लखीमपुर खीरी। अंतरराष्ट्रीय सर्पदंश जागरूकता दिवस पखवाड़े के अंतर्गत गुरुवार को जिला चिकित्सालय संबद्ध स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय मोतीपुर ओयल में गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता सीएमएस डॉ. आर.के. कोली ने की।
सर्पदंश से बचाव के लिए सीएमएस डॉ आरके कोली लोगों को सलाह दी गई कि हमेशा बंद जूते पहनें, अंधेरे में बाहर जाते समय टॉर्च का प्रयोग करें, अनाज और खाने का सामान ढककर रखें तथा घर की दीवारों के छेद बंद करें ताकि चूहे या सांप भीतर न आ सकें। लकड़ी या अन्य सामान उठाने से पहले छड़ी से हिलाकर देखें, जमीन पर सोने से बचें और मच्छरदानी का प्रयोग करें। घर के आसपास की घास काटकर और सफाई बनाए रखकर भी जोखिम कम किया जा सकता है। इस अवसर पर बड़ी संख्या में चिकित्सक और स्वास्थ्य कर्मी उपस्थित रहे।


गोष्ठी में बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. आर.पी. वर्मा, डॉ. शिखर बाजपेई, डॉ. शिशिर पांडे और डॉ. विवेक यादव ने स्वास्थ्य कर्मियों को सर्पदंश के लक्षण, प्राथमिक उपचार और बचाव के बारे में विस्तार से जानकारी दी। विशेषज्ञों ने बताया कि सर्पदंश के बाद रोगी को तुरंत सुरक्षित स्थान पर ले जाकर हिलने-डुलने से बचाना चाहिए और बिना देर किए नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाना चाहिए। झाड़-फूंक, जड़ी-बूटी या चीरा-चिप्पी जैसी परंपरागत पद्धतियाँ खतरनाक होती हैं। समय पर एंटी-स्नेक वेनम इंजेक्शन दिए जाने से रोगी की जान बचाई जा सकती है।

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