एक साथ तीन जनाजों को उठते देख दहल गया शहर, आंसुओं के सैलाब में डूबा पुश्तैनी गांव

  • शादी में शामिल होने मुंबई जा रहे थे, झांसी में डिवाइडर से टकराकर पलट गई कार।
  • कारोबारी, पत्नी व बेटी का घुरहुजोत में व चालक का बलरामपुर से उठा जनाजा, 4 अन्य जख्मी अस्पताल में।

उत्तर प्रदेश 15 जून 2025 ( सूरज गुप्ता )
सिद्धार्थनगर – नगर पालिका सिद्धार्थनगर के पुरानी नौगढ इलाका में शुक्रवार को तीन लाशों के उतरते ही कोहराम मच गया है। इसी के साथ उससे सटे ग्राम घुरहूजोत में चीख-पुकार मच गई। दरअसल तीनों मृतक को पुश्तैनी गांव घुरहूजोत था, मगर पुरानी नौगढ़ में मृतको का कारोबार था। लिहाजा दोनों ही स्थानों पर गम के बादल मंडराये हुए थे। तकरीबन 11:30 बजे 42 बर्षीय ओबैदुर्रहमान, उनकी 40 वर्षीय पत्नी आसमां और 12 बर्षीय बेटी हुसना परवीन की लाश जैसे ही उनके पुश्तैनी ग्राम घुरहूजोत पहुंची, पूरा गांव सदमें में डूब गया। घरों से रोने-बिलखने की आवाजें गूजने लगीं। पूरे गांव के दुखी होने का कारण यह भी था कि तीन मौतों के अलावा तीन अन्य घायलों की दशा भी अच्छी नही है। क्योंकि कार दुर्घटना में मृतक ओबैदुर्रहमान के तीन बच्चे 06 बर्षीय इस्मा, 08 बर्षीय अमिदुर्रहमान व 10 बर्षीय अब्दुल्लाह सहित ओबैदुर्रहमान के 70 बर्षीय वालिद (पिता) शहाबुद्दीन गम्भीर रूप से घायल होकर अस्पताल में थे। शुक्रवार को नमाज के बाद जैसे कब्रिस्तान ले जाने के लिए ही तीनों जनाजे एक साथ उठे, तो पूरे गांव की आंखें आसुओं में डूब गई। पुरानी नौगढ क्षेत्र में शहाबुद्दीन का दवाखाना होने के कारण वहां भी शोक का माहौल छाया हुआ था। एक पूरा परिवार ही तबाही से दो चार था। तीनों बच्चो यदि इलाज के बाद बच भी गये तो उनके परवरिश का सवाल किसी दानव की तरह मुंह बायें खडा था। आपको बता दें कि जिला मुख्यालय के नगरीय क्षेत्र से सटे बर्डपुर नम्बर-14 के
छोटे से गांव घुरहूजोत से ईद मनाने के बाद मुम्बई के लिए निकला ओबैदुर्रहमान मुम्बई के मुम्ब्रा में बिल्डिंग मेटेरियल का कारोबार करते थे। इस बार के सफर में उनके पिता भी साथ में कार से शादी समारोह में शामिल होने मुम्बई जा रहे थे। कारोबारी ओबैदुर्रहमान का पूरा परिवार बुधवार रात झांसी-कानपुर नेशनल हाईवे पर झांसी जनपद के पूंछ थाने के खिल्ली गांव के पास पहुंचा ही था कि अचानक डिवाइडर से टकराने से सडक हादसे में कार के परखच्चे उड़ गये। कार के डिवाइडर से टकराने से ओबैदुर्रहमान, उनकी पत्नी आसमां व बेटी हुसना परवीन व बलरामपुर जिले के निवासी 28 बर्षीय कार चालक आमिर की मौके पर ही मौत हो गई। जबकि सड़क हादसे में गम्भीर रूप से घायलों (कारोबारी के पिता शहाबुद्दीन, बेटी इस्मा, बेटा अमिदुर्रहमान व अब्दुल्लाह) को मेडिकल कॉलेज झांसी पहुंचाया गया। वहां कारोबारी ओबैरदुर्रहमान ने भी दम तोड़ दिया और चारों घायलों की मेडिकल कालेज में इलाज चल रहा है। वहीं चारों घायलों की हालत गम्भीर है। सीएम