लखीमपुर खीरी। 21 जून जहाँ देशभर में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की गूंज थी, वहीं लखीमपुर खीरी में विश्व संगीत दिवस के अवसर पर सुरों की एक मधुर छटा भी बिखरी। ताल वाद्य अकादमी, कोलकाता से सम्बद्ध “सुरो भारती संगीत कला केंद्र” द्वारा आयोजित “तबला वादन एवं बोल पढ़न्त प्रतियोगिता” ने शहर को एक सांगीतिक उत्सव में परिवर्तित कर दिया।मिश्राना पुलिस चौकी के पीछे, शिव मंदिर के निकट, अतुल ज्वैलर्स के सामने आयोजित इस कार्यक्रम में संगीत के विद्यार्थियों और कला प्रेमियों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। कार्यक्रम की सूत्रधार डॉ. रुचि रानी गुप्ता स्वयं रहीं, जिनकी प्रेरणा और मार्गदर्शन में यह आयोजन सम्पन्न हुआ।आरव, अंश, लक्ष्य, स्नेहा, समीक्षा, सीमा देवी जैसे युवा कलाकारों ने तबले की लय और बोलों की गति से ऐसा भाव जगाया कि श्रोता रसविभोर हो उठे।

हर प्रस्तुति मानो भारतीय सांगीतिक परंपरा का जीवंत उदाहरण बनी।डॉ. रुचि ने बताया कि “अक्सर 21 जून को लोग केवल योग दिवस के रूप में ही जानते हैं, किंतु वर्ष 2024 से हमने इस दिन को विश्व संगीत दिवस के रूप में भी मनाने का संकल्प लिया। यह प्रयास अब जनचेतना का रूप ले रहा है, जो संगीत की साधना के लिए अत्यंत सुखद संकेत है।”यह आयोजन मात्र एक प्रतियोगिता नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक चेतना की पुनर्स्थापना थी, जिसमें संगीत, साधना और सुरों की मिठास के साथ खीरी ने अपने मन को सुरबद्ध किया।”जहाँ शब्द मौन हो जाएं, वहाँ संगीत बोलता है” — यही साकार हुआ इस सुरमयी दिवस पर।

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