उत्तर प्रदेश में मंगलवार की देर रात बड़ा प्रशासनिक फेरबदल कर दिया गया। चार जिलों के जिलाधिकारियों और दो जिलों के मुख्य विकास अधिकारी समेत 14 आईएएस और छह पीसीएस अफसरों के तबादले कर दिए गए। जिन जिलाधिकारियों को बदला गया है उनमें पीलीभीत, बलिया, हरदोई और महाराजगंज शामिल हैं। इसके अलावा सिद्धार्थनगर और बुलंदशहर के मुख्य विकास अधिकारी बदल गए हैं। वरिष्ठ आईएएस अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार की जिम्मेदारियां बढ़ाई गई हैं। उनके पास पहले से मौजूद विभाग के साथ ही कृषि उत्पादन आयुक्त का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। भी तक यह अतिरिक्त प्रभार मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह के पास था।

इसके अलावा हरदोई के जिलाधिकारी मंगला प्रसाद सिंह एक बार फिर पूर्वांचल लौटे हैं। उन्होंने बलिया का जिलाधिकारी बनाया गया है। इससे पहले वह बलिया के पड़ोसी जिले गाजीपुर के जिलाधिकारी रहे हैं। वाराणसी में भी कई पदों पर रह चुके हैं। बलिया के जिलाधिकारी प्रवीण कुमार लक्षकार को संयुक्त प्रबंध निदेशक उत्तर प्रदेश जल निगम (नगरीय) के पद पर भेजा गया है

महाराजगंज के जिलाधिकारी अनुनय झा को डीएम के पद पर हरदोई भेजा गया है। संतोष कुमार शर्मा अब महाराजगंज के जिलाधिकारी होंगे। संतोष कुमार शर्मा फिलहाल अयोध्या तीर्थ विकास परिषद के मुख्य कार्यपालक अधिकारी और अयोध्या के नगर आयुक्त की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। सिद्धार्थनगर के मुख्य विकास अधिकारी जयेंद्र कुमार को अयोध्या की जिम्मेदारी दे दी गई है। जयेंद्र अब अयोध्या तीर्थ विकास परिषद के मुख्य कार्यपालक अधिकारी और यहां के नगर आयुक्त होंगे।

वहीं, सुश्री मृणाली अविनाश जोशी को संयुक्त मैजिस्ट्रेट गोरखपुर के पद से मुख्य विकास अधिकारी सिद्धार्थनगर के पद पर भेजा गया है। रवीन्द्र कुमार-1 को विशेष सचिव संस्कृति विभाग और निदेशक धर्मार्थ कार्य से अब विशेष सचिव कृषि, कृषि विपणन एवं विदेश व्यापार और कृषि शिक्षा एवं अनुसंधान विभाग भेजा गया है। संयुक्त प्रबंध निदेशक, उप्र जल निगम (नगरीय) ज्ञानेन्द्र सिंह को पीलीभीत का जिलाधिकारी बनाया गया है। पीलीभीत में जिलाधिकारी संजय कुमार सिंह को अब विशेष सचिव, संस्कृति विभाग और निदेशक धर्मार्थ कार्य होंगे।अलीगढ़ विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष श्रीमती अपूर्वा दुबे को सूडा का निदेशक बनाया गया है। अपूर्वा दुबे की जगह कुलदीप मीणा अलीगढ़ विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष होंगे। कुलदीप मीणा के पास इस समय बुलंदशहर के मुख्य विकास अधिकारी की जिम्मेदारी है। अब बुलंदशहर के मुख्य विकास अधिकारी की जिम्मेदारी मथुरा की संयुक्त मजिस्ट्रेट श्रीमति निशा संभालेंगी। इसके अलावा सूडा की निदेशक श्रीमती प्रेरणा शर्मा को विशेष सचिव, उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग भेजा गया है।