योगी आदित्यनाथ ने शोक संतप्त परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए घायलों के उचित इलाज के निर्देश दिये हैं। घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना भी की है। इस घटना के बाद से गांव में वीरानी छायी हुई है। लोगों का मानना है कि तीन मौतों को अब जिन्दगी में नहीं बदला जा सकता, लेकिन असली दुख अब दूसरा है। गांव वाले मानते हैं कि अगर इस हादसे में घायल शहाबुद्दीन भी न बचे और तीनों बच्चे बच गये तो उन अनाथों का भविष्य क्या होगा। यहीं वह दुख है जो गांववालों को खाये जा रहा है। तीनों लाशों को सुपूर्दे खाक करते समय माहौल गमगीन है, लोग घायलों के जीवन के लिए दुआ व प्रार्थना कर रहे हैं।

फोटो – ओबैदुर्रहमान, हुसना परवीन और आमिर (फाइल फोटो)।

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सदा -ए -मोबीन ❤️✍️ दहेजऔरउसका_निवारण (रोकना)…दुनिया के सभी मुल्कों की तरक्की उसमें रहने बसने वाले इंसानों की तरक्की पर निर्भर करती है हर मुल्क में भिन्न-भिन्न जाति समूह के लोग पाए जाते हैं और सभी जातियों की अपनी अपनी संस्कृति और परंपरा होती है, आज के दौर में दहेज लगभग सभी जातियों में विद्यमान एक परंपरा है, आधुनिक दौर में उन सभी स्थापित परंपराओं को खत्म करना अति आवश्यक है जो एक प्रजातंत्रात्मक देश में समानता के सिद्धांत को प्रभावित करती हैं तथा समाज व देश की तरक्की में बाधक बनती हैं!दहेज प्रथा इसमें एक प्रमुख बाधा है इसे रोकने के लिए संसद ने 1961 में दहेज प्रतिषेध अधिनियम बनाया, अफसोस कि वह किताबों से निकलकर धरातल पर पूरी तरह से लागू नहीं हो पाया यानी नागरिकों ने उस पर पूरी तरह से अमल नहीं किया!दहेज का मतलब किसी मूल्यवान प्रतिभूति से है यह हमारे समाज की एक अहम कुरीति के रूप में उभरती चली आ रही है, इस पे जिन पढ़े-लिखे, संपन्न और प्रतिष्ठित लोगों को रोक लगाना चाहिए वही इसका प्रदर्शन कर बढ़ावा दे रहे हैं, जिसका बुरा असर गरीबों पर पड़ता है उन्हें इससे मानसिक, भावनात्मक और असमानता जैसी प्रवृति का शिकार होना पड़ता है और अपनी लड़कियों को बोझ समझने लगते हैं!इसके कारण देश में औसतन हर एक घंटे में एक महिला दहेज संबंधी कारणों से मौत का शिकार होती है, दहेज के कारण ही घरेलू हिंसा, महिला उत्पीड़न, आईपीसी 498 A, मारपीट, सीआरपीसी 125, तीन तलाक, आदि अपराध होते हैं, लोग अदालतों के चक्कर लगाकर हजारों रुपए व कीमती समय बर्बाद करते हैं और सरकारी मशीनरी के प्रयोग से देश पर आर्थिक बोझ पड़ता है!अगर सभी जातियों के पढ़े-लिखे, समाज व देश हित में सोचने वाले लोग इस प्रथा को खत्म करने के लिए अपने समाज से इस्लाही तहरीक (सुधार आंदोलन) शुरू कर दें तो यह पूरी तरह खत्म हो जाएगी!हमने अपने साथियों के साथ अपनी गद्दी (गाज़ी) बिरादरी से इस कुरीति को खत्म करने की तहरीक शुरू कर दी है!