धर्मेन्द्र कसौधन/ब्यूरो
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से दिए जाने वाले पोषाहार (पूरक पुष्टाहार) की पूरी व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया गया है। व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए अब इसे ओटीपी (OTP) सिस्टम से जोड़ दिया गया है। नई व्यवस्था के तहत, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को आपूर्ति एजेंसी से पोषाहार प्राप्त करने के लिए अपने मोबाइल पर आने वाला ओटीपी बताना अनिवार्य होगा। इसके बिना राशन का उठान नहीं किया जा सकेगा।
इस नई व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए उप्र राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन व नैफेड (NAFED) द्वारा रेसिपी आधारित पुष्टाहार की आपूर्ति की जाएगी। प्रशासन ने लाभार्थियों को उम्र और जरूरत के हिसाब से 7 अलग-अलग श्रेणियों में बांटा है और उनके भोजन को विशेष नाम दिए हैं।

डिजिटल ट्रैकिंग और फेशियल ऑथेंटिकेशन लागू
विभागीय जानकारी के अनुसार, सभी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को अपने मोबाइल में ईएलएमडी (eLMD) ऐप डाउनलोड करना होगा। इस ऐप पर केंद्र का पूरा विवरण और लाभार्थियों की जानकारी दर्ज रहेगी। इसी ऐप के माध्यम से कार्यकर्ताओं के मोबाइल पर ओटीपी भेजा जाएगा।
जिला कार्यक्रम अधिकारी श्रेयश कुमार के मुताबिक, बिना ओटीपी साझा किए एजेंसी से पोषाहार की डिलीवरी नहीं मिलेगी। इसके साथ ही, निदेशालय स्तर से केवल उन्हीं लाभार्थियों के कोटे का राशन जारी किया जाएगा, जिनका आधार पंजीकरण और चेहरा प्रमाणीकरण (Face Authentication) सफलतापूर्वक पूरा हो चुका है।

आयु वर्ग के अनुसार पोषाहार और उनके नए ब्रांड नाम
नई व्यवस्था के तहत बच्चों की उम्र, गर्भवती महिलाओं और अति कुपोषित बच्चों की आवश्यकता को देखते हुए मेन्यू और नाम तय किए गए हैं:
- बच्चे (06 माह से 01 वर्ष) आटा बेसन हलवा (मीठा) शिशु अमृत
- बच्चे (01 वर्ष से 03 वर्ष) आटा बेसन हलवा (मीठा) शिशु आहार
- बच्चे (03 वर्ष से 06 वर्ष) • आटा बेसन बर्फी (मीठा) दलिया मूंग सोया खिचड़ी (नमकीन) बाल पुष्टिकर
4.गर्भवती एवं धात्री महिला • आटा बेसन सोया बर्फी (मीठा)दलिया मूंग दाल खिचड़ी (नमकीन) संपूर्ण मातृ आहार
- 5.अति कुपोषित बच्चे (06 माह से 01 वर्ष) ऊर्जा युक्त हलवा (मीठा) आरोग्य पोषण
- 6.अति कुपोषित बच्चे (01 वर्ष से 03 वर्ष) ऊर्जा युक्त हलवा (मीठा) बाल संजीवनी
- 7.अति कुपोषित बच्चे (03 वर्ष से 06 वर्ष) • ऊर्जा युक्त हलवा (मीठा) ऊर्जा युक्त दलिया (नमकीन) सक्षम पोषण
मुख्य उद्देश्य: इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य पोषाहार वितरण में होने वाली कालाबाजारी को रोकना, भोजन के स्वाद और गुणवत्ता में सुधार करना तथा यह सुनिश्चित करना है कि पोषण सही हकदार तक डिजिटल सत्यापन के बाद ही पहुंचे।
