जिला संवाददाता -विशाल गुप्ता
बाराबंकी।
नगर कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ला पीरबटावन में स्थित कब्रिस्तान की जमीन पर दबंगों द्वारा अवैध कब्जे की कोशिश का मामला सामने आया है। हैरानी की बात यह है कि यह मामला पहले से ही न्यायालय में विचाराधीन है, फिर भी दबंग बाज नहीं आ रहे। पीड़ित पक्ष की शिकायत पर पुलिस ने मौके पर पहुंचकर अवैध कब्जा रुकवाया, लेकिन आरोपी मौके से फरार हो गए।
पीड़ित के अनुसार, ग्राम पैसार, मोहल्ला पीरबटावन, तहसील नवाबगंज, जिला बाराबंकी में स्थित भूमि गाटा संख्या 47 को सरकारी अभिलेखों में कब्रिस्तान के रूप में दर्ज किया गया है, जो कि खालिदा फजली के नाम पर दर्ज है। यह भूमि वर्षों से कब्रिस्तान के रूप में उपयोग की जा रही है।

लेकिन, वर्ष 2001 में शिवकुमार श्रीवास्तव पुत्र विद्या प्रसाद श्रीवास्तव, निवासी सत्यप्रेमी नगर, कमरिया बाबा मंदिर, नवाबगंज, बाराबंकी द्वारा आशीष गुप्ता, निशा गुप्ता और रश्मि गुप्ता (निवासी 100, मारुति पुरम, फैजाबाद रोड, लखनऊ) के पक्ष में कुछ भूमि गाटा संख्याएं—39 मि०, 42 मि०, 44 मि०, और 46 मि० कुल 70,000 वर्ग फुट भूमि—मुख्तारनामे के माध्यम से पंजीकृत कर दी गई।
आरोप है कि शिवकुमार श्रीवास्तव ने न केवल विवादित भूमि का विक्रय अनुबंध किया, बल्कि बिना वास्तविक कब्जा दिए गाटा संख्या 46 मि० को भी बेच डाला। साथ ही, गाटा संख्या 45 दिखाकर, उसने गाटा संख्या 47, 51, और 699 (जो कि कब्रिस्तान के रूप में दर्ज हैं) को भी हेराफेरी करते हुए अवैध रूप से बेचने का प्रयास किया।

पीड़ित पक्ष का कहना है कि शिवकुमार श्रीवास्तव द्वारा सरकारी अभिलेखों में हेराफेरी कर अवैध तरीके से कब्रिस्तान की जमीन का विक्रय किया गया है, जो पूरी तरह गैरकानूनी है।
यह मामला फिलहाल सिविल जज (जू. डि.) कोर्ट नंबर-13 बाराबंकी में मूलवाद संख्या 980/2025 के तहत विचाराधीन है, जिसकी अगली सुनवाई 13 अक्टूबर 2025 को नियत है। इसके बावजूद संबंधित दबंग मौके पर निर्माण कार्य व कब्जा करने की कोशिश में लगे हुए हैं।
पीड़ित पक्ष ने प्रशासन से मांग की है कि मौके पर राजस्व विभाग द्वारा तत्काल सीमांकन कराया जाए और गाटा संख्या 47 की भूमि की पहचान स्पष्ट की जाए, ताकि अन्य भूमिधरों को कोई परेशानी न हो और कब्रिस्तान की भूमि को अवैध कब्जे से बचाया जा सके।
निष्कर्ष:
कब्रिस्तान की जमीन पर अवैध कब्जे की यह कोशिश प्रशासनिक उदासीनता और दबंगई का उदाहरण है। मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित अधिकारियों को शीघ्र कार्रवाई करनी चाहिए ताकि धार्मिक स्थल की गरिमा और कानून व्यवस्था दोनों को सुरक्षित रखा जा सके।
