गए कदम और अर्जित उपलब्धियों का भी संक्षिप्त परिचय दिया जाएगा। कहा कि हममें से शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति हो, जिसका जन्म 1947 से पहले हुआ हो। यह हम सभी का सौभाग्य है कि हमने स्वतंत्र भारत में जन्म लिया है। अब हमारे सामने यह अवसर है कि भारत को विश्व का सिरमौर कैसे बनाया जाए और आने वाला भारत किस प्रकार एक बेहतर भारत के साथ-साथ बेहतर विश्व के निर्माण में अपनी भूमिका निभा सकता है, इस दिशा में आगे बढ़ना आज हम सभी की जिम्मेदारी है। यह कार्य स्वतंत्रता संग्राम के दौरान क्रांतिकारियों द्वारा किए गए संघर्ष और त्याग से कम महत्वपूर्ण नहीं है। कहा कि हम सभी को अपने-अपने दायित्वों का निर्वहन पूरी ईमानदारी, तन्मयता, पारदर्शिता, उत्तरदायित्व और समर्पण के साथ करना चाहिए। अपने कार्य को पूरी निष्ठा और मनोयोग से करना ही स्वतंत्रता संग्राम के उन सभी त्यागी और बलिदानी वीरों के प्रति हमारी सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

प्रदर्शनी में भारत के स्वतंत्रता संग्राम तथा राष्ट्र निर्माण से लेकर स्वतंत्रता से विकसित भारत तक की गौरवशाली यात्रा को विभिन्न ऐतिहासिक चित्रों के माध्यम से प्रदर्शित किया गया है। प्रदर्शनी में महात्मा गांधी, नेताजी सुभाष चंद्र बोस सहित अनेक स्वतंत्रता सेनानियों एवं राष्ट्रनायकों के योगदान को प्रमुखता से दर्शाया गया है।

साथ ही, पुस्तकालय के समृद्ध संग्रह में संरक्षित ‘उत्तर प्रदेश का स्वतंत्रता संग्राम’, ‘स्वतंत्रता संग्राम और महिलाएँ’, ‘सबका साथ, सबका विकास’, ‘लोकतंत्र के स्वर’, ‘भारत के समग्र विकास में भारतीय भाषाओं की भूमिका’, ‘महात्मा गांधी के संदेश’ तथा ‘भारत के क्रांतिकारी’ आदि महत्वपूर्ण पुस्तकों को भी प्रदर्शित किया गया है।

यह विशेष प्रदर्शनी दिनांक 13 अगस्त 2026 से 22 अगस्त 2026 तक प्रातः 10:00 बजे से सायं 5:00 बजे तक पुस्तकालय के दरबार हॉल में आमजन के अवलोकन हेतु प्रदर्शित रहेगी।

इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम का सफल संचालन श्री सचिन तिवारी द्वारा किया गया।

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