पीसीएस में कौन कहाँ

पीसीएस अधिकारियों में प्रकाश चंद्र अपर जिलाधिकारी प्रोटोकॉल एवं कानून-व्यवस्था वाराणसी को अपर जिलाधिकारी न्यायिक हाथरस, शिव नारायण अपर जिलाधिकारी न्यायिक हाथरस को अपर जिलाधिकारी न्यायिक बागपत, विनीत कुमार सिंह अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व गोरखपुर को अपर जिलाधिकारी नगर गाजियाबाद, हिमांशु वर्मा नगर मजिस्ट्रेट गोरखपुर को अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व गोरखपुर, उत्कर्ष श्रीवास्तव उप जिलाधिकारी संत कबीर नगर को नगर मजिस्ट्रेट गोरखपुर, अलंकार अग्निहोत्री सहायक नगर आयुक्त लखनऊ को नगर मजिस्ट्रेट बरेली बनाया गया है।

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सदा -ए -मोबीन ❤️✍️ दहेजऔरउसका_निवारण (रोकना)…दुनिया के सभी मुल्कों की तरक्की उसमें रहने बसने वाले इंसानों की तरक्की पर निर्भर करती है हर मुल्क में भिन्न-भिन्न जाति समूह के लोग पाए जाते हैं और सभी जातियों की अपनी अपनी संस्कृति और परंपरा होती है, आज के दौर में दहेज लगभग सभी जातियों में विद्यमान एक परंपरा है, आधुनिक दौर में उन सभी स्थापित परंपराओं को खत्म करना अति आवश्यक है जो एक प्रजातंत्रात्मक देश में समानता के सिद्धांत को प्रभावित करती हैं तथा समाज व देश की तरक्की में बाधक बनती हैं!दहेज प्रथा इसमें एक प्रमुख बाधा है इसे रोकने के लिए संसद ने 1961 में दहेज प्रतिषेध अधिनियम बनाया, अफसोस कि वह किताबों से निकलकर धरातल पर पूरी तरह से लागू नहीं हो पाया यानी नागरिकों ने उस पर पूरी तरह से अमल नहीं किया!दहेज का मतलब किसी मूल्यवान प्रतिभूति से है यह हमारे समाज की एक अहम कुरीति के रूप में उभरती चली आ रही है, इस पे जिन पढ़े-लिखे, संपन्न और प्रतिष्ठित लोगों को रोक लगाना चाहिए वही इसका प्रदर्शन कर बढ़ावा दे रहे हैं, जिसका बुरा असर गरीबों पर पड़ता है उन्हें इससे मानसिक, भावनात्मक और असमानता जैसी प्रवृति का शिकार होना पड़ता है और अपनी लड़कियों को बोझ समझने लगते हैं!इसके कारण देश में औसतन हर एक घंटे में एक महिला दहेज संबंधी कारणों से मौत का शिकार होती है, दहेज के कारण ही घरेलू हिंसा, महिला उत्पीड़न, आईपीसी 498 A, मारपीट, सीआरपीसी 125, तीन तलाक, आदि अपराध होते हैं, लोग अदालतों के चक्कर लगाकर हजारों रुपए व कीमती समय बर्बाद करते हैं और सरकारी मशीनरी के प्रयोग से देश पर आर्थिक बोझ पड़ता है!अगर सभी जातियों के पढ़े-लिखे, समाज व देश हित में सोचने वाले लोग इस प्रथा को खत्म करने के लिए अपने समाज से इस्लाही तहरीक (सुधार आंदोलन) शुरू कर दें तो यह पूरी तरह खत्म हो जाएगी!हमने अपने साथियों के साथ अपनी गद्दी (गाज़ी) बिरादरी से इस कुरीति को खत्म करने की तहरीक शुरू कर दी है!