रिपोर्टर नौशाद मलिक
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सरकार से की न्यूनतम सहयोग देने की अपील, कहा — लोकतंत्र के प्रहरी की भी होनी चाहिए सुनवाई

बिजनौर।पत्रकारों को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहा जाता है, लेकिन उन्हें आज भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित रखा जा रहा है। यह बात दक्ष लोक न्यूज़ चैनल के संपादक, वरिष्ठ पत्रकार एवं अंतरराष्ट्रीय प्रेस परिषद बिजनौर के पूर्व जिलाध्यक्ष पंकज कुमार दक्ष ने कही। उन्होंने पत्रकारों को लेकर मौजूदा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब किसान संगठनों, जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों को टोल टैक्स, स्वास्थ्य और आवास जैसी सुविधाएं मिल सकती हैं, तो पत्रकारों को इससे बाहर क्यों रखा जाता है?

उन्होंने कहा कि पत्रकार जब गांवों, जंगलों, बॉर्डर इलाकों या आपदा ग्रस्त क्षेत्रों में जाकर खबरें कवर करते हैं, तो उन्हें न तो किसी प्रकार की सरकारी पहचान मिलती है और न ही कोई यात्रा पास या आपातकालीन स्वास्थ्य सुविधा। “हमेशा सबसे आगे खड़े रहने वाले पत्रकारों को हर मोर्चे पर खुद ही लड़ना पड़ता है,” पंकज कुमार दक्ष ने कहा।

‘क्या सच दिखाने वाला सबसे कमजोर रहेगा?’
पंकज कुमार दक्ष ने कहा कि यह सवाल केवल किसी सुविधा की मांग नहीं, बल्कि शासन-प्रशासन की सोच से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि पत्रकार हर दिन जनहित के मुद्दों को उठाते हैं, लेकिन जब बात खुद पत्रकारों की आती है, तो उन्हें “फालतू” या “असुविधा योग्य” समझ लिया जाता है।

उन्होंने कहा कि पत्रकारों की कोई राजनीतिक मांग नहीं है, बल्कि सिर्फ इतना चाहते हैं कि उन्हें रिपोर्टिंग कार्य के दौरान न्यूनतम आवश्यक सहूलियतें मिलें — जैसे टोल टैक्स में छूट, आकस्मिक स्वास्थ्य सेवा, पहचान-पत्र की वैधानिक मान्यता आदि।

सरकार से संवेदनशील रुख अपनाने की मांग
दक्ष ने स्पष्ट किया कि यह किसी सरकार या संस्था के विरुद्ध आरोप नहीं है, बल्कि एक संवेदनशील अपील है। उन्होंने कहा, “जो लोग अपनी आवाज़ खोकर दूसरों की आवाज़ बनते हैं, उनके लिए भी कोई व्यवस्था होनी चाहिए।” उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि जैसे अन्य वर्गों को विशेष सुविधाएं प्रदान की जाती हैं, वैसे ही पत्रकारों को भी न्यूनतम आवश्यक सुविधाएं दी जाएं — ताकि वे और अधिक निष्पक्ष, निर्भीक व जिम्मेदार पत्रकारिता कर सकें।

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