भारत के विभिन्न राज्यों में गद्दी बिरादरी के लोग रहते हैं हर क्षेत्र में किसी न किसी रूप में दहेज का चलन है हमारे समाज में अधिक दहेज की मांग करना, भारी-भरकम बारात ले जाना, तरह तरह का खाना बनवाना, बड़े-बड़े भौकाली लोगों को दावत देने को लोग अपनी प्रतिष्ठा समझते हैं! हम किसी से कम नहीं की भावना में जीने वाले हमारे गद्दी भाइयों यह सोच हमारी बिरादरी, समाज और देश की तरक्की में बाधक है!और तो और बहुत से पढ़े-लिखे हमारे नौजवान साथी यह सोच बना लेते हैं कि पढ़ लिख कर जब हमें नौकरी मिल जाएगी तो किसी पैसे वाले परिवार से हमारा रिश्ता होगा खूब दहेज मिलेगा और बहुत हसीन बीवी, यानी पढ़े-लिखे और नौकरी पेशा लड़कों में दहेज की इच्छा चार गुना बढ़ जाती है, और लड़की वाले भी यह सोच बना लेते हैं कि लड़का नौकरी वाला या पैसे वाला ही हो दहेज चाहे जितना देना पड़ जाए, मेरे गद्दी भाइयों यह सोच गलत है क्योंकि लालच में किया गया निकाह गलत है!मेरे गद्दी भाइयों हमारा दीन इस्लाम है और हमारे आदर्श हजरत मोहम्मद स. हैं, हमें अपने दीन और अपने आदर्श के बताए हुए रास्ते पर चलना है!हुजूर से शादी हजरत बीबी खदीजा रजि. ने इसलिए नहीं किया था कि वह कोई सरकारी हाकिम है या बहुत बड़े व्यापारी या जमींदार या किसी सियासी ओहदे पर हैं, बल्कि इसलिए किया था कि उनके अख्लाक, आदत, किरदार, व्यवहार, ईमानदारी, सादगी और सच्चाई की कोई मिसाल नहीं!मेरे नौजवान साथियों धन, दौलत, पद, प्रतिष्ठा हासिल करो मगर इसकी वजह से निकाह में विलंब ना करो और यह मिल जाने पर दहेज का लालच ना करो, तुम्हारा पद, दौलत तो लोगों को ही पसंद आएगी, लेकिन उसके साथ सादगी पसंद नेक इंसान बनो जो खुदा को पसंद आएगा!हम अपने ऑल इंडिया गद्दी समाज फेडरेशन के सभी अविवाहित नौजवान साथियों से गुजारिश करते हैं कि संकल्प लो कि हम अपनी शादी में बिल्कुल दहेज नहीं लेंगे दोस्तों अगर तुम्हीं इस पर अमल नहीं करोगे तो बिरादरी इस पर अमल कैसे करेगी, हुजूर साहब हर बात पर पहले खुद प्रैक्टिकल करते थे तब समाज के लोग मानते थे लिहाजा आप लोग इस पर अमल करने की मेहरबानी करें, दोस्तों त्याग अल्लाह को बहुत पसंद है, दहेज का त्याग करो!बिहार,उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश आदि के संगठन से जुड़े हमारे नौजवान साथी भी इस पर अमल करें और संकल्प लें!हुजूर ने अपनी बेटी की शादी में गृहस्ती की 9 चीजे दी थी और चंद खास लोगों को दावत दी थी,वो भी मेहर के पैस से!.. इस्लाम में बारात का भी कोई जिक्र नहीं है बारात को भी बाईकाट करें.. हम तो इसे लुटेरों का गैंग कहते हैं!हम लोग हुजूर की सुन्नत पर अमल करें निकाह में अपने चंद खास रिश्तेदारों व दोस्तों को ही ले जाएं ताकि लड़की वाले पर खाना देने का दबाव खत्म हो जाए!इस्लाम के मुताबिक निकाह में लड़की पक्ष का खर्च न के बराबर है वलीमा आदि लड़के वाले को करना चाहिए!मेरे गद्दी समाज के लोगों हमें अपने दीन पर मजबूती से अमल करना चाहिए, सुन्नत व हदीस के मुताबिक ही शादी करना चाहिए!