भारत के विभिन्न राज्यों में गद्दी बिरादरी के लोग रहते हैं हर क्षेत्र में किसी न किसी रूप में दहेज का चलन है हमारे समाज में अधिक दहेज की मांग करना, भारी-भरकम बारात ले जाना, तरह तरह का खाना बनवाना, बड़े-बड़े भौकाली लोगों को दावत देने को लोग अपनी प्रतिष्ठा समझते हैं! हम किसी से कम नहीं की भावना में जीने वाले हमारे गद्दी भाइयों यह सोच हमारी बिरादरी, समाज और देश की तरक्की में बाधक है!और तो और बहुत से पढ़े-लिखे हमारे नौजवान साथी यह सोच बना लेते हैं कि पढ़ लिख कर जब हमें नौकरी मिल जाएगी तो किसी पैसे वाले परिवार से हमारा रिश्ता होगा खूब दहेज मिलेगा और बहुत हसीन बीवी, यानी पढ़े-लिखे और नौकरी पेशा लड़कों में दहेज की इच्छा चार गुना बढ़ जाती है, और लड़की वाले भी यह सोच बना लेते हैं कि लड़का नौकरी वाला या पैसे वाला ही हो दहेज चाहे जितना देना पड़ जाए, मेरे गद्दी भाइयों यह सोच गलत है क्योंकि लालच में किया गया निकाह गलत है!मेरे गद्दी भाइयों हमारा दीन इस्लाम है और हमारे आदर्श हजरत मोहम्मद स. हैं, हमें अपने दीन और अपने आदर्श के बताए हुए रास्ते पर चलना है!हुजूर से शादी हजरत बीबी खदीजा रजि. ने इसलिए नहीं किया था कि वह कोई सरकारी हाकिम है या बहुत बड़े व्यापारी या जमींदार या किसी सियासी ओहदे पर हैं, बल्कि इसलिए किया था कि उनके अख्लाक, आदत, किरदार, व्यवहार, ईमानदारी, सादगी और सच्चाई की कोई मिसाल नहीं!मेरे नौजवान साथियों धन, दौलत, पद, प्रतिष्ठा हासिल करो मगर इसकी वजह से निकाह में विलंब ना करो और यह मिल जाने पर दहेज का लालच ना करो, तुम्हारा पद, दौलत तो लोगों को ही पसंद आएगी, लेकिन उसके साथ सादगी पसंद नेक इंसान बनो जो खुदा को पसंद आएगा!हम अपने ऑल इंडिया गद्दी समाज फेडरेशन के सभी अविवाहित नौजवान साथियों से गुजारिश करते हैं कि संकल्प लो कि हम अपनी शादी में बिल्कुल दहेज नहीं लेंगे दोस्तों अगर तुम्हीं इस पर अमल नहीं करोगे तो बिरादरी इस पर अमल कैसे करेगी, हुजूर साहब हर बात पर पहले खुद प्रैक्टिकल करते थे तब समाज के लोग मानते थे लिहाजा आप लोग इस पर अमल करने की मेहरबानी करें, दोस्तों त्याग अल्लाह को बहुत पसंद है, दहेज का त्याग करो!बिहार,उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश आदि के संगठन से जुड़े हमारे नौजवान साथी भी इस पर अमल करें और संकल्प लें!हुजूर ने अपनी बेटी की शादी में गृहस्ती की 9 चीजे दी थी और चंद खास लोगों को दावत दी थी,वो भी मेहर के पैस से!.. इस्लाम में बारात का भी कोई जिक्र नहीं है बारात को भी बाईकाट करें.. हम तो इसे लुटेरों का गैंग कहते हैं!हम लोग हुजूर की सुन्नत पर अमल करें निकाह में अपने चंद खास रिश्तेदारों व दोस्तों को ही ले जाएं ताकि लड़की वाले पर खाना देने का दबाव खत्म हो जाए!इस्लाम के मुताबिक निकाह में लड़की पक्ष का खर्च न के बराबर है वलीमा आदि लड़के वाले को करना चाहिए!मेरे गद्दी समाज के लोगों हमें अपने दीन पर मजबूती से अमल करना चाहिए, सुन्नत व हदीस के मुताबिक ही शादी करना चाहिए!