हरेन्द्र प्रताप सिंह बस्तौली खीरी। विकास खण्ड बिजुआ के बस्तौली के लिये (JJM) योजना वरदान नहीं, बल्कि बड़ी मुसीबत बन गई है। हर घर जल पहुंचाने के लिए गाँव की सभी सड़कें खोद डाली गईं, जिनकी मरम्मत महीनों से नहीं हुई है, वहीं खुले पड़े पानी के हौज (टैंक) अब स्थानीय निवासियों और बच्चों के लिए जानलेवा खतरा बन गए हैं। इस घोर लापरवाही ने पंचायत प्रशासन और ठेकेदार की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।बसतौली की कई इंटरलॉकिंग सड़को पर पैदल चलना तो दूर, वाहन चलाना भी दूभर हो गया है। पाइपलाइन बिछाने के बाद खोदी गई सड़कों को मिट्टी डालकर यूं ही छोड़ दिया गया है। ये कच्चे और ऊबड़-खाबड़ गड्ढे हर दिन छोटी-मोटी दुर्घटनाओं को न्योता दे रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि हल्की बारिश में भी ये सड़कें कीचड़ के दलदल में बदल जाती हैं, जिससे बच्चों को स्कूल जाने में भी मुश्किल होती है।खोदी गई सड़कों से भी बड़ा खतरा गाँव में पानी के खुले हौज हैं। JJM के तहत कई स्थानों पर बड़े-बड़े टैंक बनाए गए हैं, लेकिन उन पर कोई ढक्कन या सुरक्षा घेरा नहीं लगाया गया है। ये गहरे और खुले पड़े हौज दिन भर खेलते रहने वाले छोटे बच्चों के लिए मौत का जाल बन सकते हैं। ग्रामीणों को हर वक्त यह चिंता सताती है कि कोई अनहोनी न हो जाए। रात के अंधेरे में या पानी पीने की तलाश में ये खुले टैंक मवेशियों के गिरने का कारण भी बन रहे हैं, जिससे पालतू पशुओं की हानि हो रही है।प्रधानपति मनोज राज ने बताया है कि इस विषय पर ठेकेदार ओर जेई से बात की गई लेकिन कोई सकारात्मक जबाब नही मिला है सिर्फ कोरा आश्वासन मिला है। स्थानीय निवासी कलामुद्दीन,मोo रफीक,शाहरूफ़ अली,आरिफअली ने कहा, नल का पानी तो दूर की बात, अब हमारे गाँव की सड़कें भी छीन ली गईं। अगर कोई दुर्घटना होती है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी ठेकेदार और पंचायत प्रशासन की होगी।जब तक ये सड़कें दुरुस्त नहीं होतीं और खुले हौज ढके नहीं जाते, तब तक जल जीवन मिशन का ‘सुविधा’ देने का लक्ष्य, नागरिकों के लिए ‘असुविधा’ और ‘खतरा’ बना रहेगा।ग्रामीणों का कहना है कि एक अच्छी सरकारी योजना ठेकेदार की मनमानी और प्रशासनिक उदासीनता के कारण गाँव के लिए बड़ा खतरा बन गई है।जिला प्रशासन को इस गंभीर लापरवाही का तत्काल संज्ञान लेना चाहिए